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दिल्ली सोलर पॉलिसी: BJP सिर्फ संशोधन कर रही है, इंडस्ट्रियल-कमर्शियल सेक्टर को भी मिले लाभ — AAP की प्रियंका कक्कड़

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दिल्ली सोलर पॉलिसी: BJP सिर्फ संशोधन कर रही है, इंडस्ट्रियल-कमर्शियल सेक्टर को भी मिले लाभ — AAP की प्रियंका कक्कड़

सारांश

AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ का आरोप — BJP, केजरीवाल की सोलर पॉलिसी में सिर्फ संशोधन कर रही है और जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव हटाकर इंडस्ट्रियल व कमर्शियल सेक्टर को नजरअंदाज कर रही है। AAP की माँग है कि नीति सभी क्षेत्रों को समान लाभ दे।

मुख्य बातें

AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने 2 सितंबर को BJP सरकार पर आरोप लगाया कि वह केजरीवाल की सोलर पॉलिसी में केवल संशोधन कर रही है।
संशोधित नीति मुख्यतः रेजिडेंशियल उपभोक्ताओं तक सीमित है; इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
मूल नीति में जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव (GBI) का प्रावधान था, जिसे कथित तौर पर BJP सरकार ने संशोधनों में हटा दिया।
AAP ने माँग की कि GBI बहाल हो और नीति में सभी सेक्टर को समान प्रोत्साहन मिले।
BJP सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आम आदमी पार्टी (AAP) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने 2 सितंबर को दिल्ली की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर आरोप लगाया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में बनाई गई सोलर पॉलिसी में केवल संशोधन कर रही है, न कि कोई नई या बेहतर नीति ला रही है। उन्होंने माँग की कि संशोधित नीति में रेजिडेंशियल के साथ-साथ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को भी समान रूप से लाभ मिलना चाहिए।

मूल नीति और मौजूदा संशोधन में अंतर

कक्कड़ के अनुसार, केजरीवाल सरकार की सोलर पॉलिसी में रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल — तीनों क्षेत्रों को शामिल किया गया था। आलोचकों का कहना है कि BJP सरकार द्वारा किए गए संशोधनों में मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं पर ध्यान दिया गया है, जिससे उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस नीति के दायरे से काफी हद तक बाहर हो गए हैं।

AAP प्रवक्ता ने बताया कि मूल नीति में जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव (GBI) का प्रावधान था, यानी सोलर पैनल से प्रति यूनिट बिजली उत्पादन पर आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता था। यह प्रोत्साहन इस बात पर निर्भर नहीं था कि उत्पादित बिजली उपभोक्ता स्वयं उपयोग कर रहा है या ग्रिड में वापस भेज रहा है — जिससे अधिक से अधिक लोगों के लिए सोलर पैनल लगाना आर्थिक रूप से आकर्षक बनता था।

GBI हटाने का असर

कक्कड़ का आरोप है कि BJP सरकार ने संशोधित नीति में इस जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव को हटा दिया है। उनके अनुसार, यह प्रावधान सौर ऊर्जा अपनाने के लिए नागरिकों को प्रेरित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व था। इसके हटने से दिल्ली में सोलर पैनल लगाने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जो प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा झटका होगा।

गौरतलब है कि दिल्ली देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार है और सौर ऊर्जा का विस्तार पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने का एक अहम माध्यम माना जाता है।

AAP की माँग

AAP प्रवक्ता ने BJP सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, पूर्व की प्रभावी नीति के प्रावधानों को बनाए रखा जाए; दूसरी, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को संशोधित नीति में पर्याप्त स्थान दिया जाए; और तीसरी, ऐसी कोई शर्त न लगाई जाए जो लोगों को सोलर पैनल लगाने से हतोत्साहित करे।

कक्कड़ ने कहा, 'भाजपा सरकार चाहे तो इस नीति का पूरा श्रेय खुद ले सकती है, लेकिन इसका असर दिल्ली की जनता और पर्यावरण पर नकारात्मक नहीं होना चाहिए।'

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस मामले में BJP सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। AAP ने स्पष्ट किया है कि वह दिल्ली में स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सौर ऊर्जा के विस्तार के पक्ष में है और सरकार से इसी दिशा में ठोस कदम उठाने की माँग करती रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद दिल्ली की ऊर्जा नीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह दिल्ली की सत्ता-परिवर्तन के बाद की राजनीति का प्रतिबिंब है — जहाँ हर नई सरकार पिछली की नीतियों को या तो पूरी तरह अपनाती है या खारिज करती है, बजाय उन्हें साक्ष्य के आधार पर परखने के। जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव हटाना तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा अपनाने की प्रेरणा-संरचना को कमजोर करना है। दिल्ली जैसे प्रदूषण-संकटग्रस्त शहर में इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को नीति से बाहर रखना उस लक्ष्य के विरुद्ध है जिसका दावा दोनों पक्ष करते हैं। असली सवाल यह है कि BJP सरकार अपने संशोधनों का डेटा-आधारित औचित्य कब सामने रखेगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AAP प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने BJP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि BJP सरकार केजरीवाल सरकार की सोलर पॉलिसी में केवल संशोधन कर रही है और उसमें से जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव (GBI) हटा दिया है। साथ ही, संशोधित नीति में इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया है।
दिल्ली सोलर पॉलिसी में जनरेशन बेस्ड इंसेंटिव (GBI) क्या था?
GBI एक प्रावधान था जिसके तहत सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट बिजली उत्पादन पर आर्थिक प्रोत्साहन मिलता था — चाहे वे बिजली खुद उपयोग करें या ग्रिड में वापस भेजें। AAP का दावा है कि BJP सरकार ने संशोधनों में यह प्रावधान हटा दिया है।
केजरीवाल की सोलर पॉलिसी और BJP की संशोधित नीति में मुख्य अंतर क्या है?
AAP के अनुसार, केजरीवाल सरकार की नीति में रेजिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल — तीनों सेक्टर शामिल थे और GBI का प्रावधान था। BJP की संशोधित नीति मुख्यतः घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित बताई जा रही है और GBI को हटाया गया है।
AAP ने BJP सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
AAP ने माँग की है कि पूर्व की प्रभावी नीति के प्रावधान बनाए रखे जाएँ, GBI बहाल किया जाए, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर को नीति में समान स्थान दिया जाए, और ऐसी कोई शर्त न लगाई जाए जो लोगों को सोलर पैनल लगाने से हतोत्साहित करे।
दिल्ली में सौर ऊर्जा नीति क्यों महत्वपूर्ण है?
दिल्ली देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है और सौर ऊर्जा का विस्तार प्रदूषण नियंत्रण और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने का अहम माध्यम है। इसीलिए सोलर पॉलिसी में किए गए संशोधन पर्यावरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्र प्रेस
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