हरदोई पुलिस ने पकड़ा 'काली सरकार': आर्मी ड्रेस में 'दिव्य दरबार' लगाने वाला प्रदीप शुक्ला गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
हरदोई पुलिस ने मंगलवार, 4 नवंबर 2026 को प्रदीप शुक्ला उर्फ सत्यानंद शुक्ला उर्फ 'काली सरकार' को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र में 'दिव्य दरबार' लगाने के लिए कथित तौर पर चर्चित यह व्यक्ति वर्ष 1993 और 1998 में दर्ज आपराधिक मामलों में अदालती समन के बावजूद लंबे समय से पेश नहीं हो रहा था। स्थायी वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उसे दबोचा।
कौन है 'काली सरकार'
प्रदीप शुक्ला मूल रूप से हरदोई के चौहान थोक का निवासी है और झांसी के कुरैंचा गांव स्थित एक मंदिर में सत्यानंद शुक्ला उर्फ काली सरकार के नाम से रह रहा था। वह सेना जैसी वर्दी पहनकर 'दिव्य दरबार' लगाता था और लोगों की बीमारियाँ ठीक करने का दावा करता था। रिपोर्टों के अनुसार, सोशल मीडिया पर उसके एक लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदीप शुक्ला के विरुद्ध पहला मामला वर्ष 1993 में आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दर्ज हुआ था। उसी वर्ष आईपीसी की धारा 394, 397 और 411 के तहत एक और मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद वर्ष 1998 में आईपीसी की धारा 324 के तहत भी मामला दर्ज हुआ। इन पुराने मामलों में आरोपी लगातार अदालत से अनुपस्थित रहा, जिसके चलते उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया गया था।
गौरतलब है कि हरदोई पुलिस ने इससे पहले 10 अक्टूबर को भी प्रदीप शुक्ला को हिरासत में लिया था। उस समय पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण न्यायालय से उसे राहत मिल गई थी। रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद पुलिस ने दूसरी बार गिरफ्तारी की।
नाबालिग से उत्पीड़न का आरोप भी
आरोपी के खिलाफ एक नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी दर्ज होने की जानकारी है। पुलिस फिलहाल इस मामले की अलग से जांच कर रही है। इस संवेदनशील आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
पुलिस का बयान
सीओ नगर हरदोई अजीत चौहान ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपराध और अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना कोतवाली शहर के हिस्ट्रीशीटर प्रदीप शुक्ला पुत्र मायारा, निवासी चौहान थोक, के खिलाफ कोर्ट से वारंट प्राप्त कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश किया गया।
क्या होगा आगे
यह मामला उत्तर प्रदेश में धर्म की आड़ में कथित ठगी और अपराध के उन मामलों की लंबी श्रृंखला में एक और कड़ी है, जो सोशल मीडिया पर बड़े फॉलोअर बेस के सहारे फलते-फूलते हैं। न्यायालय में पेशी के बाद अब तीनों पुराने मामलों और नए आरोपों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।