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नोएडा में फर्जी जॉब रैकेट का भंडाफोड़: 6 आरोपी गिरफ्तार, युवाओं से ठगी का सुनियोजित जाल उजागर

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नोएडा में फर्जी जॉब रैकेट का भंडाफोड़: 6 आरोपी गिरफ्तार, युवाओं से ठगी का सुनियोजित जाल उजागर

सारांश

नोएडा में फर्जी जॉब रैकेट का भंडाफोड़: साइबर टीम ने 27 जुलाई को अट्टा मार्केट में छापा मारकर 6 आरोपी गिरफ्तार किए। गिरोह युवाओं से नौकरी के नाम पर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस वसूलता था। जाँच जारी, पीड़ितों की संख्या और नेटवर्क की गहराई सामने आने की उम्मीद।

मुख्य बातें

नोएडा साइबर टीम और सेक्टर-20 पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को अट्टा मार्केट, सेक्टर-27 में संयुक्त छापेमारी की।
फर्जी जॉब रैकेट में चार महिलाओं और दो पुरुषों सहित कुल 6 आरोपी गिरफ्तार ।
बरामदगी में 3 मोबाइल फोन , 11 फीस बुक , 4 रसीद बुक , 22 प्रचार पम्पलेट और 20 भर्ती फॉर्म शामिल।
आरोपी युवाओं से रजिस्ट्रेशन फीस और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर धनराशि वसूलते थे।
थाना सेक्टर-20 में धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक छलपूर्वक ठगी के आरोप में मुकदमा दर्ज।
पुलिस ने युवाओं से अपील की — नौकरी के नाम पर बिना सत्यापन के कोई भुगतान न करें।

नोएडा के सेक्टर-20 थाने की पुलिस और साइबर टीम नोएडा जोन ने 27 जुलाई 2026 को संयुक्त अभियान चलाते हुए बेरोज़गार युवाओं को नौकरी दिलाने का झाँसा देकर ठगी करने वाले एक सुनियोजित गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने इस मामले में चार महिलाओं और दो पुरुषों सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

छापेमारी और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, एक पीड़ित की सूचना के आधार पर सेक्टर-27 स्थित अट्टा मार्केट की एक इमारत में छापा मारा गया। मौके पर मौजूद छह संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई 28 जुलाई 2026 को सार्वजनिक की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

हिरासत में लिए गए आरोपियों में श्वेता सिंह उर्फ प्रिया (निवासी उन्नाव), नीजू यादव (निवासी सेक्टर-22, नोएडा), कीर्ति सिंह उर्फ मीरा (निवासी न्यू अशोक नगर, दिल्ली), पूजा (निवासी अशोक नगर, दिल्ली), रूपेश कुमार (निवासी चौड़ा गाँव, सेक्टर-22, नोएडा) तथा आमीर राणा (निवासी पिलखुआ, जनपद हापुड़) शामिल हैं। गिरोह के सदस्य कई राज्यों और ज़िलों से जुड़े हैं, जो इसके संगठित स्वरूप की ओर इशारा करता है।

ठगी का तरीका और बरामद सामग्री

प्रारंभिक जाँच के अनुसार, आरोपी बेरोज़गार युवाओं को आकर्षक वेतन और प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी का भरोसा दिलाकर उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर धनराशि वसूलते थे। युवाओं का विश्वास जीतने के लिए फर्जी फीस बुक, रसीद बुक और भर्ती दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्ज़े से 3 मोबाइल फोन, 11 फीस बुक, 4 रसीद बुक, 22 प्रचार पम्पलेट और 20 भरे हुए भर्ती फॉर्म बरामद किए हैं। बड़ी मात्रा में प्रचार सामग्री और फॉर्म मिलने से संकेत मिलता है कि गिरोह पूर्व नियोजित तरीके से काम कर रहा था।

कानूनी कार्रवाई और जाँच की स्थिति

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सेक्टर-20 में मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से छलपूर्वक ठगी के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेज़ों की गहन जाँच जारी है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में फर्जी भर्ती रैकेट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और साइबर अपराध की घटनाएँ नए-नए रूप लेती जा रही हैं।

युवाओं के लिए पुलिस की अपील

पुलिस ने बेरोज़गार युवाओं से अपील की है कि किसी भी निजी कंपनी में नौकरी के नाम पर बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति या संस्था को धनराशि न दें। नौकरी के लिए आवेदन से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, कार्यालय और भर्ती प्रक्रिया की पुष्टि अवश्य करें। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।

आगे की जाँच में यह स्पष्ट होने की संभावना है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और कितने युवा इसके शिकार बने।

संपादकीय दृष्टिकोण

रसीद बुक और भर्ती फॉर्म जैसी 'वैध' दिखने वाली सामग्री का इस्तेमाल बताता है कि यह सुनियोजित ऑपरेशन था, न कि मौकापरस्त ठगी। असली सवाल यह है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और कितने पीड़ित अब तक सामने नहीं आए — जो अक्सर शर्म या जागरूकता की कमी के कारण चुप रह जाते हैं। साइबर हेल्पलाइन और पुलिस की सक्रियता ज़रूरी है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए युवाओं में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता को प्राथमिकता देनी होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में फर्जी जॉब रैकेट क्या था और इसे कैसे पकड़ा गया?
यह एक सुनियोजित ठगी गिरोह था जो बेरोज़गार युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का झाँसा देकर रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे वसूलता था। एक पीड़ित की सूचना पर नोएडा साइबर टीम और सेक्टर-20 पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को अट्टा मार्केट में छापा मारकर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार छह आरोपियों में श्वेता सिंह उर्फ प्रिया (उन्नाव), नीजू यादव (सेक्टर-22, नोएडा), कीर्ति सिंह उर्फ मीरा (न्यू अशोक नगर, दिल्ली), पूजा (अशोक नगर, दिल्ली), रूपेश कुमार (सेक्टर-22, नोएडा) और आमीर राणा (पिलखुआ, हापुड़) शामिल हैं। इनमें चार महिलाएँ और दो पुरुष हैं।
आरोपियों के खिलाफ कौन-से कानूनी आरोप लगाए गए हैं?
थाना सेक्टर-20 में धोखाधड़ी और इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन माध्यम से छलपूर्वक ठगी के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेज़ों की जाँच कर गिरोह के नेटवर्क और पीड़ितों की संख्या का पता लगा रही है।
युवा फर्जी नौकरी ठगी से खुद को कैसे बचाएँ?
पुलिस के अनुसार, नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना सत्यापन के पैसे न दें। आवेदन से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और कार्यालय की जानकारी ज़रूर लें। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।
क्या इस मामले में और आरोपी भी हो सकते हैं?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जाँच में यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह में अन्य सदस्य भी शामिल हैं या नहीं। बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेज़ों की फोरेंसिक जाँच से नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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