नशा मुक्त कश्मीर: KWO की चेयरपर्सन दरख्शां हसन भट बोलीं — महिलाएं बनेंगी नशे के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीर महिला संगठन (KWO) ने 12 जुलाई 2026 को घोषणा की कि वह नशा मुक्त भारत अभियान के तहत नशीली दवाओं की लत के विरुद्ध अपनी मुहिम को और तेज करेगा — और इस अभियान की बागडोर महिलाओं के हाथों में होगी। संगठन जागरूकता, रोकथाम और पुनर्वास के मोर्चों पर एक साथ काम करेगा।
संगठन की योजना और प्राथमिकताएँ
KWO की चेयरपर्सन दरख्शां हसन भट ने बताया कि संगठन जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार करेगा, परिवार सहायता प्रणालियों को मजबूत करेगा और विशेषज्ञों के माध्यम से काउंसलिंग व पुनर्वास की सुविधा देगा। उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जो नशीले पदार्थों के सेवन से जूझ रही हैं, ताकि वे बिना किसी डर या सामाजिक कलंक के इलाज करा सकें।
भट ने कहा, "जेंडर इक्विटी फेलोशिप कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने हमसे पूछा कि हम 'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत क्या कर रहे हैं। हमने पहले ही जागरूकता अभियान और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए हैं, लेकिन अब अपनी कोशिशों को तेज करने का समय आ गया है।"
महिलाएं क्यों हैं केंद्र में
भट ने नशीले पदार्थों के व्यापक सामाजिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि नशे की लत से अक्सर महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं — चाहे वे सीधे तौर पर पीड़ित हों, या फिर नशे की गिरफ्त में आए किसी परिजन की माँ, बेटी, पत्नी या बहन के रूप में। उनके अनुसार, नशे की समस्या का सामना करने में सक्षम मजबूत परिवारों और समुदायों के निर्माण के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, "महिलाओं में सामाजिक बदलाव लाने की ताकत है और उन्हें नशे की लत के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभानी चाहिए।"
अब तक की उपलब्धियाँ
भट के अनुसार, KWO सीधे तौर पर 20,000 से अधिक महिलाओं को जोड़ चुका है और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 80 लाख से अधिक लोगों तक अपनी पहुँच बना चुका है। सरकार की 100 दिन की 'नशा मुक्त अभियान' पहल में हजारों महिलाओं ने भाग लिया था, और KWO अब आने वाले महीनों में एक व्यापक कार्य योजना तैयार कर रहा है।
संगठन 'जेंडर इक्विटी फेलोशिप' जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं के नेतृत्व को भी बढ़ावा देता है, जो प्रतिभागियों को नेतृत्व, संचार, संवैधानिक जागरूकता, सार्वजनिक नीति, डिजिटल साक्षरता और सामुदायिक जुड़ाव में प्रशिक्षित करती है।
चुनौतियाँ और ग्रामीण पहुँच
घरेलू हिंसा, सीमित अवसर और सामाजिक बाधाओं जैसी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए भट ने कहा कि KWO जागरूकता अभियानों, मेंटरशिप, नेतृत्व प्रशिक्षण और जमीनी स्तर पर संपर्क के माध्यम से इन मुद्दों को — विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में — हल करने का काम जारी रखे हुए है।
आगे का रोडमैप
KWO का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाना, महिलाओं की उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, डिजिटल साक्षरता में सुधार करना और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। नशीली दवाओं की लत के खिलाफ लड़ाई इस रोडमैप की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक होगी।