कनॉट प्लेस दुकानें जबरदस्ती बंद कराने का आरोप: राहुल गांधी ने भाजपा पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 1 नवंबर 2026 को एक्स पर जारी वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कनॉट प्लेस की दुकानें जबरदस्ती बंद करवा दी हैं। उनका यह बयान उस दिन आया जब रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की महारैली आयोजित थी।
राहुल गांधी का सीधा आरोप
राहुल गांधी ने वीडियो में कहा, 'हमने सब लोगों से कहा कि जब आप मार्च और महारैली के लिए यहां आएंगे, चीजें खरीदें, खरीदारी करें। मगर, यहां कनॉट प्लेस में आते हुए हमें पता लगा कि भाजपा ने सारी की सारी दुकानें जबरदस्ती बंद करवा दी, तो ट्रेडर्स का नुकसान कौन कर रहा है, कैसे हो रहा है, यह आप जान लीजिए।' गौरतलब है कि भाजपा की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
महारैली में जुटे विपक्षी नेता
इस अवसर पर कनॉट प्लेस में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राजद नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेता उपस्थित रहे। रैली से पहले राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था, 'कनॉट प्लेस आइए, साथ चलते हैं या सीधे रामलीला मैदान में मिलते हैं' — और लोगों से दिल्ली के बाज़ारों में खरीदारी करने की भी अपील की थी।
व्यापार संगठन की चिंता
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 1 नवंबर 2026 की सुबह राहुल गांधी को चौथा पत्र लिखकर दिल्ली के व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चिंता जताई। CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में परिवहन लगभग पूरी तरह ठप रहा और करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहने की आशंका थी।
आम जनता और कारोबार पर असर
CTI ने अनुमान लगाया कि महारैली के चलते दिल्ली के 80 प्रतिशत कारोबार पर प्रतिकूल असर हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी रैली समर्थकों से खरीदारी की अपील कर रहे थे, जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत थी। CTI का कहना है कि राजनीतिक आयोजनों के कारण व्यापारियों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आगे क्या
भाजपा की ओर से दुकानें बंद कराने के आरोप पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आना बाकी है। दिल्ली व्यापार जगत की नज़र अब इस बात पर है कि विपक्ष और सत्तारूढ़ दल दोनों में से कौन व्यापारियों के नुकसान की भरपाई का जिम्मा लेता है। CTI का चौथा पत्र यह भी संकेत देता है कि व्यापारी वर्ग इस मुद्दे पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाए हुए है।