ओडिशा: कोविड अनाथ 50,000 बच्चों को मार्च से सहायता बंद, बीजद ने सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने 9 जुलाई को ओडिशा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि कोविड-19 महामारी के दौरान अनाथ हुए 50,000 से अधिक बच्चों को मार्च 2026 से मासिक वित्तीय सहायता मिलनी बंद हो गई है। पार्टी ने राज्य सरकार से बकाया राशि सहित सहायता तत्काल बहाल करने की माँग की है।
क्या है आशीर्वाद योजना
कोविड-19 महामारी के दौरान ओडिशा में हज़ारों बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया। इन बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आशीर्वाद योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत जिन बच्चों ने अपने दोनों माता-पिता खोए, उन्हें ₹2,500 प्रति माह और जिन्होंने माता या पिता में से किसी एक को खोया, उन्हें ₹1,500 प्रति माह की सहायता राशि दी जाती थी।
यह राशि सीधे बच्चों की देखभाल करने वाले रिश्तेदारों के बैंक खातों में अथवा उन संस्थानों के खातों में जमा की जाती थी जहाँ बच्चे रह रहे थे। जिला बाल संरक्षण अधिकारी इस योजना को ज़मीनी स्तर पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
मार्च से बंद हुई सहायता
बीजद के मीडिया समन्वयक एवं प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने बताया कि मार्च 2026 से राज्य सरकार ने यह मासिक सहायता राशि देना बंद कर दी है। उनके अनुसार, इस निर्णय से इन बच्चों के पालन-पोषण और देखभाल में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। मोहंती ने कहा कि जिला बाल संरक्षण अधिकारी भी अब अपनी बेबसी जाहिर कर रहे हैं, क्योंकि सरकारी धनराशि न मिलने से वे ज़रूरतमंद बच्चों की मदद करने में असमर्थ हैं।
सरकार पर व्यापक आरोप
बीजद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केवल कोविड अनाथों के मामले में ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवाओं को पेंशन देने में भी विफल रही है। पार्टी ने इसे 'अमानवीय' करार दिया और कहा कि सबसे कमज़ोर तबकों की उपेक्षा सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
गौरतलब है कि यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया गया है जब ओडिशा में सत्ता परिवर्तन के बाद से कई कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
बीजद की माँग
विपक्षी बीजद ने राज्य सरकार से स्पष्ट माँग की है कि मार्च 2026 से रुकी हुई बकाया सहायता राशि तत्काल जारी की जाए और आगे से मासिक भुगतान बिना किसी व्यवधान के सुनिश्चित किया जाए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो वह इस मुद्दे को और तीव्रता से उठाएगी।