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MP विधानसभा मानसून सत्र: कांग्रेस ने मोहन यादव-शिवराज के मुखौटे पहनकर किसान मुद्दों पर सरकार को घेरा

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MP विधानसभा मानसून सत्र: कांग्रेस ने मोहन यादव-शिवराज के मुखौटे पहनकर किसान मुद्दों पर सरकार को घेरा

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर किसान संकट पर सरकार को नाटकीय तरीके से घेरा। खाद की कमी, मुआवज़े की अनदेखी और सरकारी खरीदी में गड़बड़ी — ये तीन मुद्दे इस पाँच दिवसीय सत्र की केंद्रीय लड़ाई बन गए हैं।

मुख्य बातें

20 जुलाई को मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने मुखौटा पहनकर सांकेतिक प्रदर्शन किया।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री मोहन यादव , शिवराज सिंह चौहान और ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहने गए।
कांग्रेस के मुख्य आरोप: खाद संकट, सरकारी खरीदी में गड़बड़ी, और किसानों को उचित मुआवज़ा न मिलना।
पाँच दिवसीय मानसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा; एजेंडे पर समान नागरिक संहिता (UCC) रिपोर्ट भी शामिल।
सिंघार ने आरोप लगाया कि किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को भोपाल में कांग्रेस विधायकों ने एक अभूतपूर्व सांकेतिक प्रदर्शन किया — मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा परिसर में किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस ने राज्य सरकार पर किसान-विरोधी नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया।

मुखौटा प्रदर्शन: क्या हुआ विधानसभा परिसर में

कांग्रेस विधायकदल के सदस्य मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे लगाकर विधानसभा परिसर में पहुँचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इन मुखौटाधारी विधायकों से किसानों की समस्याओं पर सवाल-जवाब किए — यह प्रदर्शन सरकार की कथित निष्क्रियता को उजागर करने की एक नाटकीय कोशिश थी। गौरतलब है कि यह सोलहवीं विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन था, जो 24 जुलाई तक चलेगा।

कांग्रेस के आरोप: खाद, बीज और मुआवज़े का संकट

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में खाद संकट गहरा गया है, सरकारी खरीदी में अनियमितताएँ हो रही हैं और किसानों को उचित मुआवज़ा नहीं मिल रहा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 'प्रदेश का किसान गंभीर संकट से गुजर रहा है, लेकिन सरकार समाधान निकालने के बजाय केवल औपचारिकताओं में उलझी हुई है।' उन्होंने आगे कहा कि 'किसान को समय पर न खाद मिल रही है, न बीज मिल रहा है।'

सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन खरीदने में व्यस्त हैं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान केवल प्रधानमंत्री की प्रशंसा में लगे हैं, जबकि कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना किसानों की समस्याओं के समाधान में पूरी तरह विफल रहे हैं। ये आरोप सरकार की ओर से अभी तक खंडित नहीं किए गए हैं।

किसानों की पीड़ा: मुआवज़े से लेकर उपज मूल्य तक

कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। उपज का उचित मूल्य न मिलना और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का मुआवज़ा न मिलना भी किसानों की प्रमुख शिकायतें हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार 'सत्ता के अहंकार' में किसानों की पीड़ा को अनदेखा कर रही है।

मानसून सत्र का महत्व: UCC रिपोर्ट भी एजेंडे पर

राज्य की सोलहवीं विधानसभा का यह पाँच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा। राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य सरकार इसमें समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रतिवेदन पेश करने वाली है। ऐसे में विपक्ष का किसान-केंद्रित आक्रामक रुख सत्र के शुरुआती स्वर को तय कर देता है।

आगे क्या

सत्र के शेष दिनों में कांग्रेस के किसान मुद्दों पर विधानसभा के भीतर और बाहर दबाव बनाए रखने की संभावना है। UCC रिपोर्ट की प्रस्तुति के साथ-साथ खाद आपूर्ति और फसल मुआवज़े पर भी तीखी बहस अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के पास किसान संकट का कोई ठोस वैकल्पिक प्रस्ताव है — या यह केवल सत्र की सुर्खियाँ बटोरने की रणनीति है। मध्य प्रदेश में खाद आपूर्ति की समस्या नई नहीं है; पिछले कई मानसून सत्रों में भी यह मुद्दा उठा, लेकिन ठोस विधायी हस्तक्षेप के बिना यह बहस हर बार अधूरी रह गई। UCC रिपोर्ट के साथ-साथ किसान मुद्दों को एजेंडे पर रखना विपक्ष की दोहरी रणनीति दिखाती है — पर सरकार की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया न आना भी उतना ही बड़ा राजनीतिक संकेत है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस ने मुखौटा प्रदर्शन क्यों किया?
कांग्रेस विधायकों ने 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर किसानों की समस्याओं पर सरकार की कथित निष्क्रियता को उजागर किया। यह प्रदर्शन खाद संकट, मुआवज़े की अनदेखी और सरकारी खरीदी में गड़बड़ी के आरोपों पर केंद्रित था।
MP मानसून सत्र 2025 कब तक चलेगा?
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा। यह पाँच दिवसीय सत्र है जिसमें समान नागरिक संहिता (UCC) की रिपोर्ट पेश किए जाने की भी संभावना है।
कांग्रेस ने किसानों के किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?
कांग्रेस के तीन प्रमुख आरोप हैं — पहला, प्रदेश में खाद की कमी और किसानों का लंबी कतारों में खड़ा होना; दूसरा, सरकारी खरीदी में अनियमितताएँ; और तीसरा, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का उचित मुआवज़ा न मिलना। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि किसानों को समय पर न खाद मिल रही है, न बीज।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर क्या आरोप लगाए?
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन खरीदने में व्यस्त हैं और किसानों की पीड़ा को अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान केवल प्रधानमंत्री की प्रशंसा में लगे हैं और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना किसान समस्याओं के समाधान में विफल रहे हैं। ये आरोप सरकार ने अभी तक सार्वजनिक रूप से खंडित नहीं किए हैं।
MP विधानसभा के मानसून सत्र में UCC रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
राज्य सरकार इस मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रतिवेदन पेश करने वाली है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। किसान मुद्दों के साथ UCC रिपोर्ट का एक ही सत्र में आना इसे राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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