एसआईआर अभियान का असर: पश्चिम बंगाल में मतदान 40% से बढ़कर 93.70%, चुनाव आयोग के आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग (ECI) ने 18 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों में बताया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे अभियानों की बदौलत कई राज्यों में मतदान प्रतिशत स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती चुनावों की तुलना में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। आयोग के अनुसार यह वृद्धि लोकतांत्रिक भागीदारी के विस्तार का प्रमाण है, साथ ही बढ़ती आबादी और जनसांख्यिकीय बदलावों की चुनौतियों की ओर भी संकेत करती है।
राज्यवार मतदान के आंकड़े
पश्चिम बंगाल में वर्ष 1951 में मतदान प्रतिशत लगभग 40% था, जो 2026 में बढ़कर रिकॉर्ड 93.70% तक पहुँच गया। इस अवधि में कुल पड़े वोटों की संख्या 76.35 लाख से बढ़कर 6.40 करोड़ हो गई — यानी करीब 8 गुना की वृद्धि।
पुडुचेरी में 1964 में मतदान प्रतिशत लगभग 65-70% था, जो 2026 में बढ़कर 91.19% हो गया। कुल मतदान 1.71 लाख से बढ़कर 8.66 लाख तक पहुँचा।
असम में 1951 में मतदान प्रतिशत करीब 50% था, जो 2026 में 86.33% हो गया। राज्य में कुल मतदान 23.48 लाख से बढ़कर 2.16 करोड़ पहुँचा।
तमिलनाडु में 1967 में मतदान प्रतिशत लगभग 70% था। बीच के वर्षों में उतार-चढ़ाव के बावजूद 2026 में यह 86.03% तक पहुँचा और कुल मतदान 1.59 करोड़ से बढ़कर 4.93 करोड़ हो गया।
केरल में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2.16 करोड़ हो गई। बिहार में 1951 में मतदान प्रतिशत करीब 50% था, जो धीरे-धीरे बढ़कर 2026 में 67.25% तक पहुँचा और मतदाताओं की संख्या 1.02 करोड़ से बढ़कर 5.02 करोड़ हो गई।
एसआईआर क्यों ज़रूरी है
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत में गिरावट या ठहराव का एक प्रमुख कारण मतदाता सूचियों में मृतकों, स्थानांतरित लोगों या डुप्लिकेट नामों का बना रहना और नए पात्र नागरिकों के नाम शामिल न होना है। एसआईआर के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं — अपात्र नाम हटाए जाते हैं और पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाता है।
आयोग का कहना है कि यदि नियमित रूप से ऐसे पुनरीक्षण न किए जाएं, तो सूची में त्रुटियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित होने और लोगों का चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कम होने का खतरा रहता है।
लोकतांत्रिक भागीदारी पर असर
आयोग द्वारा जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि दशकों में मतदान प्रतिशत और कुल वोटरों की संख्या दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि यह वृद्धि केवल जनसंख्या बढ़ने के कारण नहीं, बल्कि सूची की सटीकता और मतदाता जागरूकता में सुधार के कारण भी है।
यह ऐसे समय में आया है जब कई लोकतंत्रों में मतदाता उदासीनता एक चिंता का विषय बनी हुई है। भारत में एसआईआर जैसे संरचित अभियानों को इस प्रवृत्ति को उलटने का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
आगे की राह
चुनाव आयोग के अनुसार, हाल के वर्षों में कई राज्यों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज होना इस बात का संकेत है कि सतत पुनरीक्षण अभियानों ने चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है। आयोग ने संकेत दिया है कि बढ़ती आबादी, पलायन और जनसांख्यिकीय बदलावों की चुनौतियों से निपटने के लिए एसआईआर जैसे अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।