गौरव गोगोई ने अमित शाह को लिखा पत्र, नेहरू प्लेस नस्लीय हमले पर पूर्वोत्तर महिलाओं की सुरक्षा की माँग

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गौरव गोगोई ने अमित शाह को लिखा पत्र, नेहरू प्लेस नस्लीय हमले पर पूर्वोत्तर महिलाओं की सुरक्षा की माँग

सारांश

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नेहरू प्लेस में असम-बिहार की महिलाओं पर कथित नस्लीय हमले और दिल्ली में पूर्वोत्तर नागरिकों के विरुद्ध बढ़ते उत्पीड़न के पैटर्न पर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है — यह मामला अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक गहरी और चिंताजनक प्रवृत्ति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 13 मई 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में पूर्वोत्तर महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताई।
10 मई 2026 को नेहरू प्लेस में असम और बिहार की दो महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़, मारपीट और नस्लीय दुर्व्यवहार हुआ; दिल्ली पुलिस ने नस्लीय निशानेबाजी की पुष्टि की।
मणिपुर की एक वकील और उनकी ट्रांस-महिला मित्र पर दक्षिण दिल्ली के पार्क में चाकू से कथित हमला; चार किशोर हिरासत में।
फरवरी 2026 में मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ भी कथित नस्लीय दुर्व्यवहार।
गोगोई ने बेहतर कानूनी सुरक्षा , जन जागरूकता और संस्थागत तंत्र की समीक्षा की माँग की।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 13 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिकों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पत्र में 10 मई 2026 को नेहरू प्लेस में असम और बिहार की दो महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़, मारपीट और नस्लीय दुर्व्यवहार की घटना का विशेष उल्लेख किया गया है। गोगोई ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

नेहरू प्लेस घटना: क्या हुआ था

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10 मई 2026 की सुबह असम और बिहार की दो महिलाएं नेहरू प्लेस स्थित एक होटल के बाहर चाय पी रही थीं, तभी पुरुषों के एक समूह ने उन पर अपमानजनक नस्लीय टिप्पणियाँ करना शुरू कर दिया। कथित तौर पर मौखिक उत्पीड़न के रूप में शुरू हुई यह घटना बाद में शारीरिक हमले में बदल गई। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके कपड़े फाड़ दिए गए और सार्वजनिक रूप से उनके साथ हिंसक दुर्व्यवहार किया गया। दिल्ली पुलिस ने बाद में पुष्टि की कि इन महिलाओं को नस्लीय आधार पर निशाना बनाया गया था।

अन्य घटनाएँ जो पत्र में उठाई गईं

गोगोई ने अपने पत्र में इस एकल घटना से परे एक व्यापक पैटर्न की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने उल्लेख किया कि मणिपुर की एक वकील और उनकी एक ट्रांस-महिला मित्र के साथ दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में किशोर लड़कों के एक समूह द्वारा कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार और चाकू से हमला किया गया था, जिसके संबंध में कथित तौर पर चार किशोरों को हिरासत में लिया गया था। इससे कुछ ही सप्ताह पहले, फरवरी 2026 में मालवीय नगर में पड़ोस के एक मामूली विवाद के चलते अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार और धमकी की घटना सामने आई थी।

सांसद की माँगें और तर्क

गोगोई ने पत्र में लिखा कि ये बार-बार होने वाली घटनाएँ कोई अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी में पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के विरुद्ध पूर्वाग्रह, 'प्रोफाइलिंग', धमकी और हिंसा के एक लंबे और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से आग्रह किया कि वह इस बात की समीक्षा करे कि दिल्ली में पूर्वोत्तर नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाए गए मौजूदा संस्थागत तंत्र जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं।

गोगोई ने यह भी कहा कि तत्काल कार्रवाई से परे, बेहतर कानूनी सुरक्षा, जन जागरूकता और ऐसी शिक्षा के माध्यम से दीर्घकालिक रोकथाम की आवश्यकता है जो पूर्वाग्रहों और रूढ़ियों को चुनौती दे सके। उन्होंने रेखांकित किया कि पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिक दिल्ली के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक जीवन में बड़ा योगदान देते हैं और वे न केवल कानूनी सुरक्षा के बल्कि संस्थाओं पर भरोसे के भी हकदार हैं।

आगे क्या होगा

गोगोई ने गृह मंत्री से आग्रह किया है कि इन घटनाओं को केवल कानून-व्यवस्था के अलग-थलग मुद्दों के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के लोगों और देशभर की महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समान नागरिकता से जुड़े एक गंभीर मामले के रूप में देखा जाए। अब यह देखना होगा कि गृह मंत्रालय इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दिल्ली पुलिस नेहरू प्लेस मामले में किस हद तक कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उससे पहले दक्षिण दिल्ली के पार्क में चाकू से हमला; यह श्रृंखला बताती है कि दिल्ली में पूर्वोत्तर नागरिकों की सुरक्षा के लिए बने संस्थागत तंत्र कागज़ों पर अधिक और जमीन पर कम हैं। गोगोई का पत्र राजनीतिक दबाव बनाने का एक आवश्यक कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया सिर्फ आश्वासन होगी या ठोस जवाबदेही तंत्र। जब तक पूर्वाग्रह-प्रेरित अपराधों की अलग से निगरानी, रिपोर्टिंग और अभियोजन नहीं होता, तब तक ये घटनाएँ 'कानून-व्यवस्था की समस्या' बनकर दब जाती हैं और पैटर्न अदृश्य रहता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेहरू प्लेस नस्लीय हमले की घटना क्या है?
10 मई 2026 की सुबह नेहरू प्लेस में असम और बिहार की दो महिलाओं के साथ कथित तौर पर पुरुषों के एक समूह ने छेड़छाड़, मारपीट और नस्लीय दुर्व्यवहार किया। दिल्ली पुलिस ने पुष्टि की है कि महिलाओं को नस्लीय आधार पर निशाना बनाया गया था।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अमित शाह को पत्र क्यों लिखा?
गोगोई ने दिल्ली में पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिकों के विरुद्ध बढ़ते नस्लीय उत्पीड़न और हिंसा के पैटर्न पर ध्यान दिलाने और तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की माँग के लिए यह पत्र लिखा। उन्होंने नेहरू प्लेस घटना के साथ-साथ मणिपुर की वकील पर हमले और मालवीय नगर की घटना का भी उल्लेख किया।
दिल्ली में पूर्वोत्तर नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या माँगें की गई हैं?
गोगोई ने गृह मंत्रालय से संस्थागत सुरक्षा तंत्र की समीक्षा, बेहतर कानूनी सुरक्षा, जन जागरूकता अभियान और ऐसी शिक्षा की माँग की है जो पूर्वाग्रहों को चुनौती दे। उन्होंने यह भी माँग की कि इन घटनाओं को अलग-थलग कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों की गरिमा और समान अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला माना जाए।
मणिपुर की वकील पर दिल्ली में हमले की घटना क्या थी?
मणिपुर की एक वकील और उनकी ट्रांस-महिला मित्र के साथ दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में किशोर लड़कों के एक समूह द्वारा कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार और चाकू से हमला किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में चार किशोरों को हिरासत में लिया गया था।
क्या दिल्ली में पूर्वोत्तर नागरिकों पर हमले की यह पहली घटना है?
नहीं, गोगोई के पत्र के अनुसार यह एक दोहराए जाने वाले पैटर्न का हिस्सा है। फरवरी 2026 में मालवीय नगर में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ कथित नस्लीय दुर्व्यवहार, मणिपुर की वकील पर हमला और अब नेहरू प्लेस की घटना — ये सभी राष्ट्रीय राजधानी में पूर्वोत्तर नागरिकों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा के संकेत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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