मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा ओलंपिक 2026 का औपचारिक शुभारंभ किया
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा ओलंपिक 2026 का शुभारंभ किया।
- ओलंपिक में 12 खेलों का आयोजन होगा।
- 700 आत्मसमर्पण करने वाले खिलाड़ी इसमें भाग ले रहे हैं।
- यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास है।
- गजरू को शुभंकर के रूप में चुना गया है।
अंबिकापुर, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय सरगुजा ओलंपिक 2026 का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और एमसीबी जिले के खिलाड़ियों ने परेड में सलामी दी। मुख्यमंत्री साय ने ओलंपिक की मशाल प्रज्वलित करके इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इस समारोह में अंतर्राष्ट्रीय महिला पहलवान गीता फोगाट भी उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि बस्तर क्षेत्र बहुत बड़ा है, लेकिन पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। इस कारण वहां विकास में बाधा आई है। छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयास जारी हैं। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प अब साकार हो रहा है। हमने वहां के युवाओं को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद को छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने वाले कई लोग भी बस्तर ओलंपिक का हिस्सा बने थे। 700 आत्मसमर्पण करने वाले खिलाड़ियों ने इस ओलंपिक में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि जब हमने सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया, तो गजरू को शुभंकर बनाया गया। इस ओलंपिक के लिए तीन लाख 49 हजार से अधिक पंजीकरण हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में खो-खो, कबड्डी, बालीबाल, फुटबाल सहित कुल 12 खेलों का आयोजन किया जाएगा। सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई। भविष्य में भी सरगुजा ओलंपिक का आयोजन जारी रहेगा।
यह जानकारी भी दी गई कि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज सहित स्थानीय मंत्री और विधायक तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी और नागरिक इस समारोह में उपस्थित रहे। सरगुजा ओलंपिक छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा एक बड़ा खेल महाकुंभ है, जो मुख्यतः सरगुजा संभाग (उत्तर छत्तीसगढ़) के आदिवासी-बहुल क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को पहचानने, उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने और युवाओं (विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी युवाओं) को खेल का मंच प्रदान करने के लिए आरंभ किया गया है।