29 अगस्त 2026
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हिमंता बिस्वा सरमा ने शिलांग में असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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हिमंता बिस्वा सरमा ने शिलांग में असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शिलांग पहुँचे और असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर शहीदों को नमन किया। रेजिमेंटल सेंटर में जवानों से सीधा संवाद कर उन्होंने सेना के अनुशासन और बलिदान को सलाम किया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 अगस्त 2026 को शिलांग स्थित असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरमा ने असम रेजिमेंटल सेंटर का दौरा कर सेवारत जवानों के दैनिक प्रशिक्षण और जीवन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को भारत माता की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
असम रेजिमेंट का पूर्वोत्तर भारत से गहरा संबंध है और विभिन्न सैन्य अभियानों में इसकी सेवा का दीर्घ इतिहास रहा है।
सरमा ने जवानों के जीवन को 'अनुशासन, समर्पण और साहस' से परिभाषित बताया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 अगस्त 2026 को शिलांग स्थित असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर राष्ट्र की सेवा में प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने असम रेजिमेंटल सेंटर का भी दौरा किया और सेवारत जवानों से सीधा संवाद किया।

युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री सरमा ने शहीद सैनिकों को नमन करते हुए कहा, 'राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को मैंने अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को भारत माता की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ प्रेरित करता रहेगा। जय हिंद।' उन्होंने स्मारक पर खड़े होकर उन सैनिकों की स्मृति को सलाम किया जिनकी शौर्यगाथा असम रेजिमेंट की पहचान बन चुकी है।

रेजिमेंटल सेंटर में जवानों से संवाद

श्रद्धांजलि के बाद सरमा ने असम रेजिमेंटल सेंटर के जवानों से बातचीत की और उनके दैनिक प्रशिक्षण एवं जीवनशैली का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उन कर्मियों के जीवन की झलक मिली जो राष्ट्र की रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने को तत्पर रहते हैं। सरमा ने जोड़ा कि सेना के जवानों का दैनिक जीवन 'अनुशासन, समर्पण और साहस' से परिभाषित होता है।

असम रेजिमेंट का गौरवशाली इतिहास

पूर्वोत्तर भारत से गहरे सांस्कृतिक एवं भौगोलिक संबंध रखने वाली असम रेजिमेंट का विभिन्न सैन्य अभियानों और संघर्षों में सेवा का दीर्घ इतिहास रहा है। रेजिमेंट ने देश की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके शहीदों की स्मृति युद्ध स्मारक में संरक्षित है। गौरतलब है कि यह रेजिमेंट भारतीय सेना की उन इकाइयों में से एक है जिनकी जड़ें पूर्वोत्तर की भूमि और परंपराओं में गहरी हैं।

मुख्यमंत्री का संदेश

सरमा की इस यात्रा में शहीदों को स्मरण करने के साथ-साथ सेवारत जवानों के योगदान को सार्वजनिक रूप से मान्यता देने का उद्देश्य स्पष्ट था। उन्होंने राष्ट्रीय गौरव और सशस्त्र बलों की वीरता को रेखांकित करते हुए देश के प्रति सेवा की अटूट भावना को दोहराया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पूर्वोत्तर राज्यों में सैन्य-नागरिक संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकारें सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सैन्य उपस्थिति और नागरिक जीवन का गहरा अंतर्संबंध है, ऐसे दौरे राजनीतिक संदेश भी देते हैं। हालाँकि, शहीदों के सम्मान से परे, यह देखना ज़रूरी होगा कि राज्य सरकार सैनिक परिवारों के कल्याण और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास में कितनी ठोस नीतिगत प्रगति करती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा ने शिलांग में किसे श्रद्धांजलि दी?
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 29 अगस्त 2026 को शिलांग स्थित असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक पर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक कहाँ स्थित है?
असम रेजिमेंट युद्ध स्मारक मेघालय की राजधानी शिलांग में स्थित है, जहाँ असम रेजिमेंटल सेंटर भी है। यह स्मारक रेजिमेंट के शहीद सैनिकों की स्मृति को समर्पित है।
असम रेजिमेंट का क्या महत्व है?
असम रेजिमेंट भारतीय सेना की एक ऐतिहासिक इकाई है जिसकी जड़ें पूर्वोत्तर भारत में हैं। इसने विभिन्न सैन्य अभियानों और संघर्षों में सेवा दी है और देश की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरमा ने रेजिमेंटल सेंटर में क्या किया?
मुख्यमंत्री सरमा ने असम रेजिमेंटल सेंटर में सेवारत जवानों से सीधा संवाद किया और उनके दैनिक प्रशिक्षण एवं जीवनशैली का अवलोकन किया। उन्होंने जवानों के अनुशासन और समर्पण की सराहना की।
सरमा ने शहीद सैनिकों के बारे में क्या कहा?
सरमा ने कहा कि शहीद सैनिकों का साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को भारत माता की सेवा में पूर्ण समर्पण के साथ प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने 'जय हिंद' के साथ अपनी श्रद्धांजलि का समापन किया।
राष्ट्र प्रेस
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