ईरानी वायु रक्षा का दावा: बंदर अब्बास के ऊपर अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन मार गिराया, 20 अक्टूबर के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी सेना की वायु रक्षा इकाइयों ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 की सुबह बंदर अब्बास के ऊपर एक अमेरिकी 'लुकास' ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई देश की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली के तहत अंजाम दी गई। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान-अमेरिका के बीच सैन्य तनाव पहले से ही चरम पर बना हुआ है।
मुख्य घटनाक्रम
ईरानी सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने बताया कि वायु रक्षा इकाइयों ने बंदर अब्बास के आसमान में अमेरिकी सेना के एक 'लुकास' ड्रोन को नष्ट किया। इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इस घटना की पुष्टि की। अमेरिकी सरकार की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पिछले कुछ दिनों का संदर्भ
यह घटना महज पाँच दिन पहले हुई एक बड़ी कार्रवाई के बाद आई है। 20 अक्टूबर 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की वायु रक्षा प्रणाली ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया था। IRGC के अनुसार, वह कथित तौर पर 54वाँ ड्रोन था जिसे ईरान ने गिराने का दावा किया है।
IRGC ने अपने बयान में कहा कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की ओर से कथित तौर पर शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने दर्जनों जासूसी और लड़ाकू ड्रोन तथा अन्य शत्रु विमानों को नष्ट करने का दावा किया है।
ईरान का कानूनी तर्क
IRGC का कहना है कि ये सभी कार्रवाइयाँ एक ऐसे सशस्त्र संघर्ष के दौरान की गई हैं, जिसे ईरान संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ये कार्रवाइयाँ संप्रभु वायु सीमा की रक्षा के लिए की गई हैं।
क्षेत्रीय तनाव पर असर
गौरतलब है कि बंदर अब्बास ईरान का प्रमुख नौसैनिक अड्डा और बंदरगाह शहर है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है — दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक। इस क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियाँ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन मार गिराने की इन घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव के जोखिम को बढ़ाती है, हालाँकि फिलहाल किसी भी पक्ष ने खुले युद्ध की घोषणा नहीं की है।
आगे क्या
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय देशों की नज़रें अब अमेरिकी प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि वाशिंगटन इस दावे की पुष्टि करता है या जवाबी कदम उठाता है, तो यह तनाव एक नए स्तर पर पहुँच सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले वैश्विक तेल व्यापार पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए ऊर्जा बाज़ार भी सतर्क हैं।