झारखंड कोल टेरर फंडिंग मामला: एनआईए कोर्ट ने 14 आरोपियों को दोषी करार दिया, 18 अगस्त को सजा पर सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
रांची स्थित राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 12 अगस्त 2026 को झारखंड की मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में 14 आरोपियों को दोषी करार दिया। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की इन परियोजनाओं के ज़रिए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) को कथित तौर पर लेवी पहुँचाने के इस मामले में अब 18 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने जिन 14 आरोपियों को दोषी ठहराया, उनमें विनोद गंझू, मुनेश गंझू, बिरबल गंझू, बिंदु गंझू, कोहराम, सुभान मियां, संजय जैन, प्रेम विकास, मुकेश गंझू, भीखन गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता और अनिश्चय गंझू सहित अन्य शामिल हैं। वहीं, आम्रपाली कोल परियोजना के CCL महाप्रबंधक अजीत कुमार ठाकुर को अदालत ने बरी कर दिया। एक अन्य आरोपी आक्रमण जी का मुकदमा अदालत में अलग से चल रहा है।
एनआईए की जाँच और आरोप
यह मामला मूलतः टंडवा थाने में दर्ज कांड संख्या 2/2016 से जुड़ा है। NIA ने 13 फरवरी 2018 को इसे अपने हाथ में लिया और जाँच पूरी करने के बाद 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। जाँच के दौरान एजेंसी ने दावा किया कि मगध और आम्रपाली परियोजनाओं में कोयला ढुलाई के ठेके ऊँची दरों पर लिए गए, ताकि उसमें से TPC को लेवी दी जा सके।
एजेंसी के अनुसार, इनमें कुछ आरोपी TPC के सक्रिय उग्रवादी थे, जबकि अन्य संगठन के लिए लेवी वसूली का काम करते थे। जाँच में CCL, पुलिस, उग्रवादियों और शांति समिति से जुड़े लोगों के बीच कथित सांठगांठ के ज़रिए टेरर फंडिंग किए जाने का दावा भी सामने आया था।
टीपीसी और लेवी नेटवर्क
तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) झारखंड का एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है, जो कोयला क्षेत्र और खनन परियोजनाओं में लेवी वसूली के लिए कुख्यात रहा है। एनआईए के अनुसार, कोयला ढुलाई के ठेकों के ज़रिए इस संगठन को नियमित रूप से आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे थे। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में खनन क्षेत्र में उग्रवादी संगठनों की आर्थिक पहुँच लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही है।
आगे क्या होगा
अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है। दोषसिद्धि के बाद अब यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि अदालत किस धारा के तहत और कितनी कठोर सजा सुनाती है। यह फैसला झारखंड के खनन क्षेत्र में टेरर फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ एनआईए की कार्रवाई में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।