ईडी ने कोलकाता से सोहेल अख्तर को गिरफ्तार किया, ₹7 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट मामले में तीसरा आरोपी दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 अक्टूबर 2026 को कोलकाता से साइबर अपराधी सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया — यह पंजाब के लुधियाना निवासी एसपी ओसवाल के साथ हुए ₹7 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में दर्ज तीसरी गिरफ्तारी है। गिरोह ने सीबीआई अधिकारी और न्यायाधीश का रूप धरकर पीड़ित को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा और करोड़ों रुपए ऐंठ लिए।
गिरफ्तारी और तलाशी अभियान
ईडी के जालंधर जोनल ऑफिस ने 28 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल में तीन स्थानों पर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के प्रावधानों के तहत छापेमारी की। इसी अभियान के दौरान अख्तर को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे जालंधर के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उसे 6 अक्टूबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई ₹7 करोड़ की ठगी
ईडी के अनुसार, धोखाधड़ी करने वालों ने सीबीआई और न्यायपालिका के अधिकारी बनकर पीड़ित एसपी ओसवाल को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर मनोवैज्ञानिक रूप से बंधक बनाए रखा और ₹7 करोड़ की रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। अपराध से मिली यह रकम शुरुआत में 'रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स' कंपनियों के बैंक खातों में जमा की गई।
रकम को तेज़ी से इधर-उधर भेजने के लिए 'एएमएम फॉरवर्ड' नाम के एपीके एप्लिकेशन का उपयोग किया गया। इन खातों से जुड़े सिम कार्ड ऐसे मोबाइल फोन में डाले गए, जिनमें पहले से एपीके फाइलें डाउनलोड थीं — जिससे नेपाल में मौजूद विदेशी साथियों को ओटीपी और एसएमएस संदेश सीधे मिल सके।
म्यूल अकाउंट नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी की भूमिका
ईडी की जांच में सामने आया कि अख्तर रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों को नियंत्रित और संचालित करता था। वह आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को लोन दिलाने या नौकरी देने का झूठा वादा करके उनके नाम पर 'म्यूल बैंक अकाउंट' खुलवाने का काम करता था।
अपराध से प्राप्त रकम को ₹2 लाख से ₹5 लाख तक की छोटी-छोटी किश्तों में अलग-अलग म्यूल खातों में ट्रांसफर कर तुरंत नकद निकाल लिया जाता था। यह नकद वर्चुअल डिजिटल एसेट (क्रिप्टोकरेंसी) खरीदने में लगाया जाता था और कमीशन काटकर विदेशी नागरिकों के बाइनेंस (Binance) अकाउंट में जमा किया जाता था। विदेश में साथियों से संपर्क के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मोबाइल मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल होता था।
गौरतलब है कि इस गिरोह से कंबोडिया और वियतनाम में रहने वाले लोग भी जुड़े थे, जो म्यूल खाते संचालित करते थे — यह भारतीय साइबर अपराध के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ाव का एक और उदाहरण है।
पहले के आरोपी और कानूनी कार्रवाई
इस मामले में अख्तर से पहले दो आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं — गुवाहाटी के रूमी कलिता को 23 दिसंबर 2025 को और कानपुर के अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। रिग्लो वेंचर्स और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग के खातों को क्रमशः कलिता और राठौर नियंत्रित करते थे।
14 फरवरी 2026 को ₹1.76 करोड़ की अपराध से हुई कमाई के विरुद्ध एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया। 19 फरवरी 2026 को कलिता, राठौर, आनंद चौधरी, अतानु चौधरी और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
ईडी की जांच का आधार लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत दर्ज एफआईआर है। जांच के दायरे में इसी गिरोह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट के नौ अतिरिक्त मामले भी शामिल हैं।
आगे क्या होगा
अख्तर 6 अक्टूबर 2026 तक ईडी की न्यायिक हिरासत में रहेगा, जिसके बाद अदालत अगली कार्रवाई तय करेगी। ईडी के अनुसार जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती प्रवृत्ति के खिलाफ एजेंसियों की सक्रियता को दर्शाता है।