गिरिडीह में पुलिस टीम पर पथराव, साइबर अपराधी चूरामन मंडल हिरासत से फरार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गिरिडीह जिले के अहिल्यापुर थाना क्षेत्र में 11 जून को उस समय हिंसक घटना हो गई, जब साइबर अपराध के एक मामले में वांछित आरोपी चूरामन मंडल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों और आरोपी के परिजनों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला बोल दिया। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुआ और भीड़ ने गिरफ्तार आरोपी को हिरासत से छुड़ाने में सफलता हासिल कर ली।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
पुलिस के अनुसार, साइबर थाना प्रभारी रामेश्वर भगत के नेतृत्व में एक टीम को सूचना मिली थी कि साइबर अपराध में वांछित आरोपी चूरामन मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपा हुआ है। टीम ने गांव पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया और उसे पुलिस वाहन में बैठाने की प्रक्रिया शुरू की।
इसी दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और आरोपी के परिजन मौके पर एकत्र हो गए। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और पुलिस टीम को चारों ओर से घेरकर लाठी-डंडों तथा पत्थरों से हमला कर दिया। अफरातफरी के बीच हमलावर चूरामन मंडल को पुलिस की पकड़ से छुड़ाने में कामयाब रहे और आरोपी मौके से फरार हो गया।
पुलिस की प्रतिक्रिया और स्थिति नियंत्रण
घटना की सूचना मिलते ही गांडेय इंस्पेक्टर सहित आसपास के कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
साइबर थाना प्रभारी रामेश्वर भगत ने बताया कि पथराव में पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि किसी तरह पुलिसकर्मी वहां से निकलने में सफल रहे। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में अहिल्यापुर थाना में अलग से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस दल पर हमला करने, अभियुक्त को हिरासत से छुड़ाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फरार आरोपी चूरामन मंडल और हमले में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब झारखंड के कई जिलों में साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। गिरिडीह समेत आसपास के इलाके साइबर ठगी के केंद्र के रूप में पहले भी चर्चा में रहे हैं। पुलिस कार्रवाई में इस तरह की बाधा न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के प्रयासों को भी कमज़ोर करती है। पुलिस बल की तैनाती और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी हैं।