खड़दह सीट पर भाजपा की बड़ी जीत: कल्याण चक्रवर्ती ने 24,000+ वोटों से तोड़ा TMC का गढ़

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खड़दह सीट पर भाजपा की बड़ी जीत: कल्याण चक्रवर्ती ने 24,000+ वोटों से तोड़ा TMC का गढ़

सारांश

60 साल वामपंथ का किला, फिर TMC का गढ़ — और अब BJP का परचम। खड़दह सीट पर कल्याण चक्रवर्ती की 24,000 से अधिक मतों की जीत सिर्फ एक सीट का बदलाव नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के शहरी मतदाताओं के बदलते मिज़ाज का संकेत है।

मुख्य बातें

BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती ने 97,752 वोट पाकर खड़दह सीट पर जीत दर्ज की।
TMC के देवदीप पुरोहित को 73,266 और CPI(M) के देबज्योति दास (सुभो) को 19,818 वोट मिले।
जीत का अंतर 24,486 मत रहा — इस सीट के हालिया इतिहास में एक उल्लेखनीय अंतर।
खड़दह सीट करीब 60 वर्षों तक वामपंथ का गढ़ रही; CPI(M) ने यहाँ लगातार 11 बार जीत दर्ज की थी।
2011 से TMC का वर्चस्व था; 2021 के उपचुनाव में सोभनदेब चट्टोपाध्याय ने BJP को हराया था।
सीट का करीब 89% मतदाता आधार शहरी है और यह दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा की खड़दह सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। 4 मई को घोषित नतीजों में BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती ने 24,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की। नॉर्थ 24 परगना जिले की यह अहम सीट एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गई है।

मतगणना के आँकड़े

मतगणना के अनुसार, BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती को 97,752 वोट मिले। TMC के उम्मीदवार देवदीप पुरोहित को 73,266 वोट प्राप्त हुए, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के देबज्योति दास (सुभो) को 19,818 वोट मिले। इस प्रकार चक्रवर्ती की जीत का अंतर 24,486 मत रहा, जो इस सीट के हालिया चुनावी इतिहास में एक उल्लेखनीय अंतर माना जा रहा है।

खड़दह सीट का राजनीतिक इतिहास

कोलकाता मेट्रोपॉलिटन एरिया का हिस्सा खड़दह एक जनरल कैटेगरी की विधानसभा सीट है, जो दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसमें पूरी खड़दह म्युनिसिपैलिटी, पानीहाटी म्युनिसिपैलिटी के कुछ वार्ड और बैरकपुर 2 ब्लॉक की ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह सीट करीब 60 वर्षों तक वामपंथ का अभेद्य किला रही, जहाँ CPI(M) ने लगातार 11 बार जीत दर्ज की।

2011 के विधानसभा चुनाव में यह सीट टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जब TMC के अमित मित्रा ने वामपंथ के दिग्गज नेता असीम दासगुप्ता को हराकर इस गढ़ को भेद दिया। 2016 में मित्रा ने पुनः जीत दर्ज की। 2021 में TMC ने काजल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, लेकिन परिणाम घोषित होने से पूर्व ही कोविड-19 के कारण उनका निधन हो गया, जिससे उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया। उस उपचुनाव में TMC के वरिष्ठ नेता सोभनदेब चट्टोपाध्याय ने BJP उम्मीदवार को भारी अंतर से हराकर पार्टी की पकड़ बनाए रखी।

शहरी मतदाताओं की भूमिका

खड़दह मुख्यतः एक शहरी सीट है, जहाँ करीब 89 प्रतिशत मतदाता शहरी क्षेत्रों में निवास करते हैं। आँकड़ों के अनुसार, इस सीट पर मतदान प्रतिशत में क्रमिक गिरावट देखी गई है, जो शहरी इलाकों की बदलती चुनावी प्रवृत्ति को दर्शाती है। बावजूद इसके, यहाँ का मतदान प्रतिशत राज्य के अन्य कई शहरी विधानसभा क्षेत्रों से बेहतर बना हुआ है।

भौगोलिक और आर्थिक पहचान

हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा खड़दह कभी जूट मिलों और भारी उद्योगों का प्रमुख केंद्र था। खड़दह जूट मिल जैसी बड़ी इकाइयों ने यहाँ की अर्थव्यवस्था को आकार दिया, हालाँकि समय के साथ इन उद्योगों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अब यहाँ की अर्थव्यवस्था औद्योगिक अवशेषों, सर्विस सेक्टर और कोलकाता से जुड़े रोज़गार के मिश्रण पर टिकी है।

आगे की राजनीतिक दिशा

यह जीत BJP के लिए पश्चिम बंगाल में शहरी आधार मजबूत करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब TMC राज्य में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए हर मोर्चे पर सक्रिय है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP इस जीत को व्यापक राजनीतिक रणनीति में कैसे भुनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे पश्चिम बंगाल में व्यापक राजनीतिक बदलाव का प्रमाण मानना जल्दबाज़ी होगी। यह सीट दशकों से राजनीतिक उलटफेर की गवाह रही है — पहले 60 साल वामपंथ, फिर TMC, और अब BJP। असली सवाल यह है कि क्या BJP शहरी मतदाताओं का यह भरोसा विधानसभा स्तर से आगे बड़े चुनावों में भी बनाए रख सकती है। TMC के लिए यह हार एक चेतावनी है कि कोलकाता के इर्द-गिर्द के शहरी इलाकों में उसकी पकड़ कमज़ोर पड़ रही है, जबकि CPI(M) का 19,818 का वोट शेयर यह दर्शाता है कि वामपंथ अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खड़दह सीट पर 2026 के चुनाव में किसने जीत दर्ज की?
BJP उम्मीदवार कल्याण चक्रवर्ती ने खड़दह सीट पर 97,752 वोट पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने TMC के देवदीप पुरोहित को 24,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया।
खड़दह सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
खड़दह सीट करीब 60 वर्षों तक CPI(M) का अभेद्य किला रही, जहाँ वामपंथ ने लगातार 11 बार जीत दर्ज की। 2011 में TMC के अमित मित्रा ने वामपंथी दिग्गज असीम दासगुप्ता को हराकर यह सीट जीती और तब से TMC यहाँ काबिज़ थी।
2021 में खड़दह सीट पर उपचुनाव क्यों हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव में TMC उम्मीदवार काजल सिन्हा का परिणाम घोषित होने से पूर्व ही कोविड-19 के कारण निधन हो गया, जिससे उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया। उस उपचुनाव में TMC के सोभनदेब चट्टोपाध्याय ने BJP को हराया था।
खड़दह सीट किस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है?
खड़दह विधानसभा सीट दमदम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह कोलकाता मेट्रोपॉलिटन एरिया का हिस्सा है और नॉर्थ 24 परगना जिले में स्थित है।
खड़दह सीट पर BJP की इस जीत का क्या महत्व है?
यह जीत BJP के लिए पश्चिम बंगाल में शहरी आधार विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि खड़दह का लगभग 89% मतदाता आधार शहरी है। यह TMC के उस गढ़ में सेंध है जो 2011 से अटूट माना जाता था।
राष्ट्र प्रेस
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