4 अगस्त 2026
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तपन कांडू हत्याकांड 2022: आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत

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तपन कांडू हत्याकांड 2022: आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत

सारांश

तपन कांडू हत्याकांड का एक और आरोपी मुकदमे से पहले ही चला गया — कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत। सीबीआई के पाँच आरोपियों में से अब दो की मृत्यु हो चुकी है, जिससे 2022 के इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में न्याय की राह और कठिन हो गई है।

मुख्य बातें

कालेबर सिंह (58) , तपन कांडू हत्याकांड के आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर, की 4 अगस्त 2026 को पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।
कालेबर सिंह अप्रैल 2022 से न्यायिक हिरासत में था और लगभग चार महीनों से अस्पताल में भर्ती था।
13 मार्च 2022 को झालदा नगरपालिका के कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी।
सीबीआई की जून 2022 की चार्जशीट में 5 आरोपी थे; सत्यवान प्रमाणिक ( नवंबर 2023 ) और कालेबर सिंह — दोनों की मुकदमे से पहले मौत।
नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय से मिली जमानत पर बाहर हैं।
शव का बुधवार को पोस्टमार्टम होगा, इसके बाद परिवार को सौंपा जाएगा।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की झालदा नगरपालिका के कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की 2022 में हुई हत्या के आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह (58) की पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को यह जानकारी साझा की। कालेबर सिंह अप्रैल 2022 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में था और लगभग चार महीनों से उक्त अस्पताल में भर्ती था।

मौत की परिस्थितियाँ और प्रशासनिक कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, कालेबर सिंह गिरफ्तारी के बाद से पुरुलिया जिला सुधार गृह में बंद था और लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। उसे करीब चार महीने पहले पुरुलिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहाँ मंगलवार सुबह उसकी मृत्यु हो गई। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जाँच रिपोर्ट तैयार की गई। बुधवार को शव का पोस्टमार्टम किए जाने के बाद परिवार को सौंपे जाने की प्रक्रिया निर्धारित है।

परिजन का बयान

कालेबर सिंह की पत्नी प्रतिमा देवी ने कहा, 'मेरे पति लंबे समय से बीमार थे। उन्हें इलाज के लिए कई अस्पतालों में ले जाया गया। हमने अदालत में जमानत के लिए अर्जी दी थी, लेकिन वह मंजूर नहीं हुई। मुझे नहीं पता कि मेरे पति ने हत्या की थी या नहीं, लेकिन मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है।' यह बयान उस मानवीय पहलू को उजागर करता है जो अक्सर हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों में दब जाता है।

तपन कांडू हत्याकांड: पृष्ठभूमि

13 मार्च 2022 को कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की तब गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जब वे दोस्तों के साथ सुबह की सैर पर निकले थे। यह हत्या झालदा नगरपालिका चुनावों में त्रिशंकु जनादेश के ठीक बाद हुई थी — 12 सदस्यीय निकाय में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पाँच-पाँच सीटें जीती थीं। एक निर्दलीय पार्षद के कांग्रेस को समर्थन देने से पार्टी के लिए नगरपालिका बोर्ड बनाने की संभावना बन गई थी, जिससे यह हत्या राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गई।

मामले की शुरुआती जाँच राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने की थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया।

सीबीआई चार्जशीट और आरोपियों की स्थिति

जून 2022 में दायर अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने पाँच आरोपियों — दीपक कांडू, कालेबर सिंह, नरेन कांडू, मोहम्मद आशिक और सत्यवान प्रमाणिक — के नाम शामिल किए थे। इनमें से दो आरोपियों की मुकदमे के दौरान ही मौत हो चुकी है। सत्यवान प्रमाणिक की नवंबर 2023 में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी, जबकि कालेबर सिंह मामले में मुकदमा पूरा होने से पहले मरने वाले दूसरे आरोपी बन गए हैं। नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत पर बाहर हैं।

न्याय प्रक्रिया पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब तपन कांडू के परिजन और कांग्रेस पार्टी न्याय की माँग को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं। दो प्रमुख आरोपियों की मुकदमे से पहले ही मौत ने मामले की कानूनी जटिलता को और बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की व्यापक बहस का केंद्र रहा है। मुकदमे का भविष्य अब शेष जीवित आरोपियों पर निर्भर करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तपन कांडू कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
तपन कांडू पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की झालदा नगरपालिका के कांग्रेस पार्षद थे। 13 मार्च 2022 को सुबह की सैर के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जो झालदा नगरपालिका चुनावों में त्रिशंकु जनादेश के ठीक बाद हुई थी।
कालेबर सिंह कौन था और उसकी मौत कैसे हुई?
कालेबर सिंह (58) तपन कांडू हत्याकांड में सीबीआई द्वारा नामित कॉन्ट्रैक्ट किलर था। अप्रैल 2022 में गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में रहे कालेबर की लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2026 को पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।
इस मामले की जाँच किसने की और सीबीआई को कैसे सौंपी गई?
शुरुआत में जाँच राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने की थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने जून 2022 में पाँच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
इस मामले में अभी कितने आरोपी जीवित हैं?
सीबीआई की चार्जशीट में पाँच आरोपी थे। सत्यवान प्रमाणिक की नवंबर 2023 में और कालेबर सिंह की अगस्त 2026 में मौत हो चुकी है। नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय से मिली जमानत पर बाहर हैं; मोहम्मद आशिक की स्थिति स्रोत में स्पष्ट नहीं है।
इस हत्या का राजनीतिक महत्व क्या था?
यह हत्या झालदा नगरपालिका चुनावों के बाद हुई जहाँ 12 सदस्यीय निकाय में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने पाँच-पाँच सीटें जीती थीं। एक निर्दलीय पार्षद के कांग्रेस को समर्थन देने से पार्टी के लिए बोर्ड बनाने की संभावना बनी थी, जिससे यह हत्या राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी गई।
राष्ट्र प्रेस
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