ईडी ने जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की संपत्ति जब्त की, एफईएमए उल्लंघन में प्रियंक मेहता पर शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने 23 जुलाई 2026 को जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की अचल संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफईएमए), 1999 की धारा 4 और धारा 10(6) के उल्लंघन के आरोप में प्रियंक मेहता के खिलाफ की गई है। जब्त संपत्ति का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जो कथित तौर पर एफईएमए प्रावधानों का उल्लंघन करके भारत के बाहर रखी गई थी।
मामले का मूल घटनाक्रम
ईडी के अनुसार, यह जांच आयकर विभाग से प्राप्त विशेष सूचना के आधार पर शुरू हुई। जांच में सामने आया कि मेहता ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत अमेरिका में ईबी-5 वीजा प्रोग्राम में निवेश के उद्देश्य से 5,48,000 अमेरिकी डॉलर विदेश भेजे थे।
हालांकि, इस राशि का बड़ा हिस्सा — 5,02,954 अमेरिकी डॉलर — घोषित निवेश उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया। जब यह रकम वापस हुई, तो इसे भारत लाने के बजाय सीधे अमेरिका से पुर्तगाल स्थानांतरित कर दिया गया।
विदेश में संपत्ति खरीद और नियमों का उल्लंघन
आगे की जांच में पता चला कि वापस मिली रकम को भारत से भेजे गए अतिरिक्त फंड के साथ मिलाकर पुर्तगाल में अचल संपत्ति खरीदने में लगाया गया। शेष बची राशि पुर्तगाल के एक विदेशी बैंक खाते में रखी गई।
ईडी के अनुसार, विदेश में विदेशी मुद्रा और संपत्ति अर्जित करना, धारण करना और उपयोग करना एफईएमए, 1999 की धारा 4 और धारा 10(6) का स्पष्ट उल्लंघन है। गौरतलब है कि एलआरएस के तहत भेजी गई राशि का उपयोग केवल घोषित उद्देश्य के लिए ही किया जाना अनिवार्य है।
जब्ती की कार्रवाई
ईडी ने एफईएमए के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जबलपुर स्थित मेहता की ₹3.67 करोड़ मूल्य की अचल संपत्ति जब्त की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब्त संपत्ति का मूल्य एफईएमए प्रावधानों का उल्लंघन करके विदेश में रखी गई विदेशी मुद्रा के समतुल्य है।
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रेषण के दुरुपयोग को रोकने और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने की सतत कोशिशों का हिस्सा है।
आगे की जांच जारी
ईडी ने पुष्टि की है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और कथित उल्लंघनों से जुड़े अतिरिक्त लेनदेन तथा संपत्तियों का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह जब्ती मध्य प्रदेश में ईडी की एक और महत्वपूर्ण प्रवर्तन कार्रवाई है, जो एजेंसी के सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी के संकल्प को दर्शाती है।
यह मामला ऐसे समय में आया है जब ईडी एलआरएस के तहत किए गए विदेशी निवेश और भेजे गए फंड के दुरुपयोग की जांच-पड़ताल को लगातार बढ़ा रहा है।