नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान: बेंगलुरु का बॉवरिंग अस्पताल बना नोडल केंद्र, DNA नमूने होंगे एकत्र
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 4 सितंबर को नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान के लिए बेंगलुरु के बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल को आधिकारिक नोडल केंद्र नियुक्त किया है। इस केंद्र पर लापता व्यक्तियों के परिजनों के DNA नमूने एकत्र किए जाएंगे, ताकि नेपाल में मिले शवों की वैज्ञानिक पहचान संभव हो सके।
निर्णय की पृष्ठभूमि
यह कदम काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा विदेशी नागरिकों के शवों की पहचान और रिपैट्रिएशन (स्वदेश वापसी) से संबंधित जारी किए गए नोट के बाद उठाया गया है। कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया।
नोडल अधिकारी और उनकी ज़िम्मेदारियाँ
आदेश के अनुसार, बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नागेश कुप्पास्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे लापता व्यक्तियों के परिजनों और पीड़ितों के बीच रिश्ते की पुष्टि करने के साथ-साथ DNA नमूनों के संग्रह, प्रोफाइलिंग और आगे की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
परिजनों के लिए निर्देश
सरकार ने लापता व्यक्तियों के प्रथम श्रेणी के रिश्तेदारों — माता-पिता, संतान, भाई-बहन या पति-पत्नी — से अस्पताल में नियुक्त अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। परिजनों को अपने साथ हालिया पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र, तथा लापता व्यक्ति से संबंध साबित करने वाले दस्तावेज़ ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन DNA नमूनों के ज़रिए प्रभावित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकेंगी।
भारत की राहत कोशिशें और लापता नागरिकों की स्थिति
इस बीच, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में अपनी द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत ने अब तक सात विमानों के ज़रिए नेपाल को लगभग 95 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके अतिरिक्त, बचाव और राहत कार्यों में सहयोग के लिए 54 कर्मी भी भेजे गए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, नेपाल सरकार की ज़रूरतों के अनुसार सहायता जारी रखेगा और आने वाले दिनों में फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज तथा अन्य माँगी गई सामग्री भी भेजी जाएगी। अभी तक 275 भारतीय नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है, जबकि 1,907 भारतीय नागरिक चीन से सुरक्षित नेपाल पहुँच चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत में अब कोई भी भारतीय यात्री फंसा हुआ नहीं है।
आगे की राह
DNA-आधारित पहचान प्रक्रिया उन परिवारों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है जो हफ्तों से अपने लापता प्रियजनों की खबर का इंतज़ार कर रहे हैं। यह कदम भारत-नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है, और अन्य प्रभावित राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।