जन्माष्टमी पर महाकालेश्वर उज्जैन में श्रीकृष्ण स्वरूप में बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी, शुक्रवार 4 सितंबर को बाबा महाकाल का श्रीकृष्ण स्वरूप में अलौकिक शृंगार किया गया और विधिवत भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।
मंदिर के कपाट खुलने का क्रम
तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और फिर दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया।
श्रीकृष्ण स्वरूप में दिव्य शृंगार
कपूर आरती के उपरांत बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। जन्माष्टमी के विशेष अवसर पर बाबा को श्रीकृष्ण भगवान के स्वरूप में सजाया गया — यह शृंगार मंदिर की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें पर्व-विशेष पर महाकाल को उस देवरूप में अलंकृत किया जाता है जो उस तिथि से जुड़ा हो। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।
श्रद्धालुओं की अपार भीड़
जैसे ही भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े थे।
भस्म आरती की परंपरा
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। भस्म आरती में शामिल होने के इच्छुक पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
उज्जैन का धार्मिक महत्व
गौरतलब है कि उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में गिना जाता है और महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जन्माष्टमी जैसे विशेष पर्वों पर यहाँ देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुँचते हैं। यह आयोजन उज्जैन की आध्यात्मिक पहचान को और सुदृढ़ करता है।