कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने बंगाल अस्पतालों में मरीज भोजन बजट ₹112 प्रति मरीज बहाल किया
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार की उस अधिसूचना पर लगी अंतरिम रोक हटा दी, जिसमें राज्य के सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के भोजन के लिए प्रति मरीज आवंटन को ₹57 से बढ़ाकर ₹112 किया गया था। न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति अजय गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि केवल कानूनी जटिलताओं के आधार पर सरकार को कल्याणकारी कदम उठाने से नहीं रोका जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल की नई राज्य सरकार ने 23 जुलाई 2026 को एक अधिसूचना जारी कर सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भोजन के लिए प्रति मरीज आवंटन को ₹57 से बढ़ाकर ₹112 करने का निर्णय लिया था। यह वृद्धि इसलिए आवश्यक मानी गई क्योंकि अतीत में राज्य-संचालित अस्पतालों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर बार-बार शिकायतें आती रही थीं। सरकार का तर्क रहा है कि मामूली आवंटन में बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से असंभव था।
एकल पीठ की रोक और विवाद
अधिसूचना जारी होने के बाद एक संगठन ने इसे न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ में चुनौती दी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मरीजों के भोजन आवंटन से जुड़ा एक अन्य मामला पहले से अदालत में लंबित है, इसलिए राज्य सरकार स्वयं संशोधित दर-सूची तय नहीं कर सकती। इस तर्क को स्वीकार करते हुए एकल पीठ ने राज्य सरकार के निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी।
खंडपीठ का निर्णय
राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश को न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति अजय गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी। मंगलवार दोपहर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने एकल पीठ की अंतरिम रोक को रद्द कर दिया। खंडपीठ ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि 'यह वांछनीय नहीं है कि केवल कानूनी जटिलताओं के कारण राज्य सरकार सकारात्मक कल्याणकारी कदम उठाने में असमर्थ हो।'
आम मरीजों पर असर
खंडपीठ के आदेश के बाद राज्य सरकार के लिए बढ़ी हुई दर पर मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने में अब कोई कानूनी बाधा नहीं रही। गौरतलब है कि सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीज, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के परिवार, अपने दैनिक भोजन के लिए इसी सरकारी व्यवस्था पर निर्भर होते हैं। ₹57 के पुराने आवंटन पर पोषणयुक्त भोजन परोसना लंबे समय से विशेषज्ञों और चिकित्सा संगठनों की आलोचना का विषय रहा था।
आगे की राह
हालाँकि मूल मामला — जो मरीजों के भोजन आवंटन की दर तय करने से संबंधित है — अभी भी न्यायालय में लंबित है। खंडपीठ के इस आदेश से अंतरिम राहत तो मिली है, लेकिन अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है। राज्य सरकार को भविष्य में इस मामले में अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना होगा।