बसपा विधायक सतीश यादव ने संविधान और लोकतंत्र के लिए मतदान का किया समर्थन
सारांश
Key Takeaways
- बसपा विधायक सतीश यादव ने संविधान और लोकतांत्रिक शक्तियों की रक्षा के लिए मतदान किया।
- सांप्रदायिक शक्तियों को पराजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- महागठबंधन के पक्ष में मतदान किया गया।
- मायावती का नेतृत्व और उनकी भूमिका की सराहना की गई।
- धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत का विश्वास व्यक्त किया गया।
पटना, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बसपा विधायक सतीश यादव ने राज्यसभा चुनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि हमने संविधान और लोकतांत्रिक शक्तियों को मजबूत करने के उद्देश्य से मतदान किया।
उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमने सांमतशाही, अफसरशाही और सांप्रदायिक ताकतों को पराजित करने के लिए मतदान किया। इसके अतिरिक्त, हमने महागठबंधन के पक्ष में मतदान किया ताकि संविधान और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मजबूती मिल सके।
उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती का उल्लेख करते हुए कहा कि बहन जी हमेशा सांप्रदायिक शक्तियों को पराजित करने और संविधान को सशक्त बनाने की दिशा में खड़ी रहती हैं। हम लोग बाबा साहेब अंबेडकर के अनुयायी हैं, और ऐसी स्थिति में हमारे लिए आवश्यक है कि हम संविधानिक शक्तियों को सशक्त करने की दिशा में आगे बढ़ते रहें।
उन्होंने एआईएमआईएम का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे जैसे कई अन्य दल बिहार में संविधानिक शक्तियों को मजबूती देने के पक्षधर रहे हैं। हमने इस दिशा में पहले भी कई कदम उठाए हैं और भविष्य में भी उठाते रहेंगे।
बसपा विधायक ने विश्वास व्यक्त किया कि सांप्रदायिक ताकतें हारेंगी और धर्मनिरपेक्ष ताकतें जीतेंगी, और यह संदेश पूरे देश में जाएगा। जब सभी सांप्रदायिक ताकतें एकजुट होंगी, तभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को जीत मिलेगी। हमें विश्वास है कि इस दिशा में हमें सफलता मिलेगी।
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने भी राज्यसभा चुनाव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मैंने आज वोट डाल दिया। हमें पूरा विश्वास है कि हम जीत हासिल करेंगे। मुझे विश्वास है कि हमें 41 से ज्यादा वोट मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि हमने सुबह तक लगातार अपने विधायकों से संपर्क साधने की कोशिश की है। इसके अलावा, अब खबरें आ रही हैं कि बीएसपी के विधायक गायब हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक भी आ चुके हैं। सभी मतदान करेंगे। ऐसी स्थिति में मैं सभी से यही कहना चाहूंगा कि वे किसी भी प्रकार के मुगालते में न रहें। मुगालते में रहना किसी भी स्थिति में उचित नहीं होगा।