4 अगस्त 2026
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अहमदाबाद: AI से बने जाली दस्तावेजों से सिविल हॉस्पिटल टेंडर में ₹9.60 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार

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अहमदाबाद: AI से बने जाली दस्तावेजों से सिविल हॉस्पिटल टेंडर में ₹9.60 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार

सारांश

अहमदाबाद में तीन ठगों ने ChatGPT से जाली सरकारी दस्तावेज बनाए, सिविल हॉस्पिटल अधिकारी बनकर एक कंपनी से ₹9.60 लाख उड़ाए। यह मामला AI-सक्षम सरकारी टेंडर धोखाधड़ी का एक नया और खतरनाक चेहरा सामने लाता है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2026 को तीन आरोपियों — राहुल शर्मा (29) , विपुल सिंह तोमर (30) और अमन कुशवाह (26) — को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने ChatGPT का उपयोग कर जाली खरीद आदेश, पहचान पत्र और सरकारी दस्तावेज बनाए और अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल व AMC के अधिकारी बनकर पीड़ित कंपनी से ₹9.60 लाख ठगे।
मास्टरमाइंड राहुल शर्मा के खाते में ₹2.15 लाख और विपुल सिंह तोमर के खाते में ₹7.45 लाख ट्रांसफर किए गए।
गिरोह ने कम से कम 6 पीड़ितों को ठगा; चांगोदर पुलिस स्टेशन में ₹18.31 लाख की अलग धोखाधड़ी का मामला भी इनसे जुड़ा।
जाँचकर्ताओं को संदेह है कि गिरोह अन्य पीड़ितों के साथ लगभग ₹5 लाख की अतिरिक्त धोखाधड़ी में भी शामिल था।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल और अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) के अधिकारियों का रूप धारण कर शहर की एक बायो-ग्रीन प्लास्टिक बैग निर्माता कंपनी से ₹9.60 लाख की धोखाधड़ी की। आरोपियों ने कथित तौर पर ChatGPT सहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का उपयोग करके फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार किए और एक काल्पनिक सरकारी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट का झाँसा देकर पीड़ित कंपनी को पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर किया।

धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पीड़ित कंपनी को यह विश्वास दिलाया कि अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल को 2,000 डिस्पोजेबल बायो-ग्रीन प्लास्टिक बैग की आवश्यकता है और यह खरीद आदेश सरकारी खरीद प्रणाली के माध्यम से जारी होगा। विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आरोपियों ने जाली कर्मचारी पहचान पत्र, नकली खरीद आदेश, फर्जी निविदा फॉर्म और मनगढ़ंत हस्ताक्षर व मुहर वाले दस्तावेज भेजे।

गिरोह ने एक फर्जी सिविल हॉस्पिटल ईमेल अकाउंट भी बनाया और Google Meet के ज़रिए खुद को अस्पताल के अधिकारी बताते हुए पीड़ित से संवाद किया। पीड़ित को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर ZED, CPCP, OEM और NSIC प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बहाने अनिवार्य शुल्क के नाम पर रकम ट्रांसफर करने के लिए राजी किया गया।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका

तकनीकी विश्लेषण और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ा — राहुल शर्मा (29 वर्ष, मूलतः राजस्थान के अलवर के), विपुल सिंह तोमर (30 वर्ष, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के) और अमन कुशवाह (26 वर्ष, मध्य प्रदेश के भिंड के)। तीनों अहमदाबाद में रह रहे थे।

पुलिस ने राहुल शर्मा को ऑपरेशन का कथित मास्टरमाइंड बताया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, उसने धोखाधड़ी की पूरी साजिश रची, सिम कार्ड और बैंक खातों की व्यवस्था की, और खुद को राजेश रावल नामक सिविल हॉस्पिटल खरीद विभाग के अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। उस पर यह भी आरोप है कि वह सिविल हॉस्पिटल कर्मचारी बनकर शिकायतकर्ता के कार्यालय में भी गया।

विपुल सिंह तोमर के बैंक खाते में ₹7.45 लाख जमा किए गए। जाँचकर्ताओं के अनुसार, उसने चेक के माध्यम से पैसे निकाले, एक कमीशन रखा और शेष राशि सह-आरोपी अमन कुशवाह के माध्यम से राहुल को पहुँचाई। राहुल शर्मा के खाते में ₹2.15 लाख ट्रांसफर किए गए। कुशवाह ने कथित तौर पर शैलेश सिंह नामक AMC अधिकारी बनकर फोन कॉल और WhatsApp संदेशों के ज़रिए पीड़ित से संपर्क किया।

AI का इस्तेमाल — नया और खतरनाक पहलू

एसीपी हार्दिक मकाडिया ने बताया कि मुख्य आरोपी राहुल शर्मा ने लगभग तीन साल तक GeM और अन्य ई-खरीद पोर्टल पर कंपनियों की सहायता करने वाली कंसल्टेंसी फर्मों के साथ काम किया था, जिससे उसे सरकारी खरीद प्रक्रियाओं और आवश्यक प्रमाणपत्रों की गहरी जानकारी थी। उन्होंने कहा, 'लगभग तीन महीने पहले, उसके मन में कंपनियों से संपर्क करने और उन्हें धोखा देने का विचार आया।'

एसीपी के अनुसार, आरोपियों ने ऑनलाइन हरे प्लास्टिक बैग जैसे उत्पादों के निर्माताओं की पहचान की और WhatsApp के ज़रिए उनसे संपर्क किया। उन्होंने कहा, 'उसने फर्जी खरीद आदेश, पुष्टिकरण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया, फर्जी पहचान पत्र बनाए और फिर पीड़ितों को धोखा दिया।'

व्यापक जाँच और अन्य मामले

प्रारंभिक जाँच से संकेत मिलता है कि इस गिरोह ने समान कार्यप्रणाली अपनाते हुए कम से कम छह पीड़ितों को ठगा है। जाँचकर्ताओं ने आरोपियों को चांगोदर पुलिस स्टेशन में दर्ज ₹18.31 लाख से अधिक की एक अलग धोखाधड़ी से भी जोड़ा है, जहाँ भारतीय न्याय संहिता (2023) की धारा 318(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज है। इसके अलावा, एक आरोपी पर रखियाल पुलिस स्टेशन में भी BNS की धारा 318(4) और IT अधिनियम की धारा 66(C) व 66(D) के तहत पूर्व मामला दर्ज है।

जाँचकर्ताओं को संदेह है कि गिरोह अन्य पीड़ितों के साथ लगभग ₹5 लाख की अतिरिक्त धोखाधड़ी में भी शामिल था। आगे की जाँच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब AI-सक्षम साइबर अपराध देशभर में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ इस नई चुनौती से निपटने के तरीके तलाश रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि AI-सक्षम सरकारी प्रतिरूपण का एक खतरनाक नमूना है जो GeM जैसी डिजिटल खरीद प्रणालियों की कमज़ोरियों को उजागर करता है। जब ChatGPT से मिनटों में आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेज बनाए जा सकते हैं, तो केवल कागज़ी सत्यापन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं। सरकारी खरीद पोर्टलों पर वास्तविक समय में दस्तावेज सत्यापन और अधिकारी पहचान की दोहरी जाँच की व्यवस्था न होना इस तरह के अपराध को आसान बनाता है। छह से अधिक पीड़ितों और तीन अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह एक संगठित और सुनियोजित ऑपरेशन था, जिसकी जाँच का दायरा अभी और बढ़ सकता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल टेंडर धोखाधड़ी क्या है?
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जिन्होंने सिविल हॉस्पिटल और AMC के अधिकारी बनकर एक बायो-ग्रीन प्लास्टिक बैग निर्माता कंपनी से ₹9.60 लाख ठगे। आरोपियों ने ChatGPT से जाली सरकारी दस्तावेज, खरीद आदेश और पहचान पत्र बनाए और पीड़ित को GeM पोर्टल पर प्रमाणपत्र शुल्क के नाम पर भुगतान करने पर मजबूर किया।
इस धोखाधड़ी में AI का इस्तेमाल कैसे हुआ?
मुख्य आरोपी राहुल शर्मा ने कथित तौर पर ChatGPT का उपयोग करके फर्जी खरीद आदेश, पुष्टिकरण पत्र, कर्मचारी पहचान पत्र और अन्य आधिकारिक दिखने वाले दस्तावेज तैयार किए। इसके अलावा एक नकली सिविल हॉस्पिटल ईमेल अकाउंट बनाया गया और Google Meet के ज़रिए पीड़ित से वीडियो कॉल की गई।
गिरफ्तार तीनों आरोपी कौन हैं?
तीनों आरोपी अहमदाबाद में रह रहे थे — राहुल शर्मा (29 वर्ष, मूलतः राजस्थान के अलवर के), विपुल सिंह तोमर (30 वर्ष, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के) और अमन कुशवाह (26 वर्ष, मध्य प्रदेश के भिंड के)। पुलिस ने राहुल शर्मा को ऑपरेशन का कथित मास्टरमाइंड बताया है।
इस गिरोह ने कुल कितने लोगों को ठगा?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार गिरोह ने कम से कम 6 पीड़ितों को ठगा है। इसके अलावा चांगोदर पुलिस स्टेशन में ₹18.31 लाख की अलग धोखाधड़ी भी इन्हीं आरोपियों से जुड़ी है। जाँचकर्ताओं को अन्य पीड़ितों के साथ लगभग ₹5 लाख की अतिरिक्त धोखाधड़ी का भी संदेह है।
इस मामले में कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (2023) की धारा 318(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज है। एक आरोपी पर रखियाल पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 318(4) और IT अधिनियम की धारा 66(C) व 66(D) के तहत पूर्व मामला भी दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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