अमेरिका-ईरान युद्ध: डेमोक्रेटिक सीनेटर मर्फी बोले — 'राष्ट्रपति यह जंग हार चुके हैं'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने ईरान के साथ जारी संघर्ष पर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति 'यह युद्ध हार चुके हैं' और जंग जितनी लंबी खिंचेगी, उतना ही अमेरिका कमज़ोर होता जाएगा। 10 अगस्त को सामने आए इन बयानों ने वाशिंगटन की आंतरिक राजनीतिक दरार को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
मर्फी का बयान: 'खराब समझौता भी मंज़ूर'
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सीनेटर मर्फी ने NBC न्यूज से बातचीत में कहा कि वे युद्ध समाप्त करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए किसी 'खराब समझौते' का भी समर्थन करने को तैयार हैं। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो रही है और इस महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की कीमत हर दिन बढ़ती जा रही है।
मर्फी ने स्पष्ट किया कि वे युद्ध जारी रखने के लिए किसी भी अतिरिक्त फंडिंग का विरोध करेंगे। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष समाप्त होने के बाद अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने के लिए वे समर्थन देंगे।
आम अमेरिकियों पर बढ़ता बोझ
सीनेटर मर्फी ने युद्ध के घरेलू असर पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, लंबे समय से जारी इस संघर्ष के कारण अमेरिका में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ भारी होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध जारी रहने से हर दिन अमेरिका कमज़ोर हो रहा है और ईरान मज़बूत होता जा रहा है।
ईरान का रुख: बातचीत तभी जब मांगें मानी जाएं
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए अराघची ने कहा कि जब तक वाशिंगटन तेहरान की मांगें नहीं मानता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
अराघची ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के उल्लंघन को बंद नहीं करता, तब तक बातचीत दोबारा शुरू नहीं हो सकती। ईरान की मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना भी शामिल है।
होर्मुज स्ट्रेट: वैश्विक व्यापार पर संकट
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल पारगमन मार्गों में से एक है। इसके बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब पहले से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर दबाव में है।
आगे क्या होगा
अमेरिकी संसद में युद्ध-फंडिंग को लेकर बढ़ता विरोध और ईरान की कठोर शर्तें — दोनों मिलकर इस संघर्ष के समाधान को और जटिल बना रहे हैं। कूटनीतिक गतिरोध तब तक जारी रहने की आशंका है जब तक दोनों पक्ष किसी साझा आधार पर नहीं पहुँचते। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल कीमतों का निर्णायक कारक बनी रहेगी।