1 नवंबर 2026
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आजम खान की दोबारा गिरफ्तारी पर नसीम सिद्दीकी का हमला — 'देश में अघोषित इमरजेंसी, नाम देखकर मिल रहा न्याय'

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आजम खान की दोबारा गिरफ्तारी पर नसीम सिद्दीकी का हमला — 'देश में अघोषित इमरजेंसी, नाम देखकर मिल रहा न्याय'

सारांश

जमानत के तुरंत बाद आजम खान की पुनः गिरफ्तारी ने विपक्ष को आक्रामक कर दिया। एनसीपी-एसपी के नसीम सिद्दीकी ने सीधा आरोप लगाया — 'नाम देखकर न्याय हो रहा है।' यह बयान महज़ एक केस तक सीमित नहीं, बल्कि मुस्लिम नेताओं के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई की व्यापक राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है।

मुख्य बातें

एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 1 नवंबर 2026 को केंद्र सरकार पर 'अघोषित इमरजेंसी' का आरोप लगाया।
आजम खान को जमानत मिलने के 24 घंटे के भीतर दोबारा गिरफ्तार किए जाने को उन्होंने 'अलोकतांत्रिक और अन्याय' बताया।
सिद्दीकी ने कहा कि संपत्ति अटैचमेंट और गिरफ्तारी में धर्म और नाम निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यूसीसी को 'कागजों पर नहीं, व्यवहार में पहले से लागू' बताया और BJP पर हिंदू राष्ट्र बनाने का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।

एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान की जेल से रिहाई के तुरंत बाद हुई पुनः गिरफ्तारी यह साबित करती है कि देश में 'अघोषित आपातकाल' लागू है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक राहत को 24 घंटे के भीतर पलट दिया जाता है और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी का धर्म और नाम निर्णायक भूमिका निभाता है।

सिद्दीकी का केंद्र पर सीधा आरोप

सिद्दीकी ने कहा, 'इस देश में अघोषित इमरजेंसी लागू है। एक तरफ अगर न्याय व्यवस्था किसी को न्याय देती है तो उसे 24 घंटे के अंदर दोबारा किस तरीके से सलाखों के पीछे भेजा जाए, उस बारे में पहले ही सोच लिया जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति मुस्लिम समुदाय का हो, तो उसकी रिहाई से पहले ही पुनः गिरफ्तारी की तैयारी पूरी कर ली जाती है।

उन्होंने तर्क दिया कि जो संपत्ति अटैच की गई और जिस आधार पर आजम खान को फिर गिरफ्तार किया गया, वही कार्रवाई किसी अन्य नाम वाले व्यक्ति के मामले में नहीं होती। 'अगर यह प्रॉपर्टी किसी राम प्रसाद की होती, किसी आलोक कुमार की होती, किसी ज्ञानेश कुमार की होती तो न तो प्रॉपर्टी अटैच की जाती और न आजम खान को फिर से गिरफ्तार किया जाता। इस देश में नाम देखकर न्याय हो रहा है।'

'न्याय देवी की पट्टी हटने' पर तंज

सिद्दीकी ने न्याय की प्रतीकात्मक व्याख्या करते हुए कटाक्ष किया कि जब से न्याय की देवी की आँखों पर से पट्टी हटी है, तब से वह याचिकाकर्ता का नाम, गोत्र और जाति देखकर फैसला सुनाती है। उनका इशारा हाल के उस विवाद की ओर था, जिसमें न्यायपालिका की प्रतिमा से पट्टी हटाए जाने पर देशभर में बहस छिड़ी थी। उन्होंने कहा कि उमर खालिद और अब्दुल जैसे नामों वाले याचिकाकर्ताओं के साथ न्याय का पैमाना अलग होता है।

धर्मग्रंथों व यूसीसी पर सिद्दीकी का रुख

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सिद्दीकी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में शरीयत, कुरान और हदीस का संदर्भ दिया जाता है, उसी प्रकार यदि कोई न्यायालय हिंदू समाज के धर्मग्रंथों — गीता, रामायण और भगवद् गीता — के आधार पर निर्णय देता है, तो इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं। उन्होंने कहा कि वे संबंधित उच्च न्यायालय के फैसले का पूर्ण समर्थन करते हैं। यूसीसी पर उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) व्यवहार में देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रही है और 'यूसीसी कागज पर नहीं, समाज और प्रदेशों में पहले से लागू हो चुका है।'

चुनाव आयोग व लोकतंत्र पर सवाल

सिद्दीकी ने चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग, गृह मंत्री या प्रधानमंत्री पहले से चुनाव परिणाम घोषित करने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा केवल वही व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है जिसे भविष्य में होने वाली 'चोरी और डकैती' की पहले से जानकारी हो।

आजम खान मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि आजम खान उत्तर प्रदेश के रामपुर से सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हैं, जो विभिन्न आपराधिक मामलों में लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अदालत से जमानत मिलने के तुरंत बाद उनकी पुनः गिरफ्तारी ने विपक्षी दलों को एकजुट कर दिया है और इस घटना ने एक बार फिर मुस्लिम नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। सिद्दीकी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष पहले से केंद्र सरकार पर चुनिंदा कार्रवाई के आरोप लगा रहा है।

आने वाले दिनों में आजम खान का यह मामला अदालत में नई सुनवाई का सामना करेगा और विपक्षी दलों की यह एकजुटता कितनी स्थायी रहती है, यह देखना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक परीक्षण से मिलेगा। सरकार की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो संवाद की खाई को और चौड़ा करती है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजम खान को दोबारा क्यों गिरफ्तार किया गया?
आजम खान को जमानत मिलने के तुरंत बाद संपत्ति से जुड़े एक अन्य मामले में पुनः गिरफ्तार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई पूर्वनियोजित थी और धार्मिक पहचान के आधार पर की गई।
नसीम सिद्दीकी कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
नसीम सिद्दीकी एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उन्होंने 1 नवंबर 2026 को मुंबई में कहा कि देश में 'अघोषित इमरजेंसी' है और 'नाम देखकर न्याय' हो रहा है।
'अघोषित इमरजेंसी' से सिद्दीकी का क्या आशय था?
सिद्दीकी ने इस शब्दावली का उपयोग यह दर्शाने के लिए किया कि न्यायिक राहत को 24 घंटे के भीतर नई गिरफ्तारी से बेअसर किया जा रहा है, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
यूसीसी और हिंदू राष्ट्र पर सिद्दीकी का क्या कहना था?
सिद्दीकी ने कहा कि यूसीसी कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहार और प्रदेशों में पहले से लागू हो चुका है और BJP देश को व्यवहार में हिंदू राष्ट्र घोषित कर रही है।
आजम खान की पुनः गिरफ्तारी का विपक्ष पर क्या राजनीतिक असर है?
इस घटना ने विपक्षी दलों को एकजुट करने का काम किया है और 'चुनिंदा न्याय' के आरोपों को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श में ला दिया है। यह मामला आगामी चुनावी ध्रुवीकरण में भी भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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