हामिद अंसारी का 'पद्म श्री' वापस लेने की मांग, हिंदू सेना ने गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू सेना संगठन ने 21 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का 'पद्म श्री' पुरस्कार तत्काल वापस लेने की माँग की है। यह माँग अंसारी की कथित 'हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता' टिप्पणी पर उठे विवाद के बाद सामने आई है। संगठन ने उन पर हिंदू विरोधी बयान देने और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के आरोप भी लगाए हैं।
पत्र में क्या कहा गया
हिंदू सेना के पत्र में आरोप लगाया गया है कि हामिद अंसारी ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए और उसके बाद भी ऐसे बयान दिए हैं जिनसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सांस्कृतिक ताने बाने पर गंभीर सवाल उठते हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि इन बयानों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचता है और सामाजिक सद्भाव को आघात लगता है।
संगठन के अध्यक्ष का बयान
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने एक आधिकारिक बयान में अंसारी के हालिया सार्वजनिक बयानों और पूर्व व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताई। गुप्ता ने कहा कि "राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते के गंभीर आरोपों और हिंदू समुदाय को बार बार निशाना बनाए जाने को देखते हुए अंसारी ने भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक को अपने पास रखने का नैतिक अधिकार खो दिया है।"
गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से माँग की कि वह तत्काल 'पद्म श्री' सम्मान वापस ले और इन मामलों की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दे। गौरतलब है कि यह माँग किसी सरकारी निकाय की ओर से नहीं, बल्कि एक संगठन की ओर से की गई है और सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पद्म पुरस्कार वापसी का प्रावधान
भारत सरकार के पद्म पुरस्कार नियमों के अनुसार, पद्म पुरस्कार वापस लेने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है। इस प्रक्रिया के लिए एक विशेष समिति की सिफारिश आवश्यक होती है। आलोचकों का कहना है कि किसी संगठन विशेष की माँग पर पुरस्कार वापस लेना मिसाल और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिहाज़ से चिंताजनक हो सकता है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी हाल के वर्षों में अपने कुछ सार्वजनिक बयानों को लेकर दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। अंसारी ने 2002 से 2007 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति और 2007 से 2017 तक भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। उन्हें 2008 में पद्म विभूषण — न कि पद्म श्री — से नवाज़ा गया था; हालाँकि स्रोत में पद्म श्री का उल्लेख है, इसलिए यही शब्द संगठन की माँग में प्रयुक्त है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी सार्वजनिक हस्ती का पुरस्कार वापस लेने की माँग उठी हो — पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई माँगें विभिन्न संगठनों की ओर से आती रही हैं, जिनमें से अधिकांश पर सरकार ने कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की।
आगे क्या होगा
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी माँगें राजनीतिक दबाव का हिस्सा होती हैं, लेकिन पुरस्कार वापसी की कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया जटिल है और इसे महज़ एक संगठन के पत्र पर नहीं लिया जा सकता।