7 अक्टूबर 2026
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असम: ED ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी में ₹2.12 करोड़ जब्त किए, 43 बैंक खाते कुर्क

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असम: ED ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी में ₹2.12 करोड़ जब्त किए, 43 बैंक खाते कुर्क

सारांश

गुवाहाटी में एक वरिष्ठ नागरिक को 'डिजिटल अरेस्ट' के ज़रिए ₹2.13 करोड़ ठगे गए — जालसाजों ने CBI और TRAI अधिकारी बनकर 19 लेनदेन में रकम उड़ाई। ED ने अब PMLA के तहत 43 बैंक खाते कुर्क किए हैं, जो देशभर में फैले एक सुनियोजित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 7 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी मामले में ₹2.12 करोड़ अस्थायी रूप से जब्त किए।
कुल 43 बैंक खाते — एक्सिस बैंक, SBI, PNB, बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ इंडिया सहित — PMLA, 2002 की धारा 5(1) के तहत कुर्क किए गए।
आरोपियों ने सितंबर–दिसंबर 2025 के बीच TRAI, मुंबई अपराध शाखा और CBI के अधिकारियों का भेष धारण कर वरिष्ठ नागरिक को ठगा।
पीड़ित ने 19 लेनदेन में ₹2.13 करोड़ हस्तांतरित किए; आरोपियों ने फ़र्ज़ी 'डिजिटल अरेस्ट वारंट' और मनगढ़ंत अदालती कार्यवाही का इस्तेमाल किया।
ठगी की रकम को नकद, डिजिटल मुद्रा और भुगतान गेटवे के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है; जाँच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुवाहाटी में एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर की गई कथित 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी मामले में 43 बैंक खातों में जमा ₹2.12 करोड़ की राशि को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। 7 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह जाँच गुवाहाटी साइबर पुलिस स्टेशन, CID द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी (FIR) के बाद ED ने शुरू की। आरोप है कि सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच साइबर जालसाजों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI), मुंबई अपराध शाखा और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों का भेष धारण किया।

गौरतलब है कि यह मामला देशभर में तेज़ी से फैल रहे 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिनमें ठग फ़र्ज़ी सरकारी अधिकारी बनकर निर्दोष नागरिकों — विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों — को मानसिक दबाव में रखकर ठगी करते हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

आरोप है कि आरोपियों ने पीड़ित वरिष्ठ नागरिक से व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए संपर्क किया और झूठा दावा किया कि उनके आधार कार्ड से खोला गया एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। पीड़ित को मनगढ़ंत अदालती कार्यवाही और फ़र्ज़ी 'डिजिटल अरेस्ट वारंट' दिखाए गए।

आरोप है कि जालसाजों ने मामले का खुलासा करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत की धमकी दी। इसके बाद कथित तौर पर 'RBI निरीक्षण' और 'जमानत बांड' के नाम पर पैसे की माँग की गई, और पीड़ित को 19 लेनदेन में कुल ₹2.13 करोड़ हस्तांतरित करने पर मजबूर किया गया।

धन के प्रवाह का खुलासा

ED की जाँच के अनुसार, ठगी की यह रकम देशभर में व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों द्वारा संचालित कई फ़र्ज़ी बैंक खातों से होकर गुज़री। रकम को एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के खातों में पाया गया।

आरोप है कि धनराशि को नकद और डिजिटल मुद्रा में परिवर्तित किया गया, भुगतान गेटवे के माध्यम से भेजा गया और सबूत मिटाने के लिए विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया — जो एक सुनियोजित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का संकेत देता है।

ED की कार्रवाई

ED के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय-प्रथम ने अपराध से जुड़े धन की शिनाख्त करते हुए 43 बैंक खातों में जमा ₹2.12 करोड़ की राशि अस्थायी रूप से कुर्क की। यह कदम आगे धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जाँच अभी जारी है।

आगे क्या होगा

ED की चल रही जाँच में और आरोपियों की पहचान होने और अतिरिक्त कुर्की की संभावना बनी हुई है। यह मामला 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए साइबर अपराध प्रारूपों के विरुद्ध केंद्रीय जाँच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता को रेखांकित करता है — एक ऐसी प्रवृत्ति जो आने वाले समय में और अधिक सख्त कानूनी कार्रवाइयों का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें फ़र्ज़ी बैंक खाते, भुगतान गेटवे और क्रिप्टो चैनल सुनियोजित ढंग से काम करते हैं। गुवाहाटी का यह मामला दर्शाता है कि ऐसी ठगी में 43 खातों और कई बैंकों की संलिप्तता होती है — जो बिना किसी केंद्रीय समन्वय के संभव नहीं। असली सवाल यह है कि क्या ED की कुर्की कार्रवाई इस नेटवर्क के ऑपरेटरों तक पहुँचती है, या केवल 'म्यूल अकाउंट' धारकों तक सिमट जाती है — जो अक्सर खुद भी पीड़ित होते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को लक्ष्य बनाने की यह प्रवृत्ति और बड़ी डिजिटल साक्षरता की कमी को रेखांकित करती है, जिसे कोई जाँच एजेंसी अकेले नहीं सुधार सकती।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी क्या होती है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर घोटाला है जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों — जैसे CBI, TRAI या पुलिस — के अधिकारी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर मानसिक दबाव में रखते हैं और फ़र्ज़ी कानूनी कार्यवाही का डर दिखाकर पैसे ऐंठते हैं। इसमें पीड़ित को कई घंटों या दिनों तक 'वर्चुअल हिरासत' में रखा जाता है।
गुवाहाटी 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में ED ने क्या कार्रवाई की?
ED के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने PMLA, 2002 की धारा 5(1) के तहत 43 बैंक खातों में जमा ₹2.12 करोड़ की राशि को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई CID द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई जाँच का हिस्सा है।
आरोपियों ने पीड़ित से कितनी रकम कैसे ठगी?
आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित वरिष्ठ नागरिक को 'RBI निरीक्षण' और 'जमानत बांड' के बहाने 19 अलग-अलग लेनदेन में ₹2.13 करोड़ हस्तांतरित करने पर मजबूर किया। इसके लिए फ़र्ज़ी डिजिटल अरेस्ट वारंट और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत की धमकी का इस्तेमाल किया गया।
इस मामले में कौन-से बैंक के खाते कुर्क हुए?
कुर्क किए गए 43 बैंक खाते एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में थे। ये खाते देशभर में विभिन्न व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के नाम पर संचालित बताए जा रहे हैं।
क्या 'डिजिटल अरेस्ट' कानूनी रूप से वैध होती है?
नहीं — भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी वैध सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी नहीं करती और न ही ऑनलाइन भुगतान की माँग करती है। ऐसी कोई भी कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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