27 अगस्त 2026
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असम में ₹796.88 करोड़ की 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट': 23 जिलों की 71 बीलों का होगा कायाकल्प

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असम में ₹796.88 करोड़ की 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट': 23 जिलों की 71 बीलों का होगा कायाकल्प

सारांश

असम की 71 बीलें सिर्फ जलाशय नहीं — लाखों मछुआरों की रोज़ी-रोटी हैं। ₹796.88 करोड़ की 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट' के ज़रिए सरमा सरकार इन्हें पुनर्जीवित कर 4,000 हेक्टेयर जल क्षेत्र और 6,000 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य साध रही है — पर्यावरण और अर्थव्यवस्था, दोनों एक साथ।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 27 अगस्त 2026 को ₹796.88 करोड़ की 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट' लॉन्च की।
परियोजना असम के 23 जिलों की 71 बीलों और लगभग 4,000 हेक्टेयर जल निकायों का कायाकल्प करेगी।
वार्षिक मछली उत्पादन लक्ष्य 6,000 मीट्रिक टन ; सालाना 570 मिलियन मछली के बच्चों का उत्पादन अपेक्षित।
लाभार्थियों को 302 नावें व जाल; 1,000 युवाओं को ₹50,000 प्रति व्यक्ति उद्यमिता अनुदान।
SHG के लिए 30 मछली चारा इकाइयाँ और 100 मछली प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित होंगी।
परियोजना एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 27 अगस्त 2026 को ₹796.88 करोड़ की महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट स्विफ्ट (SWIFT)' की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य राज्य के 23 जिलों में फैली 71 पारंपरिक बीलों (आर्द्रभूमि/जलाशय) को पुनर्जीवित करना है। एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से चल रही यह पहल पर्यावरण संरक्षण और मत्स्य पालन के ज़रिए स्थानीय समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में असम सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

परियोजना का दायरा और लक्ष्य

प्रोजेक्ट स्विफ्ट के तहत लगभग 4,000 हेक्टेयर जल निकायों का कायाकल्प किया जाएगा। परियोजना का वार्षिक मछली उत्पादन लक्ष्य 6,000 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। मछली उत्पादकता बढ़ाने के लिए सालाना लगभग 570 मिलियन मछली के बच्चों (फिंगरलिंग्स) का उत्पादन अपेक्षित है, जिन्हें कायाकल्प किए गए जलाशयों में छोड़ा जाएगा।

समुदायों को सीधा लाभ

यह परियोजना केवल पर्यावरण पुनरुद्धार तक सीमित नहीं है — इसमें मछुआरा समुदायों को सशक्त बनाने के ठोस प्रावधान भी हैं। सरकार लाभार्थियों को 302 नावें और मछली पकड़ने के जाल वितरित करेगी। इसके अलावा, मत्स्य पालन क्षेत्र में उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए 1,000 युवाओं को प्रत्येक को ₹50,000 का अनुदान दिया जाएगा।

स्वयं-सहायता समूहों (SHG) के लिए 30 मछली चारा इकाइयाँ और 100 मछली प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने की भी योजना है, जो स्थानीय मूल्य श्रृंखला को मज़बूत करेंगी और अतिरिक्त रोज़गार के अवसर पैदा करेंगी।

मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि असम की बीलों की कहानी 'हमारे लोगों की कहानी से अलग नहीं है।' उन्होंने राज्य की आर्द्रभूमियों को असम की 'प्रमुख प्राकृतिक संपत्ति' बताते हुए कहा कि यह पहल इन जल निकायों को बहाल करने के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका भी सुनिश्चित करेगी।

गौरतलब है कि असम की बीलें न केवल मत्स्य पालन का आधार हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। दशकों की उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इनमें से कई बीलें सिकुड़ती जा रही थीं।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था का संतुलन

राज्य सरकार ने इस परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ साधने का प्रयास बताया है। ADB के सहयोग से मिलने वाली तकनीकी और वित्तीय सहायता इस परियोजना को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करने में सहायक होगी। बीलों के पुनरुद्धार से असम के जलीय संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन को भी बल मिलने की उम्मीद है।

आगे की राह

परियोजना के क्रियान्वयन से असम के मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है, जो राज्य की खाद्य सुरक्षा और निर्यात क्षमता दोनों को मज़बूत करेगी। स्थानीय SHG और युवा उद्यमियों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — ADB-वित्त पोषित परियोजनाओं में भारत का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है, और बीलों पर अतिक्रमण हटाना राजनीतिक रूप से संवेदनशील काम है। 570 मिलियन फिंगरलिंग्स का उत्पादन लक्ष्य और 6,000 मीट्रिक टन मछली का आँकड़ा तभी हासिल होगा जब पुनर्जीवित जल निकायों की दीर्घकालिक निगरानी सुनिश्चित हो। युवा उद्यमिता अनुदान स्वागतयोग्य है, पर यह देखना होगा कि लाभ वास्तव में सबसे कमज़ोर मछुआरा समुदायों तक पहुँचता है या नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोजेक्ट स्विफ्ट (SWIFT) क्या है?
प्रोजेक्ट स्विफ्ट असम सरकार की ₹796.88 करोड़ की परियोजना है, जिसे ADB के सहयोग से शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य के 23 जिलों में फैली 71 पारंपरिक बीलों (आर्द्रभूमि) का कायाकल्प करना और मत्स्य पालन के ज़रिए स्थानीय समुदायों की आजीविका सुधारना है।
असम की बीलें क्या होती हैं और इनका पुनरुद्धार क्यों ज़रूरी है?
बीलें असम की पारंपरिक आर्द्रभूमि या जलाशय होती हैं, जो मत्स्य पालन, बाढ़ नियंत्रण और जैव विविधता के लिए अहम हैं। दशकों की उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण ये सिकुड़ती जा रही थीं, जिससे मछुआरा समुदायों की आजीविका प्रभावित हुई है।
प्रोजेक्ट स्विफ्ट से मछुआरों को क्या सीधा फायदा मिलेगा?
परियोजना के तहत लाभार्थियों को 302 नावें और मछली पकड़ने के जाल दिए जाएंगे। इसके अलावा, 1,000 युवाओं को ₹50,000 प्रति व्यक्ति उद्यमिता अनुदान और SHG के लिए 30 मछली चारा इकाइयाँ व 100 प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी।
परियोजना का मछली उत्पादन लक्ष्य क्या है?
प्रोजेक्ट स्विफ्ट का लक्ष्य वार्षिक 6,000 मीट्रिक टन मछली उत्पादन और सालाना लगभग 570 मिलियन मछली के बच्चों (फिंगरलिंग्स) का उत्पादन करना है। ये फिंगरलिंग्स कायाकल्प किए गए जलाशयों में छोड़े जाएंगे।
इस परियोजना में ADB की क्या भूमिका है?
एशियाई विकास बैंक (ADB) इस परियोजना में वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। ADB की भागीदारी परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क्रियान्वित करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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