सीबीएसई पोर्टल में 20 मिनट में खामियाँ उजागर: 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी का बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 6 जून को 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पोर्टल में मौजूद गंभीर सुरक्षा खामियाँ महज 20 मिनट में उजागर कर दीं। उनके अनुसार, पोर्टल में एक मास्टर पासवर्ड हार्डकोड था, जिससे किसी भी मूल्यांकनकर्ता के खाते तक पहुँचा जा सकता था और लगभग 3 करोड़ स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएँ तथा डेटाबेस तक अनधिकृत पहुँच संभव थी।
कैसे मिली खामियाँ
निसर्ग अधिकारी ने बताया कि जब सीबीएसई ने अपना पोर्टल लॉन्च किया और सर्कुलर जारी किए, तो उन्होंने गहराई से जाँच शुरू की। पोर्टल का जावास्क्रिप्ट फ्रंट-एंड कोड — जो लगभग 9,000 लाइन का था — सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था। उन्होंने एआई-असिस्टेड टूल्स की मदद से उस कोड की समीक्षा की और उसमें एक मास्टर कोड पासवर्ड खोजा।
उन्होंने कहा, 'उस मास्टर पासवर्ड से, यूजर आईडी होने पर किसी भी मूल्यांकनकर्ता के खाते को एक्सेस किया जा सकता था।' गूगल सर्च और अन्य स्रोतों से कुछ मूल्यांकनकर्ताओं की यूजर आईडी हासिल कर वे उन खातों में लॉग-इन करने में सफल रहे। इसके बाद उन्हें पता चला कि वे मूल्यांकनकर्ताओं के पेपर देख सकते थे और ग्रेड भी जेनरेट कर सकते थे।
45 कमजोरियाँ रिपोर्ट, सीबीएसई की चुप्पी
अधिकारी के अनुसार, उन्होंने कुल 45 सुरक्षा खामियाँ चिह्नित कीं और उनकी रिपोर्ट सीबीएसई को भेजी, लेकिन बोर्ड की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने तीन महीने प्रतीक्षा की और परिणाम आने के बाद यह जानकारी सार्वजनिक की। सार्वजनिक खुलासे के बाद उन्हें और भी कमजोरियाँ मिलीं, जिनसे लगभग 3 करोड़ स्कैन की हुई उत्तर पुस्तिकाओं, डेटाबेस और अन्य संवेदनशील सामग्री तक पहुँच संभव थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीएसई और सीईआरटी सुरक्षा रिपोर्टों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेते। उनके अनुसार, सीबीएसई के अपने समझौते में लिखा था कि पोर्टल को प्रोडक्शन में लाने से पहले सीओईएम द्वारा ऑडिट और वीएपीटी टेस्टिंग अनिवार्य थी, लेकिन उनका दावा है कि ऐसा नहीं हुआ।
एफआईआर पर प्रतिक्रिया
सीबीएसई ने अपने पीबीआर पोर्टल पर हुए डीडीओएस (DDoS) हमले के संदर्भ में एफआईआर दर्ज कराई है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने या उनके साथ रिसर्च करने वाले किसी भी व्यक्ति ने डीडीओएस हमला नहीं किया। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई चिंता नहीं है। मैं सीबीएसई से जुड़े कुछ लोगों और साइबर कम्युनिटी के संपर्क में हूँ। मुझे बिल्कुल भी डर नहीं है।'
सीबीएसई के लिए सुझाव
अधिकारी ने सीबीएसई को सलाह दी कि वे सुरक्षा रिपोर्टों को गंभीरता से लें, साइबर विशेषज्ञों से नियमित परामर्श लें और पोर्टल को प्रोडक्शन में लाने से पहले अनिवार्य रूप से उचित ऑडिट और सुरक्षा जाँच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है — सुरक्षा को उतनी प्राथमिकता नहीं दी जाती जितनी मिलनी चाहिए।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में सरकारी डिजिटल अवसंरचना की साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षा से जुड़े पोर्टलों पर करोड़ों छात्रों का संवेदनशील डेटा संग्रहीत रहता है, इसलिए इस तरह की खामियाँ राष्ट्रीय महत्व की हैं।