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वाल्मीकि निगम घोटाला: श्रीरामुलु ने नागेंद्र को दी रामायण पर शपथ की चुनौती, कांग्रेस को बताया '1948 से भ्रष्ट'

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वाल्मीकि निगम घोटाला: श्रीरामुलु ने नागेंद्र को दी रामायण पर शपथ की चुनौती, कांग्रेस को बताया '1948 से भ्रष्ट'

सारांश

BJP नेता श्रीरामुलु ने कर्नाटक में कांग्रेस के भ्रष्टाचार की 'परंपरा' को 1948 के जीप घोटाले से जोड़ते हुए मंत्री नागेंद्र को रामायण पर शपथ की चुनौती दी। कथित ₹187 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले पर BJP का आंदोलन तेज, इस्तीफे की माँग पर अड़ी पार्टी।

मुख्य बातें

श्रीरामुलु ने 21 अगस्त को बेंगलुरु में मंत्री बी.
नागेंद्र को महर्षि वाल्मीकि की रामायण पर हाथ रखकर शपथ लेने की खुली चुनौती दी।
श्रीरामुलु ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार को 1948 के जीप घोटाले से जोड़ा, जिसमें तत्कालीन उच्चायुक्त वी.के.
कृष्ण मेनन पर वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप था।
कथित ₹187 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले में नागेंद्र जेल जा चुके हैं; आरोप है कि धन हजारों बैंक खातों में भेजा गया और लग्जरी कारें व सोना खरीदा गया।
BJP ने माँग की कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाकर वाल्मीकि समुदाय के किसी अन्य प्रतिनिधि को मंत्री बनाया जाए।
चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद यह विवाद सामने आया था; पीड़ित परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में है।

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बी. श्रीरामुलु ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बेंगलुरु में कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का भ्रष्टाचार 1948 के जीप घोटाले से शुरू होकर कथित महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले तक फैला हुआ है। उन्होंने राज्य के मंत्री बी. नागेंद्र को खुली चुनौती दी कि यदि वे निर्दोष हैं, तो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण पर हाथ रखकर शपथ लें।

मुख्य घटनाक्रम

बेंगलुरु स्थित BJP प्रदेश कार्यालय जगन्नाथ भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्रीरामुलु ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुए 1948 के जीप घोटाले को कांग्रेस के भ्रष्टाचार की 'जड़' बताया। उनके अनुसार तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी.के. कृष्ण मेनन ने ब्रिटेन की एक छोटी विदेशी कंपनी से सेना के लिए करीब ₹80 लाख के जीप खरीदने का अनुबंध सामान्य वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया था।

श्रीरामुलु ने नेहरू को 'भ्रष्टाचार का जनक' बताया — यह उनका व्यक्तिगत आरोप है, जिसे BJP ने अपनी पार्टी की आधिकारिक लाइन के रूप में प्रस्तुत किया।

वाल्मीकि निगम घोटाले पर आरोप

श्रीरामुलु ने कहा कि कथित ₹187 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले में मंत्री बी. नागेंद्र जेल जा चुके हैं। उनके अनुसार विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि भ्रष्टाचार हुआ था, परंतु अब वही सरकार कह रही है कि कोई घोटाला नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि वाल्मीकि समुदाय के कल्याण और बच्चों के भविष्य के लिए निर्धारित धनराशि को हजारों बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया और उसका उपयोग लग्जरी कारें तथा सोना खरीदने में किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान बल्लारी, कोप्पल, रायचूर, बीदर और कलबुर्गी में भी इस धन का उपयोग हुआ।

श्रीरामुलु ने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा राहुल गांधी के दिल्ली आवास तक पहुँचाया गया — यह उनका आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नागेंद्र पर पलटवार

मंत्री नागेंद्र द्वारा BJP नेताओं को 'मनुवादी' कहे जाने पर श्रीरामुलु ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब नागेंद्र BJP विधायक थे और बाद में निर्दलीय चुनाव लड़े, तब यही BJP नेता उनके साथ खड़े थे। उनके अनुसार नागेंद्र वाल्मीकि के नाम का सहारा लेकर आरोपों से बचने की कोशिश कर रहे हैं और यह 'नाटक' बंद होना चाहिए।

गौरतलब है कि यह विवाद निगम कर्मचारी पी. चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद सार्वजनिक हुआ था। श्रीरामुलु ने कहा कि पीड़ित परिवार अब भी न्याय की प्रतीक्षा में है।

BJP की माँग

श्रीरामुलु ने कर्नाटक सरकार से माँग की कि बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से तत्काल हटाया जाए और उनकी जगह वाल्मीकि समुदाय के किसी अन्य प्रतिनिधि को मंत्री बनाया जाए। उन्होंने कहा, 'भाजपा नागेंद्र के इस्तीफे की माँग को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर आंदोलन कर रही है। जब तक वह इस्तीफा नहीं देते, हमारा विरोध जारी रहेगा।'

आगे क्या

कथित वाल्मीकि निगम घोटाले की जाँच जारी है और BJP ने स्पष्ट किया है कि वह विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को और तेज करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से कई विवादों से घिरी है और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि दशकों पुराने आरोपों को वर्तमान घोटाले से जोड़ना तथ्यात्मक जवाबदेही से ध्यान हटाने का जोखिम भी उठाता है। असली सवाल यह है कि कथित ₹187 करोड़ का धन वाल्मीकि समुदाय के कल्याण की बजाय कहाँ गया — और इसकी जाँच की गति व पारदर्शिता पर्याप्त है या नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में दलित और आदिवासी समुदायों के कल्याण कोषों की निगरानी की व्यवस्था पर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। BJP का आंदोलन राजनीतिक रूप से प्रासंगिक है, परंतु पार्टी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह जब सत्ता में थी, तब इन निगमों की निगरानी कितनी सख्त थी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक का कथित ₹187 करोड़ का घोटाला है, जिसमें आरोप है कि वाल्मीकि समुदाय के कल्याण के लिए निर्धारित धनराशि को हजारों बैंक खातों में स्थानांतरित कर लग्जरी कारें, सोना और अन्य कार्यों में खर्च किया गया। निगम कर्मचारी पी. चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद यह विवाद सार्वजनिक हुआ।
बी. नागेंद्र पर क्या आरोप हैं और अभी वे किस स्थिति में हैं?
कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र पर इस कथित घोटाले में संलिप्तता का आरोप है और वे जेल जा चुके हैं। BJP उनके मंत्रिमंडल से इस्तीफे की माँग कर रही है और विधानसभा के भीतर व बाहर आंदोलन जारी है।
1948 का जीप घोटाला क्या था, जिसका श्रीरामुलु ने जिक्र किया?
श्रीरामुलु के अनुसार 1948 के जीप घोटाले में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी.के. कृष्ण मेनन ने ब्रिटेन की एक कंपनी से सेना के लिए करीब ₹80 लाख के जीप खरीदने का अनुबंध सामान्य वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया था। यह आरोप BJP नेता ने कांग्रेस के कथित भ्रष्टाचार की 'परंपरा' को रेखांकित करने के लिए उठाया।
BJP ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
BJP ने माँग की है कि बी. नागेंद्र को कर्नाटक मंत्रिमंडल से तत्काल हटाया जाए और उनकी जगह वाल्मीकि समुदाय के किसी अन्य प्रतिनिधि को मंत्री बनाया जाए। पार्टी ने यह भी माँग की है कि घोटाले की निष्पक्ष जाँच हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।
क्या कर्नाटक सरकार ने घोटाले को स्वीकार किया है?
श्रीरामुलु के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में भ्रष्टाचार होने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में सरकार का रुख बदल गया और अब कहा जा रहा है कि कोई घोटाला नहीं हुआ। सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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