जासूसी मामले में यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज, कहा — राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान को खुफिया जानकारी पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार ट्रैवल व्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली। 6 जून 2025 को शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा है और देश की सुरक्षा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं है। अब मल्होत्रा को ट्रायल कोर्ट में पूरी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ज्योति मल्होत्रा पर पड़ोसी देश को संवेदनशील और प्रतिबंधित जानकारियाँ उपलब्ध कराने के अत्यंत गंभीर आरोप हैं। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'हम नहीं मानते कि इस मामले में जमानत दी जानी चाहिए। वे मुकदमे का सामना करें।' न्यायालय ने इसे असाधारण रूप से गंभीर मामला बताते हुए जमानत के लिए कोई आधार न पाते हुए याचिका अस्वीकार कर दी।
कौन हैं ज्योति मल्होत्रा
हरियाणा के हिसार की रहने वाली ज्योति मल्होत्रा यूट्यूब पर 'ट्रैवल विथ जो' नाम से एक लोकप्रिय ट्रैवल चैनल चलाती थीं, जिसने उन्हें बड़ी संख्या में दर्शक और फॉलोअर्स दिलाए थे। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहुँच और उनके द्वारा संवेदनशील स्थानों तक आसान पहुँच सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक उभरती चुनौती बन चुकी है।
गिरफ्तारी और आरोप
हरियाणा पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने लंबे समय तक निगरानी के बाद 16 मई 2025 को हिसार स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया। जाँच एजेंसियों के अनुसार, मल्होत्रा लगातार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े अधिकारियों और हैंडलर्स के संपर्क में थीं। आरोप है कि उन्होंने भारत से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियाँ पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुँचाईं। इसी आधार पर उनके विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गंभीर कानूनी प्रावधानों के तहत जाँच जारी है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय से जमानत नामंज़ूर होने के बाद अब ज्योति मल्होत्रा का मामला ट्रायल कोर्ट में चलेगा, जहाँ उन पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत सुनवाई होगी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अदालतें आमतौर पर जमानत देने में अत्यधिक सतर्कता बरतती हैं, और यह फैसला उसी स्थापित न्यायिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।