3 नवंबर 2026
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कोलकाता हवाई अड्डे पर साइबर ठग शेख साबिर गिरफ्तार, दुबई फरार होने की कोशिश नाकाम

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कोलकाता हवाई अड्डे पर साइबर ठग शेख साबिर गिरफ्तार, दुबई फरार होने की कोशिश नाकाम

सारांश

दुबई भागने की फिराक में था साइबर ठग — लेकिन कोलकाता हवाई अड्डे पर लुकआउट नोटिस ने रोक दिया। शेख साबिर पर डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर जबरन वसूली और वित्तीय घोटालों का आरोप है। यह गिरफ्तारी अंतर-राज्यीय साइबर-अपराध समन्वय की जीत बताई जा रही है।

मुख्य बातें

साइबर धोखाधड़ी का वांछित आरोपी शेख साबिर को मंगलवार तड़के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, कोलकाता पर गिरफ्तार किया गया।
वह दुबई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने की कोशिश कर रहा था, जिसे आव्रजन अधिकारियों ने लुकआउट सर्कुलर के आधार पर रोका।
कर्नाटक में उसके खिलाफ कई साइबर धोखाधड़ी मामले दर्ज हैं; बेंगलुरु शहर साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज है।
आरोपी पर डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर जबरन वसूली और ब्लैकमेल का आरोप है।
बिधाननगर पुलिस ट्रांजिट रिमांड हासिल कर आरोपी को कर्नाटक स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मंगलवार तड़के साइबर धोखाधड़ी के वांछित आरोपी शेख साबिर को दुबई भागने की कोशिश के दौरान हिरासत में ले लिया गया। आव्रजन अधिकारियों ने उसे दुबई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने से ठीक पहले रोका और बिधाननगर पुलिस को सौंप दिया, जिसने औपचारिक गिरफ्तारी की। कर्नाटक में उसके खिलाफ कई साइबर धोखाधड़ी मामले दर्ज हैं और उसके फरार होने के बाद लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, शेख साबिर कर्नाटक पुलिस और आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की निगरानी में था और काफी समय से फरार चल रहा था। बेंगलुरु शहर साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में कई शिकायतों के आधार पर उसके खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। जब वह लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा, तब अधिकारियों ने उसके विरुद्ध लुकआउट नोटिस जारी किया।

मंगलवार सुबह जैसे ही उसने कोलकाता से दुबई की फ्लाइट पकड़ने की कोशिश की, हवाई अड्डे के आव्रजन विभाग के अधिकारियों ने लुकआउट नोटिस के आधार पर उसे रोक लिया। इसके बाद उसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पुलिस स्टेशन को सौंपा गया और फिर बिधाननगर पुलिस ने औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की।

आरोपों की प्रकृति

जांचकर्ताओं का आरोप है कि शेख साबिर एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा था। कथित तौर पर वह पीड़ितों को डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर जबरन वसूली और ब्लैकमेल करता था, तथा वित्तीय घोटालों में भी शामिल था। कर्नाटक में कई शिकायतकर्ताओं ने उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके बाद बेंगलुरु में मामला दर्ज हुआ।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों में तेजी से इजाफा हो रहा है और केंद्रीय एजेंसियाँ ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान चला रही हैं। गौरतलब है कि यह लुकआउट सर्कुलर तंत्र की एक बड़ी सफलता है, जो राज्यों के बीच समन्वय से संभव हुई।

अगली कानूनी प्रक्रिया

बिधाननगर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी की सूचना कर्नाटक पुलिस को दे दी गई है और अब ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके बाद आरोपी को आगे की जांच के लिए कर्नाटक स्थानांतरित किया जाएगा।

बिधाननगर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रही है। ट्रांजिट रिमांड मिलते ही आरोपी को बेंगलुरु ले जाया जाएगा, जहाँ वह मूल मामलों में पूछताछ और कानूनी कार्यवाही का सामना करेगा।

अंतर-राज्यीय समन्वय की भूमिका

यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल और कर्नाटक की पुलिस के बीच सूचना-साझाकरण का नतीजा है। लुकआउट नोटिस जारी करने से लेकर हवाई अड्डे पर रोके जाने तक की पूरी प्रक्रिया बताती है कि साइबर अपराधियों पर बहु-राज्यीय शिकंजा किस तरह काम करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के समन्वित प्रयास उन आरोपियों को पकड़ने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं जो एक राज्य से दूसरे राज्य या विदेश भागने की कोशिश करते हैं।

आगे की जांच में यह उजागर हो सकता है कि इस कथित नेटवर्क की कितनी व्यापक पहुँच है और इसमें और कितने लोग शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि वह इतने समय तक फरार कैसे रहा। डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले तेजी से बढ़ रहे हैं और अक्सर पकड़े जाने से पहले अपराधी देश छोड़ने में सफल हो जाते हैं। यह मामला दिखाता है कि राज्यों के बीच वास्तविक समय में सूचना-साझाकरण कितना जरूरी है — जो अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब तक साइबर अपराध के नेटवर्क की पूरी संरचना उजागर नहीं होती, एक गिरफ्तारी समाधान नहीं, केवल शुरुआत है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख साबिर को कहाँ और कैसे गिरफ्तार किया गया?
शेख साबिर को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मंगलवार तड़के उस समय रोका गया जब वह दुबई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने की कोशिश कर रहा था। आव्रजन अधिकारियों ने लुकआउट नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लिया और बिधाननगर पुलिस ने औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की।
शेख साबिर पर क्या आरोप हैं?
जांचकर्ताओं के अनुसार शेख साबिर एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का कथित हिस्सा है। उस पर डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर जबरन वसूली, ब्लैकमेल और वित्तीय घोटालों में शामिल होने का आरोप है। बेंगलुरु शहर साइबर अपराध पुलिस स्टेशन सहित कर्नाटक में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
आगे क्या होगा — शेख साबिर को कर्नाटक कब ले जाया जाएगा?
बिधाननगर पुलिस ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। रिमांड मिलते ही आरोपी को आगे की जांच के लिए कर्नाटक स्थानांतरित किया जाएगा, जहाँ उसे मूल मामलों में पूछताछ का सामना करना होगा।
लुकआउट सर्कुलर क्या होता है और इसने इस मामले में कैसे काम किया?
लुकआउट सर्कुलर एक आधिकारिक सूचना होती है जो पुलिस सभी हवाई अड्डों और सीमा चौकियों को जारी करती है ताकि किसी वांछित आरोपी को देश छोड़ने से रोका जा सके। इस मामले में कर्नाटक पुलिस और सीआईडी ने शेख साबिर के फरार होने के बाद यह नोटिस जारी किया था, जिसके कारण कोलकाता हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारी सतर्क थे और उन्होंने उसे समय रहते पकड़ लिया।
डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला क्या है जिसमें आरोपी का नाम आया है?
डिजिटल गिरफ्तारी एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या ED का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर 'डिजिटल गिरफ्तारी' की धमकी देते हैं और पैसे ऐंठते हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि शेख साबिर इसी तरह के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।
राष्ट्र प्रेस
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