असम: ED ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी में ₹2.12 करोड़ जब्त किए, 43 बैंक खाते कुर्क
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुवाहाटी में एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर की गई कथित 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी मामले में 43 बैंक खातों में जमा ₹2.12 करोड़ की राशि को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। 7 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जाँच गुवाहाटी साइबर पुलिस स्टेशन, CID द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी (FIR) के बाद ED ने शुरू की। आरोप है कि सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच साइबर जालसाजों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI), मुंबई अपराध शाखा और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों का भेष धारण किया।
गौरतलब है कि यह मामला देशभर में तेज़ी से फैल रहे 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनमें ठग फ़र्ज़ी सरकारी अधिकारी बनकर निर्दोष नागरिकों — विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों — को मानसिक दबाव में रखकर ठगी करते हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
आरोप है कि आरोपियों ने पीड़ित वरिष्ठ नागरिक से व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए संपर्क किया और झूठा दावा किया कि उनके आधार कार्ड से खोला गया एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। पीड़ित को मनगढ़ंत अदालती कार्यवाही और फ़र्ज़ी 'डिजिटल अरेस्ट वारंट' दिखाए गए।
आरोप है कि जालसाजों ने मामले का खुलासा करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत की धमकी दी। इसके बाद कथित तौर पर 'RBI निरीक्षण' और 'जमानत बांड' के नाम पर पैसे की माँग की गई, और पीड़ित को 19 लेनदेन में कुल ₹2.13 करोड़ हस्तांतरित करने पर मजबूर किया गया।
धन के प्रवाह का खुलासा
ED की जाँच के अनुसार, ठगी की यह रकम देशभर में व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों द्वारा संचालित कई फ़र्ज़ी बैंक खातों से होकर गुज़री। रकम को एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के खातों में पाया गया।
आरोप है कि धनराशि को नकद और डिजिटल मुद्रा में परिवर्तित किया गया, भुगतान गेटवे के माध्यम से भेजा गया और सबूत मिटाने के लिए विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया — जो एक सुनियोजित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का संकेत देता है।
ED की कार्रवाई
ED के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय-प्रथम ने अपराध से जुड़े धन की शिनाख्त करते हुए 43 बैंक खातों में जमा ₹2.12 करोड़ की राशि अस्थायी रूप से कुर्क की। यह कदम आगे धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जाँच अभी जारी है।
आगे क्या होगा
ED की चल रही जाँच में और आरोपियों की पहचान होने और अतिरिक्त कुर्की की संभावना बनी हुई है। यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए साइबर अपराध प्रारूपों के विरुद्ध केंद्रीय जाँच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता को रेखांकित करता है — एक ऐसी प्रवृत्ति जो आने वाले समय में और अधिक सख्त कानूनी कार्रवाइयों का संकेत देती है।