पांगी घाटी में चट्टान गिरने से टाटा सूमो में आग, 6 माह के मासूम समेत 13 लोगों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की दुर्गम पांगी घाटी में 25 जुलाई 2026 को एक भीषण हादसे में 6 माह के मासूम सहित 13 लोगों की मौत हो गई, जब उदयपुर-पांगी मार्ग पर करूनाला के निकट पहाड़ से विशाल चट्टान टूटकर एक टाटा सूमो वाहन पर आ गिरी। मलबे में दबने के बाद वाहन में आग भी भड़क उठी, जिसने त्रासदी को और भीषण बना दिया। वाहन कुल्लू से पांगी की ओर जा रहा था।
हादसे का घटनाक्रम
लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण बडाना के अनुसार, वाहन में चालक सहित कुल 15 यात्री सवार थे। हादसे से कुछ क्षण पहले दो यात्री वाहन से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, जबकि शेष 13 लोग मलबे और आग की चपेट में आ गए। यह वाहन उदयपुर-किलाड़ मार्ग से पांगी घाटी की ओर बढ़ रहा था।
गौरतलब है कि उदयपुर-किलाड़ मार्ग भूस्खलन के कारण हादसे से एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार, सड़क बंद होने के कारण सभी यात्री टिंडी में रात भर फंसे रहे और सड़क खुलते ही पांगी के लिए रवाना हो गए — यही निर्णय उनके लिए घातक साबित हुआ।
राहत एवं बचाव अभियान
हादसे की सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) के जवान और लाहौल-स्पीति पुलिस की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुँच गईं। पांगी के रेजिडेंट कमिश्नर अमनदीप सिंह ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन खराब मौसम और लगातार गिर रहे मलबे के कारण अभियान में गंभीर बाधाएँ आ रही हैं।
भरमौर के विधायक जनक राज ने बताया कि चंबा और लाहौल-स्पीति के उपायुक्तों को राहत और बचाव कार्य में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने लाहौल-स्पीति के उपायुक्त को तुरंत घटनास्थल पर पहुँचकर राहत कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने और घायलों के बेहतर उपचार को सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया।
संवेदनशील क्षेत्र और मौसम की चेतावनी
किलाड़-उदयपुर मार्ग, जो चंबा के दुर्गम इलाके से होकर गुजरता है, मानसून के दौरान भूस्खलन और चट्टान गिरने की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इस क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
यह हादसा इस बात की कड़ी याद दिलाता है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय मार्गों पर यात्रा कितनी जोखिम भरी हो सकती है — और आपदा-प्रवण सड़कों पर यातायात प्रबंधन को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता कितनी ज़रूरी है।