मुकुंदपुर हिंसा पर जितेंद्र तिवारी: 'हमला करना BJP का एजेंडा नहीं, जनता में गुस्सा कुछ नेताओं के प्रति'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता जितेंद्र तिवारी ने 23 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के मुकुंदपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और BJP कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प तथा हुमायूं कबीर पर हुए हमले के संदर्भ में, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी पर हमला करना या उसके अधिकार छीनना BJP का एजेंडा कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि बंगाल में BJP परिवर्तन और कानून के राज के लिए लड़ रही है।
हुमायूं कबीर पर हमले की निंदा
तिवारी ने हुमायूं कबीर पर हुए शारीरिक हमले की स्पष्ट शब्दों में निंदा करते हुए कहा, 'किसी भी व्यक्ति पर शारीरिक हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने जोड़ा कि BJP और सरकार इस तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती।
गौरतलब है कि मुकुंदपुर में हुई झड़प में कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ लगातार सुर्खियों में हैं।
जनता के गुस्से और उकसावे पर तिवारी का बयान
तिवारी ने कहा कि अतीत में कुछ लोगों ने ऐसे काम किए हैं, जिसके कारण आम जनता में उनके प्रति गुस्सा है और कई जगह उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने साथ ही चेताया कि 'लोगों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।'
उनका यह भी आरोप था कि 'कुछ राजनीतिक लोग सस्ती लोकप्रियता और लाइमलाइट में आने के लिए उकसाने वाली कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे जनता उत्तेजित हो रही है।' तिवारी ने स्वीकार किया कि BJP अपने कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण रख सकती है, लेकिन आम जनता पर नियंत्रण रखना संभव नहीं है।
BJP कार्यकर्ताओं के आचरण पर पार्टी की नीति
तिवारी ने कहा कि पार्टी का प्रयास पहले दिन से रहा है कि उसके कार्यकर्ता TMC के कार्यकर्ताओं की तरह न बनें। उन्होंने माना कि चूँकि बंगाल में BJP ने अभी तक शासन नहीं किया है, इसलिए कुछ कार्यकर्ता कभी TMC तो कभी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) की कार्यशैली की नकल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी लगातार सावधानी बरतती है और किसी भी कार्यकर्ता द्वारा पार्टी की तय सोच से अलग व्यवहार करने पर उसे तुरंत समझाया जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यकर्ता अज्ञानता के कारण गलत व्यवहार करते हैं और जब उन्हें सत्ता के हस्तांतरण का अर्थ समझाया जाता है तो वे उस पर अमल करते हैं।
TMC छोड़कर NCPI में गए सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट मामला
TMC छोड़कर राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (I) (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों को दिए गए समय और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर तिवारी ने कहा कि दिल्ली के इस मामले की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान BJP छोड़कर TMC में शामिल हुए विधायकों के खिलाफ शुभेंदु अधिकारी ने कई बार शिकायत की थी, किंतु विधानसभा अध्यक्ष की ओर से तीन से पाँच साल तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।
तिवारी ने कहा कि जब पाँच वर्षों तक विधानसभा अध्यक्ष कोई फैसला नहीं कर पाए, तो दिल्ली में क्या होगा, इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से दलबदल विरोधी कार्यवाही में विलंब की व्यापक समस्या की ओर संकेत करता है।
आलोचना को स्वीकारने का दावा
तिवारी ने दावा किया कि BJP ने लोगों को बोलने और सरकार की आलोचना करने का अधिकार देने का वादा किया था, और यह अधिकार लोगों को मिला है। उन्होंने कहा, 'आलोचना करने वालों को BJP अपना दुश्मन नहीं मानती, बल्कि उनकी बात सुनकर खुद में सुधार करने का प्रयास करती है।' इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
आने वाले दिनों में मुकुंदपुर हिंसा की जाँच और अस्पताल में भर्ती लोगों की स्थिति पर सभी की नज़र रहेगी, जो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल की दिशा तय करेगी।