असम बाढ़: शिवसागर में दिखौ नदी खतरे के निशान से 1.86 मीटर ऊपर, ASDMA ने एडवाइजरी जारी की
सारांश
मुख्य बातें
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) ने 25 जुलाई 2025 को शिवसागर जिले में दिखौ नदी के खतरनाक जलस्तर को देखते हुए नागरिकों के लिए आपातकालीन एडवाइजरी जारी की। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आँकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह 9 बजे IST नदी का जलस्तर 94.26 मीटर दर्ज किया गया — जो 92.40 मीटर के खतरे के निशान से 1.86 मीटर ऊपर है। जलस्तर में मामूली गिरावट के बावजूद स्थिति अभी भी गंभीर बाढ़ की श्रेणी में बनी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
ASDMA ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया कि शिवसागर में दिखौ नदी का जलस्तर लगातार ऊँचा बने रहने के कारण नागरिकों को नदी के निकट जाने से बचना चाहिए। यह चेतावनी शुक्रवार सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे IST तक प्रभावी रही। CWC ने रिपोर्ट किया कि हालाँकि जलस्तर 2 जुलाई 2024 को दर्ज किए गए अब तक के सर्वाधिक स्तर 94.35 मीटर से मात्र 0.09 मीटर नीचे है, फिर भी यह नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के लिए गंभीर जोखिम बना हुआ है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थिति पर निरंतर नज़र रख रहे हैं। इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात हैं और यदि जलस्तर पुनः बढ़ता है या नई वर्षा से स्थिति बिगड़ती है, तो तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार हैं। अधिकारियों ने कहा कि जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग मछली पकड़ने, नहाने या किसी भी गतिविधि के लिए नदी के पास न जाएँ।
आम जनता पर असर
दिखौ नदी के किनारे बसे शिवसागर जिले के निचले इलाकों में रहने वाले निवासी सर्वाधिक प्रभावित हैं। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ का सामना करता है और ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक नदियाँ बार-बार खतरे के निशान को पार करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में मानसूनी वर्षा जारी है।
क्या करें, क्या न करें
ASDMA ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अफवाहें न फैलाएँ। बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन अधिकारियों को देने का निर्देश दिया गया है।
आगे की स्थिति
CWC और ASDMA दोनों जलस्तर की घड़ी-घड़ी निगरानी कर रहे हैं। यदि आगामी घंटों में वर्षा तेज़ होती है, तो प्राधिकरण नई एडवाइजरी जारी कर सकता है। फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है।