बिहार के भूमिहीन स्कूलों को मिलेगी जमीन, दिलीप जायसवाल ने दिए नोडल अधिकारी नियुक्ति के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने 10 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के उन सभी विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि आवंटित की जाएगी, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है। उन्होंने बताया कि बीते दो महीनों में 24 केंद्रीय विद्यालयों को अधिकतम पाँच एकड़ तक भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसके साथ ही विद्यालय परिसरों और खेल मैदानों पर जमे अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई भी तेज़ की गई है।
नोडल अधिकारी की होगी नियुक्ति
पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के दूसरे दिन शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जायसवाल ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग से जुड़े भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रत्येक जिले में एक अलग नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा। इस दायित्व के लिए डीसीएलआर या एडीएम स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, ताकि भूमि संबंधी अड़चनें जिला स्तर पर ही सुलझाई जा सकें।
अतिक्रमण और पहुँच पथ पर फोकस
मंत्री ने बताया कि राजस्व विभाग को ऐसे विद्यालयों की सूची प्राप्त हो चुकी है जहाँ अतिक्रमण की गंभीर समस्या है। इन स्कूलों को अतिक्रमणमुक्त कराने के साथ-साथ उन तक पहुँचने के लिए आवश्यक मार्ग हेतु भूमि उपलब्ध कराने का काम भी तेज़ गति से चल रहा है। डॉ. जायसवाल ने कहा कि शिक्षा की बुनियादी ढाँचागत ज़रूरतें पूरी किए बिना गुणवत्ता सुधार संभव नहीं है।
अधिकारियों को स्कूल दौरे का सुझाव
राजस्व मंत्री ने विभागीय सचिव, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडी) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया कि वे महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से सीधा संवाद करें और कक्षा लें। उनका मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी वास्तविकता को समझने में मदद मिलेगी।
सकारात्मक कार्यसंस्कृति पर जोर
डॉ. जायसवाल ने अधिकारियों को मानसिक तनाव से दूर रहते हुए सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हर कार्य परिणामकेंद्रित होना चाहिए और समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के माध्यम से कार्यों की समीक्षा की जानी चाहिए। कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी उपस्थित रहे, जिनकी पहल पर शिक्षकों की लंबित समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। आगे चलकर इन प्रयासों का असर बिहार की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और बुनियादी ढाँचे दोनों पर दिखना अपेक्षित है।