24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी ने जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की संपत्ति जब्त की, एफईएमए उल्लंघन में प्रियंक मेहता पर शिकंजा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी ने जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की संपत्ति जब्त की, एफईएमए उल्लंघन में प्रियंक मेहता पर शिकंजा

सारांश

ईडी ने जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की संपत्ति जब्त की — आरोप है कि प्रियंक मेहता ने एलआरएस के तहत अमेरिका भेजे गए 5,02,954 डॉलर को भारत वापस लाने के बजाय पुर्तगाल में संपत्ति खरीदने में लगाया, जो एफईएमए की धारा 4 और 10(6) का उल्लंघन है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 जुलाई 2026 को जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की अचल संपत्ति जब्त की।
संपत्ति प्रियंक मेहता की है; जब्ती एफईएमए, 1999 की धारा 4 और धारा 10(6) के कथित उल्लंघन पर आधारित है।
मेहता ने एलआरएस के तहत ईबी-5 वीजा प्रोग्राम में निवेश हेतु 5,48,000 अमेरिकी डॉलर भेजे थे, जिनमें से 5,02,954 डॉलर घोषित उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किए गए।
वापस मिली रकम को भारत लाने के बजाय सीधे पुर्तगाल ट्रांसफर कर वहाँ अचल संपत्ति खरीदी गई।
जांच आयकर विभाग की सूचना के आधार पर शुरू हुई; मामले में आगे की जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने 23 जुलाई 2026 को जबलपुर में ₹3.67 करोड़ की अचल संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफईएमए), 1999 की धारा 4 और धारा 10(6) के उल्लंघन के आरोप में प्रियंक मेहता के खिलाफ की गई है। जब्त संपत्ति का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जो कथित तौर पर एफईएमए प्रावधानों का उल्लंघन करके भारत के बाहर रखी गई थी।

मामले का मूल घटनाक्रम

ईडी के अनुसार, यह जांच आयकर विभाग से प्राप्त विशेष सूचना के आधार पर शुरू हुई। जांच में सामने आया कि मेहता ने लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत अमेरिका में ईबी-5 वीजा प्रोग्राम में निवेश के उद्देश्य से 5,48,000 अमेरिकी डॉलर विदेश भेजे थे।

हालांकि, इस राशि का बड़ा हिस्सा — 5,02,954 अमेरिकी डॉलर — घोषित निवेश उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया। जब यह रकम वापस हुई, तो इसे भारत लाने के बजाय सीधे अमेरिका से पुर्तगाल स्थानांतरित कर दिया गया।

विदेश में संपत्ति खरीद और नियमों का उल्लंघन

आगे की जांच में पता चला कि वापस मिली रकम को भारत से भेजे गए अतिरिक्त फंड के साथ मिलाकर पुर्तगाल में अचल संपत्ति खरीदने में लगाया गया। शेष बची राशि पुर्तगाल के एक विदेशी बैंक खाते में रखी गई।

ईडी के अनुसार, विदेश में विदेशी मुद्रा और संपत्ति अर्जित करना, धारण करना और उपयोग करना एफईएमए, 1999 की धारा 4 और धारा 10(6) का स्पष्ट उल्लंघन है। गौरतलब है कि एलआरएस के तहत भेजी गई राशि का उपयोग केवल घोषित उद्देश्य के लिए ही किया जाना अनिवार्य है।

जब्ती की कार्रवाई

ईडी ने एफईएमए के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जबलपुर स्थित मेहता की ₹3.67 करोड़ मूल्य की अचल संपत्ति जब्त की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब्त संपत्ति का मूल्य एफईएमए प्रावधानों का उल्लंघन करके विदेश में रखी गई विदेशी मुद्रा के समतुल्य है।

अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रेषण के दुरुपयोग को रोकने और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने की सतत कोशिशों का हिस्सा है।

आगे की जांच जारी

ईडी ने पुष्टि की है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और कथित उल्लंघनों से जुड़े अतिरिक्त लेनदेन तथा संपत्तियों का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यह जब्ती मध्य प्रदेश में ईडी की एक और महत्वपूर्ण प्रवर्तन कार्रवाई है, जो एजेंसी के सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी के संकल्प को दर्शाती है।

यह मामला ऐसे समय में आया है जब ईडी एलआरएस के तहत किए गए विदेशी निवेश और भेजे गए फंड के दुरुपयोग की जांच-पड़ताल को लगातार बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ घोषित उद्देश्य और वास्तविक उपयोग के बीच का अंतर नियामकों की नज़र से बचने का ज़रिया बन जाता है। ईडी की यह कार्रवाई तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब आरबीआई एलआरएस प्रवाह पर कड़ी नज़र रख रहा है। असली सवाल यह है कि ऐसे मामलों में आयकर विभाग और ईडी के बीच सूचना साझाकरण कितना व्यवस्थित है — और क्या यह निगरानी तंत्र बड़े पैमाने पर उल्लंघनों को पकड़ने में सक्षम है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने जबलपुर में किसकी संपत्ति जब्त की और क्यों?
ईडी ने प्रियंक मेहता की जबलपुर स्थित ₹3.67 करोड़ की अचल संपत्ति जब्त की है। आरोप है कि मेहता ने एलआरएस के तहत अमेरिका भेजे गए फंड को घोषित उद्देश्य (ईबी-5 वीजा निवेश) के बजाय पुर्तगाल में संपत्ति खरीदने में लगाया, जो एफईएमए, 1999 का उल्लंघन है।
एफईएमए की धारा 4 और 10(6) का उल्लंघन क्या होता है?
एफईएमए की धारा 4 के तहत कोई भी भारतीय निवासी बिना अनुमति के विदेश में विदेशी मुद्रा या संपत्ति अर्जित, धारण या उपयोग नहीं कर सकता। धारा 10(6) एलआरएस जैसी योजनाओं के तहत भेजी गई राशि के घोषित उद्देश्य से इतर उपयोग पर रोक लगाती है।
लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) क्या है और इसमें क्या नियम हैं?
एलआरएस भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की एक योजना है जिसके तहत भारतीय निवासी प्रति वित्त वर्ष एक निर्धारित सीमा तक विदेश में पैसा भेज सकते हैं। भेजी गई राशि का उपयोग केवल घोषित उद्देश्य के लिए ही किया जाना अनिवार्य है; अनुपयोगी राशि को भारत वापस लाना होता है।
इस मामले में जांच कैसे शुरू हुई?
यह जांच आयकर विभाग से प्राप्त विशेष सूचना के आधार पर शुरू हुई, जिसके बाद ईडी के भोपाल जोनल ऑफिस ने स्वतंत्र जांच की। जांच में फंड के अमेरिका से पुर्तगाल ट्रांसफर और वहाँ संपत्ति खरीदने का पता चला।
क्या इस मामले में और कार्रवाई होगी?
ईडी ने पुष्टि की है कि जांच जारी है और कथित उल्लंघनों से जुड़े अतिरिक्त लेनदेन व संपत्तियों का पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है। इस मामले में आगे और संपत्तियाँ जब्त होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले