जालना स्कूल विवाद: नकली तलवारों और कथित विवादित गाने पर प्रिंसिपल समेत चार के खिलाफ FIR
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के जालना जिले के परतूर स्थित किड्स वर्ल्ड इंग्लिश स्कूल का एक वार्षिक समारोह का वीडियो 4 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तीव्र विवाद उत्पन्न हो गया। वीडियो में छात्र हाथों में नकली तलवारें लिए एक कथित विवादित गाने पर प्रस्तुति देते दिख रहे हैं, जिसके बाद परतूर पुलिस ने स्कूल प्रिंसिपल वज़ियुद्दीन सिद्दीकी समेत चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
मुख्य घटनाक्रम
यह विवाद तब सामने आया जब स्कूल के सालाना कार्यक्रम की वीडियो क्लिप ऑनलाइन तेज़ी से फैल गईं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्थानीय नेताओं के एक समूह ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि छात्रों ने नकली तलवारें लेकर एक विवादित गाने पर नृत्य किया।
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि कार्यक्रम में 'सर तन से जुदा' वाला नारा सुनाई दे रहा था, जबकि अन्य रिपोर्टों में इसे एक पाकिस्तानी गाना बताया गया। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि प्रस्तुति के दौरान मंच पर कुछ विवादित हस्तियों की तस्वीरें दिखाई गईं, हालांकि इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की कार्रवाई और आरोप
शिकायत मिलने के बाद परतूर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की — प्रिंसिपल वज़ियुद्दीन सिद्दीकी, स्कूल के अध्यक्ष, एक शिक्षक और कार्यक्रम के एंकर। पुलिस ने देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को प्रभावित करने, विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने और राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाने वाली भ्रामक जानकारी प्रसारित करने से संबंधित धाराएँ लगाई हैं।
पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी की निगरानी में जाँच जारी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि वीडियो में क्या वास्तविक था, प्रस्तुति को मंजूरी कैसे मिली और क्या किसी कानून का उल्लंघन हुआ।
स्कूल प्रशासन का पक्ष
स्कूल प्रशासन ने इन सभी आरोपों का पुरज़ोर खंडन किया है। प्रिंसिपल वज़ियुद्दीन सिद्दीकी ने स्पष्ट किया, 'प्रोग्राम के दौरान जो म्यूजिक इस्तेमाल किया गया था, वह मशहूर तुर्की ऐतिहासिक टीवी सीरियल एर्तुगरुल गाजी का था, न कि कोई पाकिस्तानी गाना। परफॉर्मेंस के दौरान दिखाई गई तस्वीर उसी सीरियल के एक एक्टर की थी। कुछ लोगों ने विज़ुअल्स के साथ छेड़छाड़ की है और सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाली बातें फैलाई हैं।'
स्कूल प्रशासन का कहना है कि यह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक नाटक पर आधारित प्रस्तुति थी, इस्तेमाल की गई तलवारें नकली थीं और इसका उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव फैलाना या चरमपंथ को बढ़ावा देना कतई नहीं था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने तेज़ी से राजनीतिक रंग ले लिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक एवं पूर्व मंत्री बबनराव लोनिकर और वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने इलाके का दौरा कर कड़ी कार्रवाई की माँग की। सोमैया ने आरोप लगाया कि स्कूल के पास राज्य के शिक्षा विभाग से वैध मान्यता नहीं है और स्कूल परिसर को सील करने की माँग की।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हाल के महीनों में स्कूली कार्यक्रमों को लेकर विवाद की यह पहली घटना नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के ज़रिए सांप्रदायिक रंग देने की प्रवृत्ति पर विशेषज्ञ पहले भी चिंता जता चुके हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगे के प्रशासनिक और कानूनी कदम पूरी तरह पुलिस जाँच के अंतिम निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे। जाँच में वीडियो की प्रामाणिकता, प्रस्तुति की मंज़ूरी प्रक्रिया और स्कूल की मान्यता की स्थिति — तीनों पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।