बांद्रा में ₹11 करोड़ की रंगदारी: छोटा राजन गैंग का नाम लेकर धमकी, मुंबई क्राइम ब्रांच ने 5 आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (एईसी) ने 1 सितंबर 2026 को बांद्रा पश्चिम में एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के ज़रिए पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो एक रियल एस्टेट डेवलपर से कथित तौर पर ₹11 करोड़ की रंगदारी वसूलने पहुँचे थे। पुलिस के अनुसार, दबाव बनाने के लिए कुख्यात छोटा राजन गैंग का नाम इस्तेमाल किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
पुलिस के मुताबिक, यह मामला बांद्रा पश्चिम स्थित एक पुनर्विकास परियोजना से जुड़ा है। संबंधित संपत्ति आर्कडायोसिस ऑफ बॉम्बे ट्रस्ट की बताई जा रही है। दिलजे प्रॉपर्टी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने जून 2026 में इस परियोजना के लिए पंजीकृत अनुबंध किया था।
पुराने जर्जर भवन को ध्वस्त किए जाने के बाद कथित आरोपी डेनियल स्टीवन और एथेल स्टीवन तथा उनके कथित साथियों ने निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया और डेवलपर से धन की माँग करने लगे। पुलिस का आरोप है कि समय के साथ यह माँग बढ़ती गई और बाद में राजलक्ष्मी कंपनी से जुड़े कुछ लोगों तथा अन्य कथित सहयोगियों को शामिल कर करोड़ों रुपये की रंगदारी माँगी जाने लगी।
धमकी और दबाव का तरीका
पुलिस के अनुसार, 26 जून को लगभग 10 से 15 लोग दो वाहनों में सवार होकर पुनर्विकास स्थल पर पहुँचे। इनमें से कुछ के पास कथित तौर पर हथियार भी थे। इन लोगों ने साइट सुपरवाइज़र जाहिद शेख और सुरक्षाकर्मियों को धमकाया और निर्माण कार्य रोकने को कहा।
आरोप है कि डेवलपर को चेतावनी दी गई कि पैसे न देने पर कंपनी के मालिकों को झूठे आपराधिक मामलों में फँसाया जाएगा — जिनमें कथित तौर पर यौन अपराधों से जुड़े मामले और शारीरिक नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ भी शामिल थीं। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब दबाव बनाने के लिए कथित तौर पर छोटा राजन गैंग का नाम इस्तेमाल किया गया।
पुलिस के मुताबिक, बातचीत और दबाव के बाद रंगदारी की रकम घटाकर ₹11 करोड़ की गई, और पहली किस्त के रूप में ₹25 लाख देने पर सहमति बनी।
ट्रैप ऑपरेशन और गिरफ्तारी
डेवलपर ने एंटी-एक्सटॉर्शन सेल से संपर्क किया, जिसके बाद अधिकारी अरुण थोराट के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया। 1 सितंबर को बांद्रा पश्चिम के नमदार हाउस, हिल रोड स्थित एक कार्यालय में रकम देने की योजना थी।
पुलिस ने असली नोटों की जगह बैग में ₹500 के नकली नोटों की 50 गड्डियाँ रखीं, जिन पर 'चिल्ड्रन्स बैंक ऑफ इंडिया' अंकित था। हालाँकि, पहली नज़र में असली दिखाने के लिए प्रत्येक बंडल के ऊपर और नीचे असली ₹500 के नोट लगाए गए थे। जैसे ही डेनियल स्टीवन, एथेल स्टीवन और नसीर अब्दुल शेख ने बैग स्वीकार किया, एईसी टीम ने उन्हें दबोच लिया। ऑपरेशन के दौरान उनके कथित दो सहयोगी अब्दुल्ला खान और रेमी खेस्टी फर्नांडिस (जो कथित तौर पर छोटा राजन गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है) को भी गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 5 सितंबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
जाँच के अहम पहलू
मुंबई क्राइम ब्रांच अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जाँच का फोकस कथित रंगदारी के पूरे नेटवर्क, बाकी फरार आरोपियों की पहचान और धन के लेन-देन पर है।
जाँच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या छोटा राजन गैंग का वास्तव में इस मामले से कोई संबंध था, या आरोपियों ने केवल डेवलपर को डराने के लिए अंडरवर्ल्ड का नाम इस्तेमाल किया। पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश के साथ-साथ कथित अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है।
आगे क्या होगा
पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान जाँचकर्ता यह स्थापित करने की कोशिश करेंगे कि इस साजिश में और कितने लोग शामिल थे। 5 सितंबर 2026 को अदालत में अगली सुनवाई होगी, जिसमें हिरासत की अवधि बढ़ाई जा सकती है। मुंबई पुलिस के अनुसार, मामले में अभी और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।