झारखंड: गुमला के कोबजा गांव की ग्राम सभा ने ईसाई पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर लगाई रोक
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित कोबजा गांव में 1 नवंबर 2026 को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में सरना आदिवासी समुदाय के ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए ईसाई धर्म के पास्टरों और पादरियों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले को सार्वजनिक करने के लिए गांव में एक स्थायी बैनर भी लगाया गया। ग्राम सभा में बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया, और इस दौरान भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी निशा उरांव भी उपस्थित रहीं।
ग्रामीणों की चिंता और आरोप
ग्राम सभा में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कथित धर्मांतरण गतिविधियों के चलते उनकी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक पहचान प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी धर्मगुरुओं के गांव में आकर लोगों से संपर्क करने के कारण सरना समुदाय के सामने अपनी परंपराओं को जीवित रखने की चुनौती उत्पन्न हो रही है।
गांव के सरना आदिवासी समुदाय के सदस्य बिशु उरांव ने कहा कि उनके अनुसार धर्मांतरण की गतिविधियों से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ रही है। गांव की एक महिला ने भी आरोप लगाया कि धर्मांतरण के साथ-साथ गांव में चर्च निर्माण की कोशिश की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में अपने अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता है।
पेसा कानून और संवैधानिक अधिकार
IRS अधिकारी निशा उरांव ने बताया कि यह क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहाँ पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, यानी पेसा कानून लागू है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत ग्राम सभा को विशेष अधिकार प्राप्त हैं और इसी अधिकार का उपयोग करते हुए ग्रामीणों ने यह सामूहिक निर्णय लिया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इन अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका को भलीभाँति समझें।
गौरतलब है कि पेसा कानून आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा को स्थानीय संसाधनों, परंपराओं और सामाजिक ढाँचे की सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है। यह निर्णय इसी वैधानिक ढाँचे के भीतर लिया गया बताया जा रहा है।
बैनर लगाकर ऐलान
ग्राम सभा की बैठक के बाद निशा उरांव ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव में प्रतिबंध संबंधी बैनर लगाया। मौजूद लोगों ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया कि वे किसी भी ईसाई धर्मगुरु को गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
उल्लेखनीय है कि ग्राम सभा के इस फैसले और ईसाई पास्टरों व पादरियों के प्रवेश पर रोक को लेकर गुमला जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस निर्णय के व्यापक कानूनी निहितार्थों और अन्य समुदायों पर इसके प्रभाव को लेकर स्थिति प्रतीक्षारत है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड में आदिवासी पहचान, धर्म और सांस्कृतिक संरक्षण को लेकर बहस तेज़ होती रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।