जेपीएससी आंदोलन: अनशनकारी छात्र राहुल क्रांति आईसीयू में, स्वास्थ्य मंत्री और बाबूलाल मरांडी पहुंचे रांची सदर अस्पताल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच 7 अगस्त को पलामू के छात्र नेता राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें एंबुलेंस से रांची सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती किया। राहुल मंगलवार रात से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे और शुक्रवार को खड़े होने पर उन्हें तेज चक्कर आने लगे।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल क्रांति के अलावा आंदोलन से जुड़े छात्र बी. पांडे की भी नारेबाजी के दौरान तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं, लगातार हो रही बारिश के बीच धरने पर बैठे कोडरमा के छात्र ब्रजकिशोर की हालत भी खराब हुई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। इस प्रकार एक ही दिन में तीन अनशनकारी छात्रों को चिकित्सा सहायता की ज़रूरत पड़ी, जो आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया
छात्रों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देश दिया कि बीमार छात्रों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। मंत्री का अस्पताल पहुंचना सरकार की ओर से पहली प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया मानी जा रही है, हालाँकि आंदोलन की मूल माँगों पर अभी कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है।
विपक्ष की आवाज़
बाद में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी सदर अस्पताल पहुंचे और दोनों छात्रों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। मरांडी ने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण छात्रों को अपनी जान दाँव पर नहीं लगानी चाहिए और उन्हें लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2019 के बाद राज्य में हुई कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएँ सामने आई हैं और झारखंड में परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का भरोसा लगातार टूट रहा है।
आम जनता और युवाओं पर असर
मरांडी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन महज कुछ अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि राज्य के उन तमाम युवाओं की आवाज़ है जो निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और रोज़गार के अवसरों की माँग कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के लाखों युवा सरकारी नौकरियों के लिए जेपीएससी और जेएसएससी जैसी परीक्षाओं पर निर्भर हैं।
क्या होगा आगे
फिलहाल आंदोलन जारी है और अनशनकारी छात्रों की माँगें अनसुनी बनी हुई हैं। सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस वार्ता प्रस्ताव सामने नहीं आया है। चिकित्सकों की निगरानी में भर्ती छात्रों की स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो स्थिति और विकट होने की आशंका है।