ट्विशा मामला: भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को हटाने की प्रक्रिया शुरू, विभाग ने मांगा जांच प्रतिवेदन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने ट्विशा मामले में विवादों में घिरी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल-2 की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की औपचारिक प्रक्रिया आरंभ कर दी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आयोग के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर नियमों के तहत शीघ्र जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह कदम 21 मई 2026 को सामने आया, जब यह प्रकरण भोपाल में लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
विभाग का पत्र और कानूनी आधार
विभाग ने रजिस्ट्रार को उपभोक्ता संरक्षण (राज्य आयोग और जिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए अर्हता, भर्ती की पद्धति, नियुक्ति की प्रक्रिया, कार्यकाल, पद से त्यागपत्र और हटाना) नियम 2020 के उपनियम 9(2) के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए प्रतिवेदन सौंपने को कहा है। पत्र में स्पष्ट रूप से आपराधिक मामले का उल्लेख किया गया है, जिसे इस कार्यवाही का आधार बनाया गया है। गौरतलब है कि यह पत्र केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि हटाने की प्रक्रिया की पहली ठोस कड़ी माना जा रहा है।
गिरिबाला सिंह पर दर्ज आपराधिक मामला
थाना कटारा हिल्स, भोपाल में दर्ज मामले के अनुसार, गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 65(3)(5) तथा दहेज प्रतिबंध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज है। इन्हीं धाराओं का हवाला देकर विभाग ने नियमों के तहत हटाने की कार्यवाही तेज की है। परिवार की ओर से पहले ही उन्हें पद से हटाने की माँग की जा चुकी थी।
उपभोक्ता आयोग की साख पर सवाल
ट्विशा प्रकरण ने उपभोक्ता आयोग जैसी महत्वपूर्ण न्यायिक संस्था की विश्वसनीयता और गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार उपभोक्ता आयोगों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाने का दावा कर रही है। आलोचकों का कहना है कि न्यायिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर आपराधिक मामले दर्ज होना आम जनता का भरोसा कमज़ोर करता है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच प्रतिवेदन में गिरिबाला सिंह के विरुद्ध पर्याप्त आधार पाए जाते हैं, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। सरकार इस मामले में जल्द ही अंतिम निर्णय ले सकती है। इस प्रकरण के परिणाम का असर भविष्य में उपभोक्ता आयोगों की नियुक्ति प्रक्रिया और जवाबदेही तंत्र पर भी पड़ सकता है।