19 अगस्त 2026
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भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी 'सुविधा की व्यवस्था' — शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में तीखा हमला

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भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी 'सुविधा की व्यवस्था' — शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में तीखा हमला

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' के संपादकीय में भाजपा की नई कार्यकारिणी को 'सुविधा की व्यवस्था' बताया — आरोप है कि यह टीम मोदी-शाह की दिशा में चलने के लिए बनाई गई है, चुनावी ज़िम्मेदारी से नहीं। पीयूष गोयल की कोषाध्यक्ष नियुक्ति और ₹7,000 करोड़ के पार्टी खजाने पर भी तीखे सवाल उठाए गए।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 19 अगस्त को 'सामना' संपादकीय में भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को 'सुविधा की व्यवस्था' करार दिया।
आरोप लगाया गया कि नई टीम प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए गठित की गई है।
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के 7 महीने बाद कार्यकारिणी घोषित हुई; इस दौरान बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा हारी।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर नैतिक आपत्ति; पार्टी खजाने में ₹7,000 करोड़ से अधिक बताए गए।
संपादकीय में ईवीएम पर ट्रंप, तुलसी गबार्ड और मस्क के बयानों का हवाला देकर भारत में पेपर बैलट की माँग का समर्थन किया गया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई घोषित राष्ट्रीय कार्यकारिणी को 'सुविधा की व्यवस्था' करार दिया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में बुधवार, 19 अगस्त को प्रकाशित संपादकीय में आरोप लगाया गया कि भाजपा की नई टीम न तो स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम है और न ही उसमें कोई उल्लेखनीय राजनीतिक ऊर्जा दिखती है।

मुख्य आरोप: 'मोदी-शाह की पसंद लागू करने वाली टीम'

संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि यह नई नेतृत्व संरचना मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए गठित की गई है। संपादकीय में तर्क दिया गया कि पार्टी की 'असली मशीनरी' अब सत्ता के बाहरी माध्यमों पर निर्भर हो चुकी है।

संपादकीय में तंज कसा गया — 'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जिस दिशा में चाहें, पार्टी की गाड़ी को चुपचाप उसी दिशा में चलाने वाले लोग ढूंढने में 7 महीने नहीं लगने चाहिए थे।' यह टिप्पणी इस तथ्य के संदर्भ में की गई कि नितिन नवीन के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के करीब 7 महीने बाद नई कार्यकारिणी घोषित हुई।

बांकीपुर उपचुनाव हार का हवाला

शिवसेना (यूबीटी) ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि इस बीच नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट छोड़ी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा वह सीट हार गई। संपादकीय के अनुसार, यह हार प्रशांत किशोर की रणनीतिक उपस्थिति के कारण हुई।

चुनावी तंत्र 'आउटसोर्स' होने का आरोप

संपादकीय में यह भी कहा गया कि भाजपा की नई टीम पर 'चुनाव जीतने का कोई असली बोझ' नहीं है। आरोप लगाया गया कि चुनावी रणनीति और जमीनी कार्य अब राज्य सरकार, पुलिस, धन और ईवीएम के माध्यम से आउटसोर्स कर दिया गया है।

संपादकीय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तुलसी गबार्ड और एलन मस्क के हवाले दिए गए, जिन्होंने ईवीएम की कमज़ोरियों और अमेरिका में पेपर बैलट पर भरोसे की बात कही थी। इसकी तुलना भारत से करते हुए संपादकीय में कहा गया कि यहाँ चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय बार-बार पेपर बैलट की माँग ठुकरा रहे हैं।

पीयूष गोयल की नियुक्ति पर नैतिक आपत्ति

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) ने नैतिक आपत्ति जताई। संपादकीय में कहा गया कि भाजपा के खजाने में ₹7,000 करोड़ से अधिक की राशि है और देशभर में उसके बड़े कार्यालय हैं। ऐसे में गोयल को संगठन का पद स्वीकार करने से पहले सरकारी पद से इस्तीफा देना चाहिए था।

आगे क्या

शिवसेना (यूबीटी) ने निष्कर्ष निकाला कि यह पूरा फेरबदल महज 'सुविधा की व्यवस्था' है — औपचारिक पद तो बाँट दिए गए हैं, लेकिन भाजपा के चुनावी तंत्र की असली कमान केंद्रीय स्तर पर ही बनी हुई है। यह देखना होगा कि भाजपा इन आरोपों का जवाब किस प्रकार देती है और नई कार्यकारिणी आगामी चुनावों में अपनी भूमिका कैसे साबित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भाजपा की उस पुरानी परंपरा से भी अलग नहीं है जिसमें सत्ता और संगठन के बीच की रेखा धुँधली रही है। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह कार्यकारिणी अगले राज्य चुनावों में स्वतंत्र संगठनात्मक क्षमता दिखा पाती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने भाजपा की नई कार्यकारिणी को 'सुविधा की व्यवस्था' क्यों कहा?
शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम नहीं है और केवल प्रधानमंत्री मोदी व गृह मंत्री शाह की प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए बनाई गई है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इसे औपचारिक पदों का वितरण बताया गया, न कि असली नेतृत्व का गठन।
नितिन नवीन कौन हैं और उनका भाजपा कार्यकारिणी से क्या संबंध है?
नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि उनके अध्यक्ष बनने के करीब 7 महीने बाद नई कार्यकारिणी घोषित हुई। इस बीच उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट छोड़ी, जो उपचुनाव में भाजपा हार गई।
पीयूष गोयल की भाजपा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्ति पर विवाद क्यों है?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) ने नैतिक आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि भाजपा के खजाने में ₹7,000 करोड़ से अधिक की राशि है, इसलिए गोयल को संगठन पद लेने से पहले सरकारी मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए था।
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार का क्या कारण बताया गया?
शिवसेना (यूबीटी) के 'सामना' संपादकीय के अनुसार, बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की हार प्रशांत किशोर की रणनीतिक उपस्थिति के कारण हुई। नितिन नवीन द्वारा यह सीट छोड़ने के बाद यह उपचुनाव हुआ था।
संपादकीय में ईवीएम और पेपर बैलट का मुद्दा क्यों उठाया गया?
शिवसेना (यूबीटी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, तुलसी गबार्ड और एलन मस्क के उन बयानों का हवाला दिया जिनमें उन्होंने ईवीएम की कमज़ोरियों और पेपर बैलट पर भरोसे की बात कही थी। इसकी तुलना भारत से करते हुए संपादकीय में कहा गया कि यहाँ चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय बार-बार पेपर बैलट की माँग ठुकरा रहे हैं।
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