केरल चुनाव 2023: कुंजिकृष्णन ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत, फर्जी मतदाता सूची का लगाया आरोप

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केरल चुनाव 2023: कुंजिकृष्णन ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत, फर्जी मतदाता सूची का लगाया आरोप

सारांश

पय्यानूर में विधानसभा चुनाव के पहले, निर्दलीय उम्मीदवार कुंजिकृष्णन ने फर्जी मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की है। उनकी शिकायत में गंभीर अनियमितताओं का जिक्र है, जिससे चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

Key Takeaways

  • फर्जी मतदान की संभावना पर सवाल उठता है।
  • कुंजिकृष्णन ने चुनाव आयोग से शिकायत की है।
  • यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का समर्थन मिला है।
  • सीपीआई-एम से निष्कासन के बाद निर्दलीय उम्मीदवार बने।
  • पार्टी के भीतर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ी है।

पय्यानूर (केरल), 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुरुवार को होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से पहले कन्नूर जिले का पय्यानूर निर्वाचन क्षेत्र एक राजनीतिक गर्मागर्मी का केंद्र बन गया है। यहां विद्रोह, चुनावी धांधली के आरोप और पूर्व सहयोगियों के बीच कांटेदार मुकाबला देखने को मिल रहा है।

निर्दलीय उम्मीदवार वी. कुंजिकृष्णन ने मतदाता सूची में बड़ी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी के पास औपचारिक शिकायत की है।

उन्होंने कहा है कि मृत व्यक्तियों और निर्वाचन क्षेत्र में अब नहीं रहने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में बने हुए हैं, जिससे फर्जी मतदान की संभावना बढ़ गई है।

कुंजिकृष्णन ने अपनी शिकायत में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपात्र नामों को हटाने में विफलता दिखाई है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बीएलओ, जो कथित तौर पर वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं, ने ऐसे नामों को सूची में बनाए रखने में मदद की, जिससे फर्जी मतदान को बढ़ावा मिला।

शिकायत में पय्यानूर और उसके आसपास के गुप्त केंद्रों में फर्जी मतदाता पहचान पत्र बनाने का भी उल्लेख है।

कुंजिकृष्णन ने शिकायत दर्ज करने से पहले ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार की थी और चेतावनी दी है कि यदि मृत या अनुपस्थित व्यक्तियों के नाम पर कोई वोट डाला गया पाया जाता है तो वे अदालत का रुख करेंगे।

उन्होंने चुनावी निष्पक्षता की आवश्यकता को जोर देते हुए कहा कि प्रक्रिया को वास्तव में स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाया जाना चाहिए।

उनकी उम्मीदवारी का राजनीतिक महत्व इस मुकाबले में और भी रोमांच पैदा करता है।

कुंजिकृष्णन को सीपीआई-एम से तब निष्कासित किया गया था जब उन्होंने शहीदों के लिए निधि संग्रह से संबंधित आरोप लगाए थे, जिसके कारण उनका पार्टी नेतृत्व के साथ कड़वा मतभेद हो गया।

उनके चुनाव में उतरने को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का समर्थन मिला है, जिसके वरिष्ठ नेता और आरएसपी के दिग्गज नेता शिबू बेबी जॉन ने समर्थन देते हुए प्रभावी रूप से पय्यानूर में पार्टी की सीट उन्हें सौंप दी है।

इससे कुंजिकृष्णन और मौजूदा सीपीआई-एम विधायक टीआई मधुसूदन के बीच एक सीधी और तीव्र टक्कर का मंच तैयार हो गया है, जिन्होंने 2021 के चुनाव में 49,000 से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी।

जो कभी पार्टी एकता का गढ़ हुआ करता था, वह अब व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की लड़ाई में बदल गया है।

Point of View

और चुनाव आयोग के लिए यह एक चुनौती है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

कुंजिकृष्णन ने किस प्रकार की शिकायत की है?
कुंजिकृष्णन ने मतदाता सूची में अनियमितताओं और फर्जी मतदान की आशंका को लेकर शिकायत की है।
क्या कुंजिकृष्णन को किसी पार्टी का समर्थन प्राप्त है?
हाँ, उन्हें यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का समर्थन मिला है।
क्या कुंजिकृष्णन के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है?
कुंजिकृष्णन को पहले सीपीआई-एम से निष्कासित किया गया था।
कुंजिकृष्णन की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
कुंजिकृष्णन पूर्व में सीपीआई-एम के सदस्य थे, लेकिन पार्टी के साथ मतभेद के बाद वे निर्दलीय उम्मीदवार बने।
क्या चुनाव आयोग इस मामले पर कार्रवाई करेगा?
यह देखना होगा कि चुनाव आयोग कुंजिकृष्णन की शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
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