मुख्यमंत्री सरमा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार: 'हर कदम हमारे लिए आशीर्वाद'
सारांश
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गुवाहाटी, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) अध्यक्ष भूपेन बोरा के खिलाफ कांग्रेस द्वारा आयोजित की गई "श्मशान यात्रा" पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से अपरिपक्व और विपरीत प्रभाव डालने वाला कदम करार दिया।
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि कांग्रेस के द्वारा उठाए गए किसी भी कदम का अंततः लाभ भाजपा को ही मिलता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "जब भी कांग्रेस कुछ करती है, वह हमारे लिए आशीर्वाद साबित होता है। इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन पार्टी की ताकत नहीं, बल्कि उसकी हताशा को दर्शाते हैं।"
सरमा ने भूपेन बोरा के कांग्रेस छोड़ने के संदर्भ में उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने वर्षों पहले कांग्रेस छोड़ी थी, तब पार्टी कार्यालय एपीसीसी के मुख्यालय 'राजीव भवन' को साफ किया गया था।
उन्होंने कहा, "जब मैंने कांग्रेस छोड़ी थी, तब राजीव भवन को धोया गया था, लेकिन मैंने कभी मन में कोई कटुता नहीं रखी।" उन्होंने वर्तमान विपक्षी राजनीति की भाषा और व्यवहार पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए।
भूपेन बोरा ने पिछले सप्ताह कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है, उन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था और केंद्रीय नेतृत्व से संवाद के अवसर नहीं दिए गए।
करीब तीन दशकों तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद बोरा ने २२ फरवरी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की, जिसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
बोरा के इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन और प्रतीकात्मक 'श्मशान यात्रा' निकाली। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे "पार्टी से विश्वासघात" बताया है।
वहीं, भाजपा नेताओं ने बोरा के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह विपक्षी खेमे में बढ़ती निराशा का संकेत है।
मुख्यमंत्री सरमा ने पहाड़ी जिला करबी आंगलोंग में टिकट वितरण को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी हकीकत और संगठनात्मक फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार तय करते समय जीत की संभावना और स्थानीय समर्थन को प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरा का भाजपा में जाना असम में विपक्षी राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस अपने गठबंधन को मजबूत करने और जनाधार को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है।
दूसरी ओर, भाजपा हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को राज्य में अपने बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताते हुए आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही है।