MP विधानसभा मानसून सत्र: कांग्रेस ने मोहन यादव-शिवराज के मुखौटे पहनकर किसान मुद्दों पर सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को भोपाल में कांग्रेस विधायकों ने एक अभूतपूर्व सांकेतिक प्रदर्शन किया — मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा परिसर में किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस ने राज्य सरकार पर किसान-विरोधी नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया।
मुखौटा प्रदर्शन: क्या हुआ विधानसभा परिसर में
कांग्रेस विधायकदल के सदस्य मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना के मुखौटे लगाकर विधानसभा परिसर में पहुँचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इन मुखौटाधारी विधायकों से किसानों की समस्याओं पर सवाल-जवाब किए — यह प्रदर्शन सरकार की कथित निष्क्रियता को उजागर करने की एक नाटकीय कोशिश थी। गौरतलब है कि यह सोलहवीं विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन था, जो 24 जुलाई तक चलेगा।
कांग्रेस के आरोप: खाद, बीज और मुआवज़े का संकट
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में खाद संकट गहरा गया है, सरकारी खरीदी में अनियमितताएँ हो रही हैं और किसानों को उचित मुआवज़ा नहीं मिल रहा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 'प्रदेश का किसान गंभीर संकट से गुजर रहा है, लेकिन सरकार समाधान निकालने के बजाय केवल औपचारिकताओं में उलझी हुई है।' उन्होंने आगे कहा कि 'किसान को समय पर न खाद मिल रही है, न बीज मिल रहा है।'
सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ज़मीन खरीदने में व्यस्त हैं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान केवल प्रधानमंत्री की प्रशंसा में लगे हैं, जबकि कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना किसानों की समस्याओं के समाधान में पूरी तरह विफल रहे हैं। ये आरोप सरकार की ओर से अभी तक खंडित नहीं किए गए हैं।
किसानों की पीड़ा: मुआवज़े से लेकर उपज मूल्य तक
कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं। उपज का उचित मूल्य न मिलना और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का मुआवज़ा न मिलना भी किसानों की प्रमुख शिकायतें हैं। आलोचकों का कहना है कि सरकार 'सत्ता के अहंकार' में किसानों की पीड़ा को अनदेखा कर रही है।
मानसून सत्र का महत्व: UCC रिपोर्ट भी एजेंडे पर
राज्य की सोलहवीं विधानसभा का यह पाँच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चलेगा। राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य सरकार इसमें समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रतिवेदन पेश करने वाली है। ऐसे में विपक्ष का किसान-केंद्रित आक्रामक रुख सत्र के शुरुआती स्वर को तय कर देता है।
आगे क्या
सत्र के शेष दिनों में कांग्रेस के किसान मुद्दों पर विधानसभा के भीतर और बाहर दबाव बनाए रखने की संभावना है। UCC रिपोर्ट की प्रस्तुति के साथ-साथ खाद आपूर्ति और फसल मुआवज़े पर भी तीखी बहस अपेक्षित है।