31 जुलाई 2026
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गो संरक्षण की अलख जगाने 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम की पदयात्रा पर निकलीं कुसुम कुमारी

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गो संरक्षण की अलख जगाने 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम की पदयात्रा पर निकलीं कुसुम कुमारी

सारांश

कोडरमा की कुसुम कुमारी लगातार तीसरे वर्ष 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम की 350-400 किमी पदयात्रा पर निकलीं — शिव भक्ति के साथ गो संरक्षण का संदेश और झारखंड सरकार से 'गईया सम्मान योजना' की माँग लेकर।

मुख्य बातें

कुसुम कुमारी ( डोमचांच, कोडरमा ) ने 31 जुलाई 2026 को 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम देवघर के लिए पदयात्रा शुरू की।
यह उनकी लगातार तीसरी बाबा धाम पदयात्रा है; संपूर्ण मार्ग लगभग 350 से 400 किलोमीटर का है।
पहले सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ मंदिर में जलाभिषेक, फिर देवघर और अंत में बासुकीनाथ मंदिर में दर्शन का कार्यक्रम।
प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए रास्ते में गो संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
झारखंड सरकार से 'मईयां सम्मान योजना' की तर्ज पर 'गईया सम्मान योजना' शुरू करने की माँग।

झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच निवासी कुसुम कुमारी ने 31 जुलाई 2026 को सावन के पवित्र महीने में 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम देवघर के लिए पदयात्रा आरंभ की। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल शिव भक्ति है, बल्कि गो संरक्षण और गो रक्षा का संदेश जन-जन तक पहुँचाना भी है। यह उनकी लगातार तीसरी ऐसी पदयात्रा है।

यात्रा का मार्ग और धार्मिक महत्व

कुसुम कुमारी सर्वप्रथम बिहार के सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ मंदिर में 21 लीटर गंगाजल से जलाभिषेक करेंगी। इसके पश्चात उत्तर वाहिनी गंगा से पुनः 21 लीटर पवित्र जल ग्रहण कर देवघर के बाबा धाम की ओर प्रस्थान करेंगी, जहाँ बाबा भोले का जलाभिषेक किया जाएगा। यात्रा के अंतिम पड़ाव में दुमका के बासुकीनाथ मंदिर में दर्शन का संकल्प भी है। यह संपूर्ण पदयात्रा लगभग 350 से 400 किलोमीटर की होगी।

गो संरक्षण का संकल्प

अपनी बहन के साथ इस यात्रा पर निकलीं कुसुम ने बताया कि सड़कों पर भटकते गोवंश अक्सर दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं। उनका कहना है कि इन पशुओं की रक्षा और पालन-पोषण के लिए सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों को भी आगे आना होगा। कुसुम ने कहा, 'गो माता के लिए मैंने हमेशा अयोध्या और वृंदावन की पैदल यात्रा की है। बाबा धाम जाने के दौरान लोगों से गो माता की सेवा करने की अपील करती हूँ।'

प्रतिदिन 25-30 किलोमीटर का सफर

कुसुम कुमारी ने बताया कि वे प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगी। रास्ते में जहाँ भी पड़ाव होगा, वहाँ के लोगों को गो रक्षा और गो संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जाएगा। यह यात्रा एक धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक सामाजिक जागरूकता अभियान भी है।

झारखंड सरकार से 'गईया सम्मान योजना' की माँग

कुसुम ने झारखंड सरकार से अपील की है कि जिस प्रकार 'मईयां सम्मान योजना' चलाई जा रही है, उसी तर्ज पर 'गईया सम्मान योजना' भी शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि पहल सरकार की प्रतीक्षा किए बिना आम नागरिकों को स्वयं करनी होगी — घरों में गो माता को रखना और उनकी सेवा करना इसी दिशा में पहला कदम है। सावन में शिव भक्तों की बड़ी संख्या देवघर और बासुकीनाथ की ओर उमड़ रही है, और कुसुम की यह यात्रा उस आस्था की लहर में एक विशिष्ट सामाजिक संदेश जोड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाती है। हालाँकि, सड़कों पर भटकते गोवंश की समस्या केवल जन-जागरूकता से नहीं सुलझेगी — इसके लिए नीतिगत ढाँचे और गौशालाओं के लिए पर्याप्त वित्त पोषण भी ज़रूरी है, जिस पर सरकारी स्तर पर अभी भी स्पष्टता का अभाव है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुसुम कुमारी कौन हैं और वे किस यात्रा पर निकली हैं?
कुसुम कुमारी झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच की निवासी हैं, जो 31 जुलाई 2026 को 21 लीटर गंगाजल लेकर बाबा धाम देवघर की पदयात्रा पर निकली हैं। यह उनकी लगातार तीसरी ऐसी पदयात्रा है, जिसमें शिव भक्ति के साथ गो संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है।
इस पदयात्रा का मार्ग क्या है और कितनी दूरी तय होगी?
यात्रा पहले बिहार के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ मंदिर में जलाभिषेक से शुरू होगी, फिर देवघर के बाबा धाम और अंत में दुमका के बासुकीनाथ मंदिर में दर्शन के साथ समाप्त होगी। संपूर्ण पदयात्रा लगभग 350 से 400 किलोमीटर की है और प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी।
कुसुम कुमारी गो संरक्षण का संदेश क्यों दे रही हैं?
कुसुम का कहना है कि सड़कों पर भटकते गोवंश अक्सर दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं और उनकी रक्षा के लिए सरकार के साथ-साथ आम नागरिकों को भी आगे आना होगा। वे पहले भी अयोध्या और वृंदावन की पदयात्राएँ गो माता के लिए कर चुकी हैं।
'गईया सम्मान योजना' क्या है और यह माँग क्यों उठाई गई?
कुसुम कुमारी ने झारखंड सरकार से अपील की है कि 'मईयां सम्मान योजना' की तर्ज पर 'गईया सम्मान योजना' शुरू की जाए, जिससे गोवंश के पालन-पोषण के लिए संस्थागत सहायता मिल सके। यह माँग अभी नागरिक स्तर पर है और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सावन में बाबा धाम और बासुकीनाथ का क्या महत्व है?
सावन के पवित्र महीने में देवघर का बाबा धाम और दुमका का बासुकीनाथ मंदिर शिव भक्तों के प्रमुख तीर्थस्थल हैं, जहाँ लाखों कांवरिये गंगाजल लेकर जलाभिषेक करने आते हैं। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन मंदिरों की ओर उमड़ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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