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नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान: बेंगलुरु का बॉवरिंग अस्पताल बना डीएनए नोडल केंद्र

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नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान: बेंगलुरु का बॉवरिंग अस्पताल बना डीएनए नोडल केंद्र

सारांश

कर्नाटक सरकार ने नेपाल में लापता अपने नागरिकों की वैज्ञानिक पहचान के लिए बेंगलुरु के बॉवरिंग अस्पताल को डीएनए नोडल केंद्र बनाया है। अभी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि भारत 95 टन राहत सामग्री और 54 कर्मी नेपाल भेज चुका है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु के बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल को नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान के लिए डीएनए नोडल केंद्र नियुक्त किया गया।
नागेश कुप्पास्त , फोरेंसिक मेडिसिन विभाग, को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
परिजनों को आधार कार्ड, पासपोर्ट फोटो और संबंध प्रमाण पत्र के साथ अस्पताल पहुँचने के निर्देश दिए गए हैं।
भारत अब तक 7 विमानों से 95 टन राहत सामग्री और 54 कर्मी नेपाल भेज चुका है।
अभी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं; 1,907 नागरिक चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुँचे।

कर्नाटक सरकार ने नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों की पहचान के लिए बेंगलुरु के बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल को आधिकारिक डीएनए नोडल केंद्र नियुक्त किया है। यह कदम काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा विदेशी नागरिकों के शवों की पहचान और रिपैट्रिएशन से संबंधित नोट जारी किए जाने के बाद उठाया गया है।

नोडल केंद्र की स्थापना और जिम्मेदारियाँ

कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा शुक्रवार, 4 सितंबर को जारी आदेश के तहत, बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नागेश कुप्पास्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे लापता व्यक्तियों और उनके परिजनों के बीच आनुवंशिक संबंध की पुष्टि करने के साथ-साथ डीएनए नमूनों के संग्रह, प्रोफाइलिंग और आगे की समस्त प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

परिजनों के लिए निर्देश

सरकार ने लापता व्यक्तियों के प्रथम श्रेणी के रिश्तेदारों — माता-पिता, संतान, भाई-बहन या पति-पत्नी — से अपील की है कि वे बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में नियुक्त अधिकारियों से शीघ्र संपर्क करें। अस्पताल पहुँचते समय परिजनों को अपने साथ हाल ही का पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र, तथा लापता व्यक्ति के साथ संबंध प्रमाणित करने वाले दस्तावेज लाना अनिवार्य होगा।

अधिकारियों के अनुसार, डीएनए नमूनों के माध्यम से नेपाल में मिले शवों की वैज्ञानिक पद्धति से पहचान की जा सकेगी, जिससे प्रभावित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त होगी और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की जा सकेंगी।

भारत की मानवीय सहायता

नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को जानकारी दी कि भारत अब तक सात विमानों के ज़रिए लगभग 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसके अतिरिक्त बचाव और राहत कार्यों में सहयोग के लिए 54 कर्मी भी तैनात किए गए हैं।

नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, नेपाल सरकार की आवश्यकताओं के अनुरूप सहायता जारी रखेगा। आने वाले दिनों में और फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज तथा अन्य अनुरोधित सामग्री भेजने की भी योजना है।

लापता और सुरक्षित भारतीय नागरिकों की स्थिति

अभी तक 275 भारतीय नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं, 1,907 भारतीय नागरिक चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुँच चुके हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस समय तिब्बत में कोई भी भारतीय यात्री फंसा हुआ नहीं है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में आई आपदा के बाद भारत-नेपाल समन्वय तेज़ हो गया है। डीएनए-आधारित पहचान प्रक्रिया न केवल प्रभावित परिवारों को राहत देगी, बल्कि रिपैट्रिएशन की कानूनी प्रक्रिया को भी सुगम बनाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की केंद्रीकृत व्यवस्था भविष्य में ऐसी आपदाओं में भी मॉडल के रूप में काम आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती यह है कि 275 लापता भारतीय नागरिकों के परिजनों तक यह जानकारी समय पर पहुँचे। डीएनए पहचान प्रक्रिया तभी कारगर होगी जब दूरदराज़ के ज़िलों में रहने वाले परिवारों को भी इसकी सूचना मिले और उन्हें बेंगलुरु तक पहुँचने में सरकारी सहायता मिले। यह भी देखना होगा कि काठमांडू में मिले शवों के डीएनए नमूने किस गति से भारत भेजे जाते हैं — क्योंकि देरी से न केवल पहचान जटिल होती है, बल्कि परिवारों की पीड़ा भी बढ़ती है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉवरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल को नोडल केंद्र क्यों बनाया गया है?
कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस अस्पताल को नेपाल में लापता कर्नाटक के नागरिकों के परिजनों के डीएनए नमूने एकत्र करने के लिए नोडल केंद्र नियुक्त किया है। यह निर्णय काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के निर्देशों के बाद लिया गया, ताकि शवों की वैज्ञानिक पहचान और रिपैट्रिएशन प्रक्रिया सुचारू हो सके।
परिजनों को अस्पताल जाते समय कौन-से दस्तावेज़ साथ ले जाने होंगे?
परिजनों को हाल ही का पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड या अन्य सरकारी पहचान पत्र, और लापता व्यक्ति के साथ संबंध प्रमाणित करने वाले दस्तावेज़ साथ लाने होंगे। केवल प्रथम श्रेणी के रिश्तेदार — माता-पिता, संतान, भाई-बहन या पति-पत्नी — डीएनए नमूना दे सकते हैं।
नेपाल में अभी कितने भारतीय नागरिक लापता हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अभी तक 275 भारतीय नागरिकों का कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं, 1,907 भारतीय नागरिक चीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुँच चुके हैं और तिब्बत में फिलहाल कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है।
नेपाल आपदा में भारत ने अब तक क्या सहायता भेजी है?
भारत ने अब तक सात विमानों के ज़रिए लगभग 95 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और बचाव कार्यों के लिए 54 कर्मी भी तैनात किए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि आने वाले दिनों में फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य अनुरोधित सामग्री भी भेजी जाएगी।
डीएनए पहचान प्रक्रिया से प्रभावित परिवारों को क्या फायदा होगा?
डीएनए नमूनों के ज़रिए नेपाल में मिले शवों की वैज्ञानिक पहचान संभव होगी, जिससे परिवारों को अपने लापता प्रियजनों के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। इससे शवों की रिपैट्रिएशन और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ भी सुगम होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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