खड़दह सीट पर भाजपा की बड़ी जीत: कल्याण चक्रवर्ती ने 24,000+ वोटों से तोड़ा TMC का गढ़
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा की खड़दह सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। 4 मई को घोषित नतीजों में BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती ने 24,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। नॉर्थ 24 परगना जिले की यह अहम सीट एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गई है।
मतगणना के आँकड़े
मतगणना के अनुसार, BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती को 97,752 वोट मिले। TMC के उम्मीदवार देवदीप पुरोहित को 73,266 वोट प्राप्त हुए, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के देबज्योति दास (सुभो) को 19,818 वोट मिले। इस प्रकार चक्रवर्ती की जीत का अंतर 24,486 मत रहा, जो इस सीट के हालिया चुनावी इतिहास में एक उल्लेखनीय अंतर माना जा रहा है।
खड़दह सीट का राजनीतिक इतिहास
कोलकाता मेट्रोपॉलिटन एरिया का हिस्सा खड़दह एक जनरल कैटेगरी की विधानसभा सीट है, जो दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसमें पूरी खड़दह म्युनिसिपैलिटी, पानीहाटी म्युनिसिपैलिटी के कुछ वार्ड और बैरकपुर 2 ब्लॉक की ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह सीट करीब 60 वर्षों तक वामपंथ का अभेद्य किला रही, जहाँ CPI(M) ने लगातार 11 बार जीत दर्ज की।
2011 के विधानसभा चुनाव में यह सीट टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जब TMC के अमित मित्रा ने वामपंथ के दिग्गज नेता असीम दासगुप्ता को हराकर इस गढ़ को भेद दिया। 2016 में मित्रा ने पुनः जीत दर्ज की। 2021 में TMC ने काजल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, लेकिन परिणाम घोषित होने से पूर्व ही कोविड-19 के कारण उनका निधन हो गया, जिससे उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया। उस उपचुनाव में TMC के वरिष्ठ नेता सोभनदेब चट्टोपाध्याय ने BJP उम्मीदवार को भारी अंतर से हराकर पार्टी की पकड़ बनाए रखी।
शहरी मतदाताओं की भूमिका
खड़दह मुख्यतः एक शहरी सीट है, जहाँ करीब 89 प्रतिशत मतदाता शहरी क्षेत्रों में निवास करते हैं। आँकड़ों के अनुसार, इस सीट पर मतदान प्रतिशत में क्रमिक गिरावट देखी गई है, जो शहरी इलाकों की बदलती चुनावी प्रवृत्ति को दर्शाती है। बावजूद इसके, यहाँ का मतदान प्रतिशत राज्य के अन्य कई शहरी विधानसभा क्षेत्रों से बेहतर बना हुआ है।
भौगोलिक और आर्थिक पहचान
हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा खड़दह कभी जूट मिलों और भारी उद्योगों का प्रमुख केंद्र था। खड़दह जूट मिल जैसी बड़ी इकाइयों ने यहाँ की अर्थव्यवस्था को आकार दिया, हालाँकि समय के साथ इन उद्योगों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अब यहाँ की अर्थव्यवस्था औद्योगिक अवशेषों, सर्विस सेक्टर और कोलकाता से जुड़े रोज़गार के मिश्रण पर टिकी है।
आगे की राजनीतिक दिशा
यह जीत BJP के लिए पश्चिम बंगाल में शहरी आधार मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब TMC राज्य में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर मोर्चे पर सक्रिय है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP इस जीत को व्यापक राजनीतिक रणनीति में कैसे भुनाती है।