ईरान-अमेरिका शांति समझौता: राष्ट्रपति पेजेश्कियन बोले — सर्वोच्च नेता और SNSC की पूरी सहमति से हुआ MOU
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 30 जून 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित शांति समझौता ज्ञापन (MOU) देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के साथ पूर्ण समन्वय में और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के समर्थन से तैयार किया गया है। मध्य ईरान के कोम प्रांत के दौरे के दौरान दिए गए इस बयान में उन्होंने समझौते की वैधता और राष्ट्रीय सहमति को रेखांकित किया।
मुख्य घटनाक्रम
पेजेश्कियन ने कहा, 'अमेरिका के साथ बातचीत के सभी चरण ईरानी सरकार की बड़ी नीतियों के दायरे में, सर्वोच्च नेता के साथ लगातार और पूरी तरह तालमेल बनाकर और देश के कानूनी नियमों के अनुसार आगे बढ़ाए गए।' उनके कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, समझौते के अंतिम मसौदे की सुरक्षा संबंधी पाबंदियों को ध्यान में रखते हुए भी संबंधित ईरानी अधिकारियों ने समीक्षा की और SNSC के सभी सदस्यों ने इसे पूर्ण समर्थन दिया।
MOU की पृष्ठभूमि
18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में चल रहे युद्ध को सभी मोर्चों पर समाप्त करने के लिए एक MOU पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लेबनान भी शामिल है। यह ऐसे समय में आया जब मध्य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर था। दोनों देश अब एक अंतिम समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखे हुए हैं, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत के मुद्दों पर।
एक्स पर पेजेश्कियन का संदेश
सोमवार को राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी समझ तक पहुँचना दोनों देशों का आपसी मामला है। उन्होंने लिखा कि अगर अमेरिका MOU की शर्तों को पूरा करता है, तो 'हम भी अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करेंगे।' साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान 'अनुचित दिखावे और बेबुनियाद धमकियों' का जवाब समझदारी से फैसले लेकर और मजबूती से अपनी रक्षा करके देता है।
आर्थिक लाभ और कूटनीतिक उपलब्धि
पेजेश्कियन ने सोमवार को यह भी घोषित किया कि कतर में रखी गई ईरान की करीब 6 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति अब जारी होकर वापस देश में आएगी। उन्होंने इस MOU को ईरानी लोगों के लिए 'एक बड़ी जीत' करार दिया। गौरतलब है कि यह संपत्ति लंबे समय से प्रतिबंधों के कारण अवरुद्ध थी।
राष्ट्रीय हितों पर अडिग रुख
पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौते तक पहुँचने की बातचीत में ईरान अपने लोगों के अधिकारों, अपने मूल सिद्धांतों और राष्ट्रीय हितों से किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेगा। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान घरेलू राजनीतिक दबाव को संतुलित करते हुए कूटनीतिक लचीलेपन का संकेत देता है।