23 जुलाई 2026
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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ नवमी पर भस्म आरती, भांग-चंदन से हुआ दिव्य शृंगार

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उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ नवमी पर भस्म आरती, भांग-चंदन से हुआ दिव्य शृंगार

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ शुक्ल नवमी पर भस्म आरती का अलौकिक दृश्य — भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य शृंगार, कपिला गाय की भस्म से आरती, और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँजता मंदिर परिसर। रात से ही कतार में खड़े श्रद्धालुओं की आस्था का अनूठा संगम।

मुख्य बातें

23 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रातः 7:30 बजे भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग, सूखे मेवे और चंदन से दिव्य शृंगार किया गया तथा पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक हुआ।
अब भस्म आरती में श्मशान की राख के स्थान पर कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से निर्मित विशेष भस्म का उपयोग होता है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतार में खड़े रहे; मंदिर परिसर में पुलिस बल की व्यापक तैनाती की गई।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 23 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी के पावन अवसर पर प्रातः 7:30 बजे बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।

कपाट खुलने का क्रम

गुरुवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो गया।

पंचामृत अभिषेक और दिव्य शृंगार

मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात भांग, सूखे मेवे और चंदन से बाबा का दिव्य शृंगार किया गया, जो महाकाल की पारंपरिक पूजा-पद्धति का अभिन्न अंग है।

भस्म आरती की विशेषता

शृंगार के उपरांत मंदिर के पुजारियों ने पवित्र भस्म से बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न की। गौरतलब है कि पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

बाबा महाकाल के दर्शन की लालसा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े रहे। बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए आम जनमानस के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

आगे की आस्था

आषाढ़ माह में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे दर्शन के लिए निर्धारित समय और नियमों का पालन करें, ताकि सभी को सुगमता से बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है — जो सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखती है। भस्म की सामग्री का श्मशान राख से कपिला गाय के गोबर और जड़ी-बूटियों में परिवर्तन एक विचारणीय बदलाव है, जो परंपरा और स्वच्छता के बीच संतुलन साधने का प्रयास दर्शाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि आस्था की इस अभिव्यक्ति में श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी मंदिर प्रशासन के लिए भीड़ प्रबंधन की चुनौती भी प्रस्तुत करती है, जिसे दीर्घकालिक दृष्टि से संबोधित किया जाना आवश्यक है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है और यह कब होती है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर का सबसे पवित्र और प्राचीन अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। यह प्रतिदिन तड़के होती है; 23 जुलाई 2026 को आषाढ़ नवमी पर यह प्रातः 7:30 बजे संपन्न हुई।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
पहले भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा और स्वच्छता के बीच संतुलन के उद्देश्य से किया गया है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
23 जुलाई 2026 को महाकाल के शृंगार में क्या-क्या अर्पित किया गया?
इस दिन बाबा महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद भांग, सूखे मेवे और चंदन से दिव्य शृंगार किया गया और पवित्र भस्म से आरती संपन्न हुई।
महाकालेश्वर भस्म आरती के दर्शन के लिए कितने श्रद्धालु आते हैं?
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। 23 जुलाई को बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतार में खड़े रहे और मंदिर परिसर में व्यापक पुलिस तैनाती की गई।
राष्ट्र प्रेस
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