चैत्र नवरात्रि: मां हिंगुला के अद्भुत चमत्कार और जगन्नाथ मंदिर की रसोई

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चैत्र नवरात्रि: मां हिंगुला के अद्भुत चमत्कार और जगन्नाथ मंदिर की रसोई

सारांश

चैत्र नवरात्रि के आगमन पर मां हिंगुला के अद्भुत चमत्कार और जगन्नाथ मंदिर की रसोई की अनूठी परंपराओं की जानकारी प्राप्त करें।

Key Takeaways

  • चैत्र नवरात्रि में मां हिंगुला की पूजा का विशेष महत्व है।
  • मंदिर में मां की सोने से बनी प्रतिमा है।
  • मां हिंगुला के दर्शन से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
  • हिंगुला यात्रा ओडिशा की संस्कृति का प्रतीक है।
  • चैत्र नवरात्रि में भारी संख्या में भक्त मंदिर आते हैं।

नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 19 मार्च को नौ विभिन्न रूपों में भक्तों के समक्ष आने के लिए मां दुर्गा की तैयारियाँ देशभर के देवी मंदिरों में शुरू हो चुकी हैं।

ओडिशा में मां भगवती के अनेक स्वरूपों की पूजा होती है, लेकिन चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मां भगवती को अग्नि के रूप में पूजा जाता है, और यह विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा हुआ है। यहाँ हम मां हिंगुला के मंदिर की चर्चा कर रहे हैं, जो सिद्धपीठों में से एक है।

ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित मां हिंगुला मंदिर अपने भव्यता और आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में मां की सोने से बनी प्रतिमा विराजमान है, जिसमें मां के चारों हाथों में अस्त्र और शस्त्र हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां का दिव्य शृंगार किया जाता है। विशेष रूप से, मां हिंगुला को अग्नि की देवी के रूप में पूजने की परंपरा है। भक्त चैत्र नवरात्रि में मां के दर्शन के बाद भोग को अग्निकुंड में अर्पित करते हैं।

स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, मां हिंगुला का संबंध जगन्नाथ मंदिर से भी है। कहा जाता है कि पुरी के राजा को भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में आदेश दिया था कि मां हिंगुला की पूजा करें ताकि जगन्नाथ मंदिर की अनूठी रसोई में प्रतिदिन आने वाले विशाल प्रसाद का प्रबंधन किया जा सके। यह मान्यता है कि देवी पुरी की रसोई में पवित्र अग्नि के रूप में प्रकट होती हैं, यही वजह है कि चैत्र महीने में मां हिंगुला के मंदिर में 'हिंगुला यात्रा' निकाली जाती है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिकता का प्रतीक है, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाती है।

चैत्र नवरात्रि में मां हिंगुला को समर्पित मेला भी लगता है, जिसमें भक्त भारी संख्या में मां के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों का मानना है कि मां हिंगुला के अग्नि रूप में दर्शन करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि भक्त विशेष रूप से नवजात बच्चों को मां के दर्शन के लिए लेकर आते हैं और कुछ लोग वहाँ मुंडन भी कराते हैं।

Point of View

जो न केवल भक्तों को उत्साहित करता है, बल्कि ओडिशा की समृद्ध संस्कृति का भी परिचायक है। मां हिंगुला की यात्रा और पूजा परंपरा स्थानीय समुदायों के लिए एक विशेष महत्व रखती है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

मां हिंगुला का मंदिर कहाँ स्थित है?
मां हिंगुला का मंदिर ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है।
चैत्र नवरात्रि में मां हिंगुला की पूजा क्यों की जाती है?
चैत्र नवरात्रि में मां हिंगुला को अग्नि के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
हिंगुला यात्रा क्या है?
हिंगुला यात्रा चैत्र महीने में निकाली जाती है और यह आध्यात्मिकता और ओडिशा की संस्कृति का प्रतीक है।
मां हिंगुला की विशेषता क्या है?
मां हिंगुला को अग्नि की देवी के रूप में पूजा जाता है और उनके दर्शन से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
क्या चैत्र नवरात्रि में मेला लगता है?
हाँ, चैत्र नवरात्रि में मां हिंगुला को समर्पित मेला लगता है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में आते हैं।
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