कर्नाटक: BSWML निविदा विवाद में BJP का कांग्रेस पर निशाना, DK शिवकुमार परिवार पर हितों के टकराव का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कर्नाटक विधायक बसनगौड़ा आर. पाटिल (यतनाल) ने 15 जून 2026 को कांग्रेस सरकार पर बेंगलुरु के ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) की निविदाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। यतनाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा भूमि मुआवजे में की गई वृद्धि से राज्य के खजाने को नुकसान हुआ और इसमें हितों का टकराव स्पष्ट है।
मुख्य घटनाक्रम
BSWML ने बेंगलुरु के नए लैंडफिल के लिए डोडबल्लापुर तालुक के गुंडालाहल्ली गाँव में टेरा फर्मा बायोटेक्नोलॉजीज लिमिटेड (Terra Firma) के क्षेत्र सहित 100 एकड़ से अधिक भूमि चिह्नित की थी। कांग्रेस सरकार ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के माध्यम से Terra Firma से 38 एकड़ और 18 गुंटा भूमि को सशर्त मंजूरी दी।
यतनाल के अनुसार, BSWML ने प्रति एकड़ ₹1.50 करोड़ मुआवजा तय किया था, जिसे वित्त विभाग ने अस्वीकार कर दिया क्योंकि यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत सक्षम समिति द्वारा निर्धारित ₹1.35 करोड़ प्रति एकड़ की आधिकारिक दर से अधिक था। बावजूद इसके, 13 नवंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में यह मुआवजा संशोधित कर ₹1.57 करोड़ प्रति एकड़ कर दिया गया।
हितों के टकराव का आरोप
यतनाल ने आरोप लगाया कि मुआवजे में यह वृद्धि कथित तौर पर Terra Firma के पूर्व निदेशक और कैफे कॉफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ के परिवार को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से की गई। उनके अनुसार, सिद्धार्थ के पुत्र अमर्त्य हेगड़े का विवाह कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सबसे बड़ी पुत्री ऐश्वर्या शिवकुमार से हुआ है।
BJP विधायक ने दावा किया कि Terra Firma के अधिकांश निदेशक कॉफी डे में भी निदेशक हैं या वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर हैं। उन्होंने कहा कि डीके शिवकुमार स्वयं उस कैबिनेट बैठक में उपस्थित थे जिसमें यह निर्णय लिया गया, और वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद मुआवजा बढ़ाने के निर्णय को प्रभावित किया।
सरकार पर माँगें
यतनाल ने माँग की कि कैबिनेट का वह निर्णय तत्काल रद्द किया जाए जिसके तहत ₹1.57 करोड़ प्रति एकड़ की दर से Terra Firma को भुगतान स्वीकृत किया गया। उन्होंने Terra Firma पर प्रदूषण नियंत्रण नियमों के उल्लंघन, जल निकायों को प्रदूषित करने और स्थानीय निवासियों को परेशानी पहुँचाने का भी आरोप लगाया।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रही है। यह पहली बार नहीं है कि राज्य में सरकारी भूमि अधिग्रहण सौदों पर विपक्ष ने सवाल उठाए हों।
लोकायुक्त जाँच की माँग
BJP विधायक ने लोकायुक्त से इस मामले की गहन जाँच की माँग की है ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि हितों के टकराव में शामिल लोगों को, उनके पद और स्थिति की परवाह किए बिना, जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। कर्नाटक कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।